पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNS धारा 88 अब IPC धारा 312 है
जिससे गर्भपात हो जाता है।
पुराना कानून
BNS §88
जिससे गर्भपात हो जाता है।
जो कोई भी स्वेच्छा से किसी गर्भवती महिला का गर्भपात कराता है, यदि ऐसा गर्भपात महिला का जीवन बचाने के उद्देश्य से सद्भावनापूर्वक नहीं कराया गया हो, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा; और यदि महिला गर्भ धारण कर चुकी हो, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी देना होगा।
स्पष्टीकरण.—जो महिला स्वयं गर्भपात कराती है, वह इस धारा के दायरे में आती है।
पूरा पढ़ें: BNS §88स्पष्टीकरण.—जो महिला स्वयं गर्भपात कराती है, वह इस धारा के दायरे में आती है।
नया कानून
IPC §312
धारा 312 - गर्भपात कारित करना
गर्भपात कारित करना
जो कोई गर्भवती स्त्री का स्वेच्छया गर्भपात कारित करेगा, यदि ऐसा गर्भपात उस स्त्री का जीवन बचाने के प्रयोजन से सद्भावपूर्वक कारित न किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा, और यदि वह स्त्री स्पन्दनगर्भा हो, तो वह दोनों से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
स्पष्टीकरण--जो स्त्री स्वंय अपना गर्भपात कारित करती है, वह इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत आती है।
पूरा पढ़ें: IPC §312जो कोई गर्भवती स्त्री का स्वेच्छया गर्भपात कारित करेगा, यदि ऐसा गर्भपात उस स्त्री का जीवन बचाने के प्रयोजन से सद्भावपूर्वक कारित न किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा, और यदि वह स्त्री स्पन्दनगर्भा हो, तो वह दोनों से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
स्पष्टीकरण--जो स्त्री स्वंय अपना गर्भपात कारित करती है, वह इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत आती है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
