पाठ लगभग अपरिवर्तित है
BNS धारा 30 अब IPC धारा 92 है
बिना सहमति के किसी व्यक्ति के लाभ के लिए सद्भावनापूर्वक किया गया कार्य।
पुराना कानून
BNS §30
बिना सहमति के किसी व्यक्ति के लाभ के लिए सद्भावनापूर्वक किया गया कार्य।
कोई भी कार्य, सद्भावनापूर्वक किए जाने पर भी, उस व्यक्ति की सहमति के बिना भी, उस व्यक्ति को होने वाली किसी भी हानि के कारण अपराध नहीं है, यदि परिस्थितियाँ ऐसी हों कि उस व्यक्ति के लिए सहमति देना असंभव हो, या यदि वह व्यक्ति सहमति देने में असमर्थ हो, और उसका कोई अभिभावक या अन्य कानूनी रूप से प्रभारी व्यक्ति न हो जिससे लाभप्रद कार्य किए जाने से पहले समय पर सहमति प्राप्त की जा सके।
बशर्ते कि यह अपवाद निम्नलिखित पर लागू नहीं होगा--
(क) जानबूझकर मृत्यु का कारण बनना, या मृत्यु का कारण बनने का प्रयास करना;
(ख) किसी ऐसे कार्य को करना जिसके बारे में कार्य करने वाले व्यक्ति को पता हो कि उससे मृत्यु होने की संभावना है, मृत्यु या गंभीर चोट को रोकने या किसी गंभीर बीमारी या दुर्बलता का इलाज करने के अलावा किसी अन्य उद्देश्य से;
(ग) मृत्यु या चोट को रोकने के अलावा किसी अन्य उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या चोट पहुंचाने का प्रयास करना;
(घ) किसी अपराध का उकसाना, जिस अपराध को करने तक यह विस्तारित नहीं होगा।
चित्र।
(1) जेड अपने घोड़े से गिर गया है, और बेहोश है। ए, एक सर्जन, को पता चलता है कि जेड को ट्रेपेनिंग की आवश्यकता है।
ए, जेड की मृत्यु का इरादा न रखते हुए, बल्कि सद्भावना से, जेड के हित में, जेड के आत्म-निर्णय लेने की क्षमता वापस आने से पहले ही ट्रेपन क्रिया करता है। ए ने कोई अपराध नहीं किया है।
(2) Z को एक बाघ उठा ले जाता है। A, Z को जान से मारने का इरादा न रखते हुए, और Z के हित में सद्भावना से बाघ पर गोली चलाता है। A की गोली से Z को जानलेवा चोट लगती है। A ने कोई अपराध नहीं किया है।
(3) ए, एक सर्जन, एक बच्चे को दुर्घटना का शिकार होते हुए देखता है, जिसमें तत्काल ऑपरेशन न करने पर उसकी जान जाने की संभावना है। बच्चे के अभिभावक से संपर्क करने का समय नहीं है। ए, बच्चे के बार-बार आग्रह करने के बावजूद, सद्भावनापूर्वक बच्चे के हित में ऑपरेशन करता है। ए ने कोई अपराध नहीं किया है।
(4) A एक जलते हुए घर में Z नामक एक बच्चे के साथ है। नीचे मौजूद लोग उसे कंबल देते हैं। A बच्चे को घर की छत से नीचे गिरा देता है, यह जानते हुए कि गिरने से बच्चे की मृत्यु हो सकती है, लेकिन उसका इरादा बच्चे को मारने का नहीं है, और वह सद्भावनापूर्वक बच्चे के हित में ऐसा करता है। यहाँ, यदि गिरने से बच्चे की मृत्यु भी हो जाती है, तो भी A ने कोई अपराध नहीं किया है।
स्पष्टीकरण .--- मात्र आर्थिक लाभ धारा 26, 27 और इस धारा के अर्थ में लाभ नहीं है।
पूरा पढ़ें: BNS §30बशर्ते कि यह अपवाद निम्नलिखित पर लागू नहीं होगा--
(क) जानबूझकर मृत्यु का कारण बनना, या मृत्यु का कारण बनने का प्रयास करना;
(ख) किसी ऐसे कार्य को करना जिसके बारे में कार्य करने वाले व्यक्ति को पता हो कि उससे मृत्यु होने की संभावना है, मृत्यु या गंभीर चोट को रोकने या किसी गंभीर बीमारी या दुर्बलता का इलाज करने के अलावा किसी अन्य उद्देश्य से;
(ग) मृत्यु या चोट को रोकने के अलावा किसी अन्य उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या चोट पहुंचाने का प्रयास करना;
(घ) किसी अपराध का उकसाना, जिस अपराध को करने तक यह विस्तारित नहीं होगा।
चित्र।
(1) जेड अपने घोड़े से गिर गया है, और बेहोश है। ए, एक सर्जन, को पता चलता है कि जेड को ट्रेपेनिंग की आवश्यकता है।
ए, जेड की मृत्यु का इरादा न रखते हुए, बल्कि सद्भावना से, जेड के हित में, जेड के आत्म-निर्णय लेने की क्षमता वापस आने से पहले ही ट्रेपन क्रिया करता है। ए ने कोई अपराध नहीं किया है।
(2) Z को एक बाघ उठा ले जाता है। A, Z को जान से मारने का इरादा न रखते हुए, और Z के हित में सद्भावना से बाघ पर गोली चलाता है। A की गोली से Z को जानलेवा चोट लगती है। A ने कोई अपराध नहीं किया है।
(3) ए, एक सर्जन, एक बच्चे को दुर्घटना का शिकार होते हुए देखता है, जिसमें तत्काल ऑपरेशन न करने पर उसकी जान जाने की संभावना है। बच्चे के अभिभावक से संपर्क करने का समय नहीं है। ए, बच्चे के बार-बार आग्रह करने के बावजूद, सद्भावनापूर्वक बच्चे के हित में ऑपरेशन करता है। ए ने कोई अपराध नहीं किया है।
(4) A एक जलते हुए घर में Z नामक एक बच्चे के साथ है। नीचे मौजूद लोग उसे कंबल देते हैं। A बच्चे को घर की छत से नीचे गिरा देता है, यह जानते हुए कि गिरने से बच्चे की मृत्यु हो सकती है, लेकिन उसका इरादा बच्चे को मारने का नहीं है, और वह सद्भावनापूर्वक बच्चे के हित में ऐसा करता है। यहाँ, यदि गिरने से बच्चे की मृत्यु भी हो जाती है, तो भी A ने कोई अपराध नहीं किया है।
स्पष्टीकरण .--- मात्र आर्थिक लाभ धारा 26, 27 और इस धारा के अर्थ में लाभ नहीं है।
नया कानून
IPC §92
धारा 92 - सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
कोई बात जो किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक यद्यपी, उसकी सम्मति के बिना, की गई है, ऐसी किसी अपहानि के कारण, जो उस बात से उस व्यक्ति को कारित हो जाए, अपराध नहीं है, यदि परिस्थितियां ऐसी हों कि उस व्यक्ति के लिए यह असंभव हो कि वह अपनी सम्मति प्रकट करे या वह व्यक्ति सम्मति देने के लिए असमर्थ हो और उसका कोई संरक्षक या उसका विधिपूर्ण भारसाधक को दूसरा व्यक्ति न हो जिससे ऐसे समय पर सम्मति अभिप्राप्त करना संभव हो कि वह बात फायदे के साथ की जा सके :
विस्तार -
पहला - इस अपवाद का विस्तार साशय मृत्यु कारित करने या मृत्यु कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा ;
दूसरा - इस अपवाद का विस्तार मृत्यु या घोर उपहति के निवारण के या किसी घोर रोग या अंगशैथिल्य से मुक्त करने के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए किसी ऐसी बात के करने पर न होगा, जिसे करने वाला व्यक्ति जानता हो कि उससे मृत्यु कारित होना संभाव्य है ;
तीसरा - इस अपवाद का विस्तार मृत्यु या उपहति के निवारण के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए स्वेच्छा उपहति कारित करने या उपहति कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा ;
चौथा - इस अपवाद का विस्तार किसी ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण पर न होगा जिस अपराध के किए जाने पर इसका विस्तार नहीं है ।
द्रष्टांत :
(क) य अपने घोड़े से गिर गया और मूर्छित हो गया । क एक शल्यचिकित्सक का यह विचार है कि य के कपाल पर शल्यक्रिया आवशयक है । क, य की मृत्यु करने का आशय न रखते हुए, किंतु सद्भावपूर्वक य के फायदे के लिए, य के स्वयं किसी निर्णय पर पहुंचने की शक्ति प्राप्त करने से पूर्व ही कपाल पर शल्यक्रिया कर्ता है । क ने कोई अपराध नहीं किया ।
(ख) य को एक बाघ उठा ले जाता है । यह जानते हुए कि संभाव्य है कि गोली लगने से य मर जाए, किंतु य का वध करने का आशय न रखते हुए और सद्भावपूर्वक य के फायदे के आशय से क उस बाघ पर गोली चलाता है । क की गोली से य को मृत्युकारक घाव हो जाता है । क ने कोई अपराध नहीं किया ।
(ग) क, एक शल्यचिकित्सक , यह देखता है कि एक शिशु की ऐसी दुर्घटना हो गई है जिसका प्राणांतक साबित होना संभाव्य है, यदि शस्त्रकर्म तुरंत न कर दिया जाए । इतना समय नहीं है कि उस शिशु के संरक्षक से आवेदन किया जा सके । क, सद्भावपूर्वक शिशु के फायदे का आशय रखते हुए शिशु के अन्यथा अनुनय करने पर भी शस्त्रकर्म कर्ता है । क ने कोई अपराध नहीं किया ।
(घ) एक शिशु य के साथ क एक जलते हुए गॄह में है । गॄह के नीचे लोग एक कंबल तान लेते है । क उस शिशु को यह जानते हुए कि संभाव्य है कि गिरने से वह शिशु मर जाए किंतु उस शिशु को मार डालने का आशय न रखते हुए और सद्भावपूर्वक उस शिशु के फायदे के आशय से गॄह छत पर से नीचे गिरा देता है । यहां, यदि गिरने से वह शिशु मर भी जाता है, तो भी क ने कोई अपराध नहीं किया ।
स्पष्टीकरण - केवल धन संबंधी फायदा वह फायदा नहीं है, जो धारा 88, 89 और 92 के भीतर आता है ।
पूरा पढ़ें: IPC §92कोई बात जो किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक यद्यपी, उसकी सम्मति के बिना, की गई है, ऐसी किसी अपहानि के कारण, जो उस बात से उस व्यक्ति को कारित हो जाए, अपराध नहीं है, यदि परिस्थितियां ऐसी हों कि उस व्यक्ति के लिए यह असंभव हो कि वह अपनी सम्मति प्रकट करे या वह व्यक्ति सम्मति देने के लिए असमर्थ हो और उसका कोई संरक्षक या उसका विधिपूर्ण भारसाधक को दूसरा व्यक्ति न हो जिससे ऐसे समय पर सम्मति अभिप्राप्त करना संभव हो कि वह बात फायदे के साथ की जा सके :
विस्तार -
पहला - इस अपवाद का विस्तार साशय मृत्यु कारित करने या मृत्यु कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा ;
दूसरा - इस अपवाद का विस्तार मृत्यु या घोर उपहति के निवारण के या किसी घोर रोग या अंगशैथिल्य से मुक्त करने के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए किसी ऐसी बात के करने पर न होगा, जिसे करने वाला व्यक्ति जानता हो कि उससे मृत्यु कारित होना संभाव्य है ;
तीसरा - इस अपवाद का विस्तार मृत्यु या उपहति के निवारण के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए स्वेच्छा उपहति कारित करने या उपहति कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा ;
चौथा - इस अपवाद का विस्तार किसी ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण पर न होगा जिस अपराध के किए जाने पर इसका विस्तार नहीं है ।
द्रष्टांत :
(क) य अपने घोड़े से गिर गया और मूर्छित हो गया । क एक शल्यचिकित्सक का यह विचार है कि य के कपाल पर शल्यक्रिया आवशयक है । क, य की मृत्यु करने का आशय न रखते हुए, किंतु सद्भावपूर्वक य के फायदे के लिए, य के स्वयं किसी निर्णय पर पहुंचने की शक्ति प्राप्त करने से पूर्व ही कपाल पर शल्यक्रिया कर्ता है । क ने कोई अपराध नहीं किया ।
(ख) य को एक बाघ उठा ले जाता है । यह जानते हुए कि संभाव्य है कि गोली लगने से य मर जाए, किंतु य का वध करने का आशय न रखते हुए और सद्भावपूर्वक य के फायदे के आशय से क उस बाघ पर गोली चलाता है । क की गोली से य को मृत्युकारक घाव हो जाता है । क ने कोई अपराध नहीं किया ।
(ग) क, एक शल्यचिकित्सक , यह देखता है कि एक शिशु की ऐसी दुर्घटना हो गई है जिसका प्राणांतक साबित होना संभाव्य है, यदि शस्त्रकर्म तुरंत न कर दिया जाए । इतना समय नहीं है कि उस शिशु के संरक्षक से आवेदन किया जा सके । क, सद्भावपूर्वक शिशु के फायदे का आशय रखते हुए शिशु के अन्यथा अनुनय करने पर भी शस्त्रकर्म कर्ता है । क ने कोई अपराध नहीं किया ।
(घ) एक शिशु य के साथ क एक जलते हुए गॄह में है । गॄह के नीचे लोग एक कंबल तान लेते है । क उस शिशु को यह जानते हुए कि संभाव्य है कि गिरने से वह शिशु मर जाए किंतु उस शिशु को मार डालने का आशय न रखते हुए और सद्भावपूर्वक उस शिशु के फायदे के आशय से गॄह छत पर से नीचे गिरा देता है । यहां, यदि गिरने से वह शिशु मर भी जाता है, तो भी क ने कोई अपराध नहीं किया ।
स्पष्टीकरण - केवल धन संबंधी फायदा वह फायदा नहीं है, जो धारा 88, 89 और 92 के भीतर आता है ।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
