किस उपबंध के अधीन: भा.ना.सु.सं. धारा 187(3) (दं.प्र.सं. 167(2))
डिफ़ॉल्ट जमानत का आवेदन — भा.ना.सु.सं. धारा 187(3) (दं.प्र.सं. धारा 167(2))
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जैसे लिखी हैं वैसे ही — '318(4), 61(2) BNS'।
जिस दिन मजिस्ट्रेट ने पहली बार हिरासत में भेजा। यही दिन गिनती का पहला दिन है।
समय के क्रम में लिखिए: पहले क्या हुआ, फिर क्या। जो याद नहीं है उसका अनुमान मत लगाइए।
दस्तावेज़
न्यायालय: श्रीमान् न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी / मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ________________
जमानत आवेदन संख्या ................ सन् ................
________________ ...... आवेदक / अभियुक्त
बनाम
राज्य, द्वारा थानाध्यक्ष, थाना ________________ ...... विपक्षी
एफ़आईआर संख्या ________________ दिनांक ________________, थाना ________________
धाराएँ: bns-2023:271
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 187(3) [दं.प्र.सं. धारा 167(2)] के अधीन डिफ़ॉल्ट जमानत का आवेदन
किस उपबंध के अधीन: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 187(3) [1 जुलाई 2024 को लंबित मामलों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 167(2) का परंतुक]; संविधान का अनुच्छेद 21।
(अधिवक्ता के माध्यम से, या हिरासत से जेल के माध्यम से अभियुक्त द्वारा दाखिल किया जाए।)
आवेदक सादर निवेदन करता है:
1. आवेदक को उपर्युक्त एफ़आईआर में गिरफ़्तार किया गया और इस न्यायालय ने दिनांक ________________ को पहली बार हिरासत में भेजा। वह दिन हिरासत का पहला दिन गिना जाता है।
2. अभिकथित अपराध दंडनीय हैं: (जो लागू न हो उसे काट दें)
— मृत्यु, आजीवन कारावास, या दस वर्ष या अधिक के कारावास से: अवधि नब्बे दिन है;
— किसी अन्य अवधि से: अवधि साठ दिन है।
3. वह अवधि बीत चुकी है। आज तक भा.ना.सु.सं. धारा 193 [दं.प्र.सं. धारा 173] के अधीन कोई पुलिस रिपोर्ट इस न्यायालय में दाखिल नहीं हुई है।
4. उस अवधि के बीतने पर आवेदक को धारा 187(3) के अधीन जमानत पर छोड़े जाने का अपरिहार्य अधिकार है, और आवेदक जमानत देने को तैयार है तथा इसके द्वारा प्रस्तुत करता है। यह अधिकार इस आवेदन के दाखिल होते ही, किसी आरोप-पत्र से पहले, प्रवर्तनीय है (एम. रवीन्द्रन बनाम इंटेलिजेंस ऑफ़िसर, डीआरआई, (2021) 2 SCC 485; बिक्रमजीत सिंह बनाम पंजाब राज्य, (2020) 10 SCC 616)। केवल अधिकार विफल करने के लिए दाखिल अपूर्ण आरोप-पत्र इस अधिकार को समाप्त नहीं करता।
5. अतिरिक्त तथ्य:
________________
प्रार्थना: प्रार्थना है कि आवेदक को भा.ना.सु.सं. धारा 187(3) [दं.प्र.सं. धारा 167(2)] के अधीन, न्यायालय जो उचित समझे उन शर्तों पर, जमानत पर छोड़ा जाए; आवेदक आज ही जमानत देने को तैयार है।
आवेदक / द्वारा अधिवक्ता
________________
स्थान: ________________
दिनांक: ________________साथ क्या लगाना है
- पहली रिमांड के आदेश की प्रति — गिनती इसी तिथि से होती है।
- एफ़आईआर की प्रति, ताकि धाराओं से 60 या 90 दिन की अवधि दिखे।
- आवेदन उसी दिन दाखिल कीजिए जिस दिन अवधि पूरी हो — आरोप-पत्र पहले आ गया तो यह अधिकार समाप्त हो जाता है।
- जमानतदार (प्रतिभू) तैयार रखिए। मुफ़्त वकील के लिए जेल के विधिक सहायता केंद्र या DLSA से संपर्क कीजिए।
