किस उपबंध के अधीन: भा.ना.सु.सं. धारा 173(1) (दं.प्र.सं. 154(1)) + सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
साइबर सेल को शिकायत — ऑनलाइन ठगी की एफ़आईआर के लिए
यह प्रारूप अंग्रेज़ी में (English)
खाने भरिए
आप यहाँ जो कुछ भी लिखते हैं वह आपके अपने ब्राउज़र में ही रहता है। न कहीं भेजा जाता है, न सहेजा जाता है, न हमें दिखता है। पन्ना बंद करते ही वह मिट जाता है — इसलिए प्रिंट करने से पहले बंद मत कीजिए।
जो खाना खाली छोड़ेंगे, उसकी जगह प्रिंट में एक लकीर छपेगी — उसे हाथ से भरा जा सकता है। खाली फ़ॉर्म प्रिंट करके साथ ले जाना भी ठीक है।
वैसा ही जैसा आधार या पहचान-पत्र पर है।
समय के क्रम में लिखिए: पहले क्या हुआ, फिर क्या। जो याद नहीं है उसका अनुमान मत लगाइए।
पूरा नंबर लिखना ज़रूरी नहीं। अंतिम चार अंक पर्याप्त हैं।
इसी नंबर से बैंक पैसे का रास्ता पकड़ता है। ऐप से अक्षर-दर-अक्षर उतारिए।
दस्तावेज़
सेवा में,
प्रभारी अधिकारी / नोडल अधिकारी
साइबर क्राइम थाना / साइबर सेल
________________
विषय: दिनांक ________________ को हुई साइबर ठगी की शिकायत — एफ़आईआर दर्ज करने तथा लाभार्थी खातों को रोकने हेतु।
किस उपबंध के अधीन: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173(1) [पहले दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 154(1)], सहपठित सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धाराएँ 43, 66, 66ग और 66घ तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराएँ 318 और 319 [1 जुलाई 2024 से पहले के अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता, 1860 की धाराएँ 420 और 419]।
महोदय/महोदया,
1. मैं ________________, निवासी ________________ हूँ। मुझसे ________________ पर तथा ________________ पर सम्पर्क किया जा सकता है।
2. दिनांक ________________ को निम्नलिखित घटना हुई:
________________
3. इस प्रकार मेरे ________________ वाले खाते (खाता/कार्ड के अंतिम अंक ________________) से ₹________________ की राशि निकाल ली गई। लेन-देन की संदर्भ संख्या (UTR/RRN) ________________ है।
4. जिस व्यक्ति अथवा खाते में यह राशि गई, उसके बारे में मेरे पास यह विवरण है:
________________
5. मैंने इसकी सूचना राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर / हेल्पलाइन 1930 पर पहले ही दे दी है। पावती संख्या ________________ है।
6. उपर्युक्त कृत्यों से संज्ञेय अपराध बनते हैं। भा.ना.सु.सं. की धारा 173(1) [दं.प्र.सं. धारा 154(1)] के अनुसार संज्ञेय अपराध की सूचना लेखबद्ध की जाएगी, मुझे पढ़कर सुनाई जाएगी, मेरे हस्ताक्षर कराए जाएँगे और थाने की पुस्तक में दर्ज की जाएगी; तथा धारा 173(2) [दं.प्र.सं. धारा 154(2)] के अनुसार उसकी प्रति मुझे निःशुल्क दी जाएगी।
अतः निवेदन है कि —
(क) इस शिकायत पर एफ़आईआर दर्ज की जाए;
(ख) ऊपर दी गई संदर्भ संख्या के आधार पर रकम का पीछा करते हुए लाभार्थी खातों को तत्काल रोका जाए, इससे पहले कि राशि आगे निकल जाए;
(ग) एफ़आईआर की प्रति भा.ना.सु.सं. की धारा 173(2) [दं.प्र.सं. धारा 154(2)] के अधीन मुझे निःशुल्क दी जाए।
भवदीय,
________________
________________
स्थान: ________________
दिनांक: ________________
संलग्नक: साथ लगी सूची के अनुसार।साथ क्या लगाना है
- cybercrime.gov.in की शिकायत पावती अथवा 1930 पर की गई शिकायत की संख्या का प्रिंट।
- बैंक स्टेटमेंट, जिसमें वह डेबिट और उसकी UTR/RRN संख्या दिख रही हो।
- तिथि और समय सहित स्क्रीनशॉट — चैट, पेमेंट स्क्रीन, और वह ऐप या वेबसाइट।
- बैंक के एसएमएस और ईमेल, तथा कॉल लॉग। इनमें से कुछ भी मत मिटाइए।
- पहचान-पत्र की छायाप्रति और पासबुक या चेक के पन्ने की प्रति।
- दो प्रतियाँ ले जाइए — एक पर मुहर लगवाकर अपने पास रखिए। वही आपकी रसीद है।
