संविधान (16वाँ संशोधन) अधिनियम, 1963
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 19
- 84
- 173
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- तीसरी अनुसूची
राष्ट्रीय एकता परिषद द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रवाद समिति ने सिफारिश की कि संविधान के अनुच्छेद 19 में इस प्रकार संशोधन किया जाए जिससे संघ की अखंडता और संप्रभुता के संरक्षण और रखरखाव के लिए पर्याप्त शक्तियां उपलब्ध हो सकें।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (सोलहवाँ संशोधन) विधेयक, 1963 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (सोलहवाँ संशोधन) अधिनियम, 1963 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
राष्ट्रीय एकता परिषद द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रवाद समिति ने सिफारिश की कि संविधान के अनुच्छेद 19 में इस प्रकार संशोधन किया जाए जिससे संघ की अखंडता और संप्रभुता के संरक्षण और रखरखाव के लिए पर्याप्त शक्तियां उपलब्ध हो सकें। समिति का यह भी मत था कि राज्य विधानमंडल या संसद की सदस्यता के लिए प्रत्येक उम्मीदवार, और सार्वजनिक पद के प्रत्येक आकांक्षी और पदस्थ पदाधिकारी को संविधान का पालन करने और संघ की अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने की शपथ लेनी चाहिए, और इस उद्देश्य के लिए संविधान की तीसरी अनुसूची में शपथ के प्रारूपों में उपयुक्त संशोधन किया जाना चाहिए। इन सिफारिशों को लागू करने के लिए अनुच्छेद 19 के खंड (2), (3) और (4) में संशोधन प्रस्तावित है ताकि राज्य को भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में उस अनुच्छेद के खंड (1) के उपखंड (क), (ख) और (ग) द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रयोग पर उचित प्रतिबंध लगाने वाला कोई भी कानून बनाने में सक्षम बनाया जा सके। संविधान की तीसरी अनुसूची में अनुच्छेद 84 और 173 तथा शपथ के स्वरूपों में संशोधन का भी प्रस्ताव है ताकि यह प्रावधान किया जा सके कि संसद या राज्य विधानमंडल की सदस्यता के लिए प्रत्येक उम्मीदवार, केंद्रीय और राज्य मंत्री, संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्य, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश तथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने की शपथ लेनी होगी।
2. इस विधेयक का उद्देश्य निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करना है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के चौदहवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (सोलहवां संशोधन) अधिनियम, 1963 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 19 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 19 में,-
(क) खंड (2) में, "के हित में" शब्दों के बाद, "भारत की संप्रभुता और अखंडता" शब्द जोड़े जाएंगे;
(ख) खंड (3) और (4) में, "के हित में" शब्दों के बाद, "भारत की संप्रभुता और अखंडता या" शब्द जोड़े जाएंगे।
अनुच्छेद 84 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 84 में खंड (क) के स्थान पर निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"(क) भारत का नागरिक है, और चुनाव आयोग द्वारा इस संबंध में अधिकृत किसी व्यक्ति के समक्ष तीसरी अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए निर्धारित प्रपत्र के अनुसार शपथ या प्रतिज्ञान लेता है और उस पर हस्ताक्षर करता है;"।
अनुच्छेद 173 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 173 में खंड (क) के स्थान पर निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"(क) भारत का नागरिक है, और चुनाव आयोग द्वारा इस संबंध में अधिकृत किसी व्यक्ति के समक्ष तीसरी अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए निर्धारित प्रपत्र के अनुसार शपथ या प्रतिज्ञान लेता है और उस पर हस्ताक्षर करता है;"।
तीसरी अनुसूची का संशोधन
संविधान की तीसरी अनुसूची में,-
(क) प्रपत्र 1 में, "कानून द्वारा स्थापित भारत का संविधान" शब्दों के बाद, "मैं भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखूंगा" शब्द जोड़े जाएंगे;
(ख) प्रपत्र तृतीय के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:---
तृतीय
(ए) संसद के चुनाव के लिए उम्मीदवार द्वारा ली जाने वाली शपथ या प्रतिज्ञान का प्रारूप:--
मैं, एबी, राज्य परिषद (या लोक सभा) में एक सीट भरने के लिए उम्मीदवार के रूप में नामित होने पर, ईश्वर के नाम पर शपथ लेता/गंभीरतापूर्वक प्रतिज्ञा करता/करती हूँ कि मैं कानून द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा और वफादारी रखूंगा/रखूंगी और भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखूंगा/रखूंगी।
(ख) संसद सदस्य द्वारा ली जाने वाली शपथ या प्रतिज्ञान का प्रारूप:-
मैं, एबी, राज्य परिषद (या लोक सभा) का सदस्य निर्वाचित (या मनोनीत) होकर ईश्वर के नाम पर शपथ लेता/गंभीरतापूर्वक प्रतिज्ञा करता/करती हूँ कि मैं कानून द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा और वफादारी रखूंगा, भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखूंगा और उस कर्तव्य का निष्ठापूर्वक निर्वहन करूंगा जिसे मैं ग्रहण करने जा रहा हूँ।
(ग) प्रपत्र IV, V और VIII में, "कानून द्वारा स्थापित भारत का संविधान" शब्दों के बाद, "मैं भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखूंगा" शब्द जोड़े जाएंगे;
(घ) प्रपत्र VII के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
सातवीं
(ए) किसी राज्य के विधानमंडल के चुनाव के लिए उम्मीदवार द्वारा ली जाने वाली शपथ या प्रतिज्ञान का प्रारूप:-
मैं, एबी, विधान सभा (या विधान परिषद) में एक सीट भरने के लिए उम्मीदवार के रूप में नामित होने पर, ईश्वर के नाम पर शपथ लेता/गंभीरता से प्रतिज्ञा करता/करती हूँ कि मैं कानून द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा और वफादारी रखूंगा और भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखूंगा।
(ख) किसी राज्य के विधानमंडल के सदस्य द्वारा ली जाने वाली शपथ या प्रतिज्ञान का प्रारूप:-
मैं, एबी, विधान सभा (या विधान परिषद) का सदस्य निर्वाचित (या मनोनीत) होकर, ईश्वर के नाम पर शपथ लेता/गंभीरतापूर्वक प्रतिज्ञा करता/करती हूँ कि मैं कानून द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा और वफादारी रखूंगा, भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखूंगा और उस कर्तव्य का निष्ठापूर्वक निर्वहन करूंगा जिसे मैं ग्रहण करने जा रहा हूँ।
