संविधान (14वाँ संशोधन) अधिनियम, 1962
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 81
- 240
लेख सम्मिलित किए गए
- 239ए
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- पहली अनुसूची
- चौथी अनुसूची
भारत और फ्रांस की सरकारों द्वारा 16 अगस्त, 1962 को समर्पण संधि की पुष्टि के साथ, पांडिचेरी, करिकल, माहे और यानम के फ्रांसीसी प्रतिष्ठान उस तिथि से भारतीय संघ के क्षेत्र बन गए।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (चौदहवाँ संशोधन) विधेयक, 1962 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (चौदहवाँ संशोधन) अधिनियम, 1962 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
भारत और फ्रांस की सरकारों द्वारा 16 अगस्त, 1962 को संधि पर हस्ताक्षर किए जाने के साथ ही, फ्रांस के पांडिचेरी, करिकल, माहे और यनम स्थित क्षेत्र उस तिथि से भारतीय संघ के अंतर्गत आ गए। यह विधेयक इन क्षेत्रों को संविधान में ही 'पांडिचेरी' नामक एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में निर्दिष्ट करने का प्रावधान करता है। संविधान के अनुच्छेद 81(1)(ख) के अनुसार, लोकसभा में केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की संख्या बीस से अधिक नहीं हो सकती। यह अधिकतम संख्या पहले ही पूरी हो चुकी है। तदनुसार, यह विधेयक इस संख्या को बढ़ाकर पच्चीस करने का प्रस्ताव करता है ताकि लोकसभा में पांडिचेरी को तत्काल प्रतिनिधित्व दिया जा सके और भविष्य की आकस्मिक स्थितियों के लिए भी प्रावधान किया जा सके। विधेयक में राज्य परिषद में भी इस क्षेत्र के प्रतिनिधित्व का प्रावधान है।
हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, गोवा, दमन और दीव तथा पुडुचेरी के केंद्र शासित प्रदेशों में विधानमंडल और मंत्रिपरिषदें गठित करने का प्रस्ताव है, जो राज्यों के पुनर्गठन से पहले भाग सी के कुछ राज्यों में लागू योजना के अनुरूप होंगी। विधेयक में संसद को इस उद्देश्य के लिए कानून बनाने की आवश्यक विधायी शक्ति प्रदान करने का प्रावधान है, जिसके लिए एक नया अनुच्छेद 239ए जोड़ा गया है, जो राज्यों के पुनर्गठन से पहले अनुच्छेद 240 के प्रावधानों का अनुसरण करता है।
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम
भारत गणराज्य के तेरहवें वर्ष में संसद द्वारा यह अधिनियमित किया जाता है कि:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (चौदहवां संशोधन) अधिनियम, 1962 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 81 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 81 में, खंड (1) के उपखंड (ख) में, "बीस सदस्य" शब्दों के स्थान पर "पच्चीस सदस्य" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
पहली अनुसूची का संशोधन
संविधान की प्रथम अनुसूची में, "II. केंद्र शासित प्रदेश" शीर्षक के अंतर्गत, प्रविष्टि 8 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि जोड़ी जाएगी, अर्थात्:-
9. पांडिचेरी: वे क्षेत्र जो 16 अगस्त, 1962 से ठीक पहले भारत में फ्रांसीसी प्रतिष्ठानों में शामिल थे, जिन्हें पांडिचेरी, कारिकल, माहे और यानम के नाम से जाना जाता था।
नए अनुच्छेद 239A का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 239 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
239ए. कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्थानीय विधानमंडल या मंत्रिपरिषद या दोनों का सृजन।
(1) संसद विधि द्वारा हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, गोवा, दमन और दीव तथा पुडुचेरी के किसी भी केंद्र शासित प्रदेश के लिए निम्नलिखित का सृजन कर सकती है: (क) एक निकाय, चाहे निर्वाचित हो या आंशिक रूप से मनोनीत और आंशिक रूप से निर्वाचित, जो केंद्र शासित प्रदेश के विधानमंडल के रूप में कार्य करे, या (ख) मंत्रिपरिषद, या दोनों, प्रत्येक मामले में ऐसी संरचना, शक्तियां और कार्य, जैसा कि विधि में निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(2) खंड (1) में निर्दिष्ट कोई भी कानून अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन नहीं माना जाएगा, भले ही उसमें कोई ऐसा प्रावधान हो जो इस संविधान में संशोधन करता हो या संशोधन करने का प्रभाव रखता हो।
अनुच्छेद 240 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 240 में, खंड (1) में,-
(क) प्रविष्टि (घ) के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि जोड़ी जाएगी, अर्थात्:-
"(ई) पांडिचेरी:";
(ख) अंत में निम्नलिखित प्रावधान जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
बशर्ते कि जब अनुच्छेद 239ए के तहत गोवा, दमन और दीव या पुडुचेरी के केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विधानमंडल के रूप में कार्य करने हेतु किसी निकाय का गठन किया जाता है, तो राष्ट्रपति विधानमंडल की पहली बैठक के लिए निर्धारित तिथि से उस केंद्र शासित प्रदेश की शांति, प्रगति और सुशासन के लिए कोई नियम नहीं बनाएगा।
चौथी अनुसूची का संशोधन
संविधान की चौथी अनुसूची में, तालिका में,-
(क) प्रविष्टि 20 के बाद, प्रविष्टि "21. पांडिचेरी ........1" जोड़ी जाएगी;
(ख) अंकों "225" के स्थान पर अंक "226" प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
7. कुछ प्रावधानों का पूर्वव्यापी प्रभाव।- धारा 3 और धारा 5 का खंड (क) 16 अगस्त, 1962 से लागू माना जाएगा।
