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धारा 203 - किए गए अपराध के विषय में मिथ्या इत्तिला देना
किए गए अपराध के विषय में मिथ्या इत्तिला देना जो कोई यह जानते हुए, या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए, कि कोई अपराध किया गया है उस अपराध के बारे में कोई ऐसी इत्तिला देगा, जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों…
पूरा पढ़ेंकिसी अपराध के संबंध में झूठी जानकारी देना।
जो कोई भी, यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के संबंध में कोई ऐसी जानकारी देता है जिसे वह जानता है या मानता है कि वह झूठी है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा। स्पष्टीकरण। —धारा 238 और 239 में तथा इस धारा…
पूरा पढ़ेंधारा 240 - उस भारतीय सिक्के का परिदान जिसका कूटकॄत होना कब्जे में आने के समय ज्ञात था
उस भारतीय सिक्के का परिदान जिसका कूटकॄत होना कब्जे में आने के समय ज्ञात था जो कोई अपने पास कोई ऐसा कूटकॄत सिक्का होते हुए, जो भारतीय सिक्के की कूटकॄति हो और जिसे वह उस समय, जब वह उसके कब्जे में आया था, जानता था कि वह भारतीय सिक्के की कूटकॄति है, कपटपूर्वक, या इस आशय से कि कपट किया जाए, उसे किसी व्यक्ति को परिदत्त…
पूरा पढ़ेंअसली, जाली या नकली सिक्के, सरकारी स्टाम्प, करेंसी नोट या बैंक नोट के रूप में उपयोग करना।
जो कोई भी जाली या नकली सिक्के, स्टाम्प, करेंसी नोट या बैंक नोट का आयात या निर्यात करता है, या उसे बेचता है या वितरित करता है, या किसी अन्य व्यक्ति से खरीदता है या प्राप्त करता है, या अन्यथा उसका व्यापार करता है या उसे असली मानकर उपयोग करता है, यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि वह जाली या नकली है, उसे आजीवन…
पूरा पढ़ें- IPC §203BNS §240
धारा 203 - किए गए अपराध के विषय में मिथ्या इत्तिला देना
किसी अपराध के संबंध में झूठी जानकारी देना।
- IPC §240BNS §179
धारा 240 - उस भारतीय सिक्के का परिदान जिसका कूटकॄत होना कब्जे में आने के समय ज्ञात था
असली, जाली या नकली सिक्के, सरकारी स्टाम्प, करेंसी नोट या बैंक नोट के रूप में उपयोग करना।
