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धारा 124 - किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोधित करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना
किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोधित करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना जो कोई भारत के राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल को ऐसे राष्ट्रपति या राज्यपाल की विधिपूर्ण शक्तियों में से किसी शक्ति का किसी प्रकार प्रयोग करने के लिए या प्रयोग करने से विरत रहने के लिए…
पूरा पढ़ेंराष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर किसी भी वैध शक्ति के प्रयोग को विवश करने या प्रतिबंधित करने के इरादे से हमला करना।
जो कोई भी भारत के राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल को उनकी किसी भी वैध शक्ति का प्रयोग करने या न करने के लिए प्रेरित या विवश करने के इरादे से, आपराधिक बल प्रयोग या आपराधिक बल प्रदर्शन के माध्यम से ऐसे राष्ट्रपति या राज्यपाल पर हमला करता है, उन्हें गलत तरीके से रोकता है, या गलत तरीके से रोकने का प्रयास करता है, या…
पूरा पढ़ेंधारा 151 - पांच या अधिक व्यक्तियों के जमाव को बिखर जाने का समादेश दिए जाने के पश्चात् उसमें जानते हुए सम्मिलित होना या बने रहना
पांच या अधिक व्यक्तियों के जमाव को बिखर जाने का समादेश दिए जाने के पश्चात् उसमें जानते हुए सम्मिलित होना या बने रहना जो कोई पांच या अधिक व्यक्तियों के किसी जमाव में, जिससे लोक शांति में विघ्न कारित होना सम्भाव्य हो, ऐसे जमाव को बिखर जाने का समादेश विधिपूर्वक दे दिए जाने पर जानते हुए सम्मिलित होगा या बना रहेगा, वह…
पूरा पढ़ेंगैरकानूनी सभा।
(1) पाँच या दो से अधिक व्यक्तियों की सभा को गैरकानूनी सभा कहा जाता है, यदि उस सभा में उपस्थित व्यक्तियों का सामान्य उद्देश्य निम्नलिखित हो: (क) आपराधिक बल प्रयोग या आपराधिक बल प्रदर्शन द्वारा केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार या संसद या किसी राज्य के विधानमंडल या किसी लोक सेवक को उसके वैध अधिकार के प्रयोग में भयभीत…
पूरा पढ़ें- IPC §124BNS §151
धारा 124 - किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोधित करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना
राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर किसी भी वैध शक्ति के प्रयोग को विवश करने या प्रतिबंधित करने के इरादे से हमला करना।
- IPC §151BNS §189(5)
धारा 151 - पांच या अधिक व्यक्तियों के जमाव को बिखर जाने का समादेश दिए जाने के पश्चात् उसमें जानते हुए सम्मिलित होना या बने रहना
गैरकानूनी सभा।
