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धारा 106 - घातक हमले के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जब कि निर्दोष व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है
घातक हमले के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जब कि निर्दोष व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है जिस हमले से मृत्यु की आशंका युक्तियुक्त रूप से कारित होती है उसके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रयोग करने में यदि प्रतिरक्षक ऐसी स्थिति में हो कि निर्दोष व्यक्ति की अपहानि की जोखिम के बिना वह उस अधिकार का…
पूरा पढ़ेंनिर्दोष व्यक्ति को नुकसान पहुंचने के खतरे की स्थिति में जानलेवा हमले के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार।
यदि किसी ऐसे हमले के विरुद्ध आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते समय, जिससे मृत्यु की आशंका उत्पन्न होती है, बचावकर्ता ऐसी स्थिति में हो कि वह किसी निर्दोष व्यक्ति को हानि पहुँचाने के जोखिम के बिना उस अधिकार का प्रभावी ढंग से प्रयोग नहीं कर सकता है, तो उसका आत्मरक्षा का अधिकार उस जोखिम को उठाने तक विस्तारित होता है।…
पूरा पढ़ेंलापरवाही से मृत्यु का कारण बनना।
1 [304ए. लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना। --जो कोई भी किसी ऐसे जल्दबाजी या लापरवाहीपूर्ण कार्य को करके किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।] राज्य संशोधन हिमाचल…
पूरा पढ़ेंलापरवाही से मृत्यु का कारण बनना।
(1) जो कोई भी लापरवाही या असावधानी से किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है, जो जानबूझकर हत्या न हो, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से पांच वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा; और यदि ऐसा कार्य किसी पंजीकृत चिकित्सक द्वारा चिकित्सा प्रक्रिया करते समय किया जाता है, तो उसे किसी भी प्रकार…
पूरा पढ़ें- IPC §106BNS §44
धारा 106 - घातक हमले के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जब कि निर्दोष व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है
निर्दोष व्यक्ति को नुकसान पहुंचने के खतरे की स्थिति में जानलेवा हमले के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार।
- IPC §304ABNS §106
लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना।
