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धारा 180. विचारण का स्थान, जहां कार्य किसी अन्य अपराध से संबंध के कारण अपराध है
180. विचारण का स्थान, जहां कार्य किसी अन्य अपराध से संबंध के कारण अपराध है जब कोई कार्य किसी अन्य कार्य से अपने संबंध के कारण अपराध है, और वह अन्य कार्य भी अपराध है, अथवा यदि उसका कर्ता अपराध करने में समर्थ होता तो वह अपराध होता, तब प्रथम वर्णित अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय…
पूरा पढ़ेंवह स्थान जहां किसी कृत्य का अपराध होने का कारण अन्य अपराध से संबंधित होना है।
जब कोई कार्य किसी अन्य कार्य से संबंधित होने के कारण अपराध है, जो कि अपराध है या यदि कर्ता अपराध करने में सक्षम होता तो वह अपराध होता, तो पहले उल्लिखित अपराध की जांच या मुकदमा उस न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसके स्थानीय क्षेत्राधिकार में वह कार्य किया गया था।
पूरा पढ़ेंधारा 200. परिवादी की परीक्षा
200. परिवादी की परीक्षा परिवाद पर किसी अपराध का संज्ञान करने वाला मजिस्ट्रेट परिवादी की और उपस्थित साक्षियों की, यदि कोई हों, शपथ पर परीक्षा करेगा और ऐसी परीक्षा का सार लेखबद्ध किया जाएगा तथा उस पर परिवादी और साक्षियों द्वारा और मजिस्ट्रेट द्वारा भी हस्ताक्षर किए जाएंगे: परन्तु जब परिवाद लिखित रूप में किया जाता है तब…
पूरा पढ़ेंशिकायतकर्ता की जांच।
(1) किसी शिकायत पर किसी अपराध का संज्ञान लेते समय अधिकार क्षेत्र रखने वाला मजिस्ट्रेट, शिकायतकर्ता और उपस्थित गवाहों (यदि कोई हो) से शपथ पर पूछताछ करेगा और ऐसी पूछताछ का सार लिखित रूप में दर्ज किया जाएगा और उस पर शिकायतकर्ता और गवाहों तथा मजिस्ट्रेट द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे। बशर्ते कि मजिस्ट्रेट द्वारा किसी अपराध…
पूरा पढ़ें- CRPC §180BNSS §200
धारा 180. विचारण का स्थान, जहां कार्य किसी अन्य अपराध से संबंध के कारण अपराध है
वह स्थान जहां किसी कृत्य का अपराध होने का कारण अन्य अपराध से संबंधित होना है।
- CRPC §200BNSS §223
धारा 200. परिवादी की परीक्षा
शिकायतकर्ता की जांच।
