बीएसए → आईईए
3 प्रविष्टियाँ
आपराधिक मामलों में पिछला अच्छा चरित्र प्रासंगिक होता है।
आपराधिक कार्यवाही में, आरोपी व्यक्ति का अच्छे चरित्र का होना प्रासंगिक होता है।
पूरा पढ़ेंदाण्डिक मामलों में पूर्वतन अच्छा शील सुसंगत है
दाण्डिक कार्यवाहियों में यह तथ्य सुसंगत है कि अभियुक्त व्यक्ति अच्छे शील का है ।
पूरा पढ़ेंकुछ मामलों में चरित्र या पूर्व यौन अनुभव के साक्ष्य प्रासंगिक नहीं होते हैं।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 69, धारा 70, धारा 71, धारा 74, धारा 75, धारा 76, धारा 77 या धारा 78 के तहत किसी अपराध के अभियोग में या ऐसे किसी अपराध को करने के प्रयास के मामले में, जहां सहमति का प्रश्न विचाराधीन हो, पीड़ित के चरित्र या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसे…
पूरा पढ़ेंकतिपय (कुछ) मामलों में शील या पूर्व लैंगिक अनुभव के साक्ष्य को सुसंगत न होना
भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (१८६० का ४५ ) की धारा ३५४, ३५४-क, ३५४-ख, ३५४-ग, ३५४-घ, ३७६, १.(३७६-क, ३७६ कख, ३७६-ख, ३७६-ग, ३७६-घ, ३७६ घक, ३७६ घख) या धारा ३७६-ङ के अधीन किसी अपराध के लिए किसी अभियोजन में या किसी ऐसे अपराध के करने के प्रयत्न के लिए , जहाँ सम्मति का प्रश्न विवाद्य है, वहाँ पीडिता के शील या ऐसे व्यक्ति का किसी…
पूरा पढ़ेंस्वीकार किए गए तथ्यों को साबित करना आवश्यक नहीं है।
किसी भी कार्यवाही में ऐसे किसी तथ्य को साबित करने की आवश्यकता नहीं होती है जिसे संबंधित पक्षकार या उनके प्रतिनिधि सुनवाई के दौरान स्वीकार करने के लिए सहमत हों, या जिसे सुनवाई से पहले वे अपने हस्ताक्षर वाले किसी लिखित दस्तावेज द्वारा स्वीकार करने के लिए सहमत हों, या जिसे उस समय लागू किसी भी नियम के अनुसार उनके द्वारा…
पूरा पढ़ेंस्वीकृत तथ्यों को साबित करना आवश्यक नहीं है
किसी ऐसे तथ्य को किसी कार्यवाही में साबित करना आवश्यक नहीं है, जिसे उस कार्यवाही के पक्षकार या उनके अभिकर्ता सुनवाई पर स्वीकार करने के लिए सहमत हो जाते है, या जिसे वे सुनवाई के पूर्व किसी स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा स्वीकार करने के लिए सहमत हो जाते है या जिसके बारे में अभिवचन संबंधी किसी तत्समय प्रवृत्त नियम के अधीन यह…
पूरा पढ़ें- BSA §47IEA §53
आपराधिक मामलों में पिछला अच्छा चरित्र प्रासंगिक होता है।
दाण्डिक मामलों में पूर्वतन अच्छा शील सुसंगत है
- BSA §48IEA §53A
कुछ मामलों में चरित्र या पूर्व यौन अनुभव के साक्ष्य प्रासंगिक नहीं होते हैं।
कतिपय (कुछ) मामलों में शील या पूर्व लैंगिक अनुभव के साक्ष्य को सुसंगत न होना
- BSA §53IEA §58
स्वीकार किए गए तथ्यों को साबित करना आवश्यक नहीं है।
स्वीकृत तथ्यों को साबित करना आवश्यक नहीं है
