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13 प्रविष्टियाँ
परिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 40 - “अपराध”
“अपराध” इस धारा के खण्ड 2 और 3 में वर्णित अध्यायों और धाराओं में के सिवाय “अपराध” शब्द इस संहिता द्वारा दण्डनीय की गई किसी बात का द्योतक है । अध्याय 4, अध्याय 5क और निम्नलिखित धारा, अर्थात् धारा 64, 65, 66, 67, 71, 109, 110, 112, 114, 115, 116, 117, 187, 194, 195, 203, 211, 213, 214, 221, 222, 223,, 224, 225, 327,…
पूरा पढ़ेंशरीर की निजी रक्षा के अधिकार का प्रारंभ और निरंतरता।
शरीर की आत्मरक्षा का अधिकार उस क्षण से शुरू हो जाता है जब किसी अपराध को अंजाम देने के प्रयास या धमकी से शरीर को खतरे की उचित आशंका उत्पन्न होती है, भले ही वह अपराध न हुआ हो; और यह तब तक जारी रहता है जब तक शरीर को खतरे की ऐसी आशंका बनी रहती है।
पूरा पढ़ेंधारा 102 - शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार उसी क्षण प्रारंभ हो जाता है, जब अपराध करने के प्रयत्न या धमकी से शरीर के संकट की युक्तियुक्त आशंका पैदा होती है, चाहे वह अपराध न किया गया हो, और वह तब तक बना रहता है जब तक शरीर के संकट की ऐसी आशंका बनी रहती है ।
पूरा पढ़ेंडकैती।
(1) जब पाँच या दो से अधिक व्यक्ति संयुक्त रूप से डकैती करते हैं या डकैती करने का प्रयास करते हैं, या जहाँ संयुक्त रूप से डकैती करने या डकैती करने का प्रयास करने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या, और ऐसे कृत्य या प्रयास में उपस्थित और सहायता करने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या पाँच या दो से अधिक हो, तो ऐसा करने, प्रयास करने…
पूरा पढ़ेंधारा 402 - डकैती करने के प्रयोजन से एकत्रित होना
डकैती करने के प्रयोजन से एकत्रित होना जो कोई इस अधिनियम के पारित होने के पश्चात् किसी भी समय डकैती करने के प्रयोजन से एकत्रित पांच या अधिक व्यक्तियों में से एक होगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंडकैती।
(1) जब पाँच या दो से अधिक व्यक्ति संयुक्त रूप से डकैती करते हैं या डकैती करने का प्रयास करते हैं, या जहाँ संयुक्त रूप से डकैती करने या डकैती करने का प्रयास करने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या, और ऐसे कृत्य या प्रयास में उपस्थित और सहायता करने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या पाँच या दो से अधिक हो, तो ऐसा करने, प्रयास करने…
पूरा पढ़ेंधारा 400 - डाकुओं की टोली का होने के लिए दण्ड
डाकुओं की टोली का होने के लिए दण्ड जो कोई इस अधिनियम के पारित होने के पश्चात् किसी भी समय ऐसे व्यक्तियों की टोली का होगा, जो अभ्यासतः डकैती करने के प्रयोजन से सहयुक्त हों, वह 1[आजीवन कारावास] से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंडाकुओं के गिरोह से संबंधित होने पर मिलने वाली सजा, आदि।
जो कोई भी ऐसे गिरोह का सदस्य हो जो आदतन चोरी या डकैती करता हो, और वह डाकुओं का गिरोह न हो, उसे सात वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा दी जाएगी और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 401 - चोरों की टोली का होने के लिए दण्ड
चोरों की टोली का होने के लिए दण्ड जो कोई इस अधिनियम के पारित होने के पश्चात् किसी भी समय ऐसे व्यक्तियों की किसी घूमती-फिरती या अन्य टोली का होगा जो, अभ्यासतः चोरी या लूट करने के प्रयोजन से सहयुक्त हों और वह टोली ठगों या डाकुओं की टोली न हो, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और…
पूरा पढ़ेंसंपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग।
जो कोई भी बेईमानी से किसी चल संपत्ति का दुरुपयोग करता है या उसे अपने उपयोग के लिए परिवर्तित करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि छह महीने से कम नहीं होगी लेकिन दो वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है और जुर्माना भी लगाया जाएगा। चित्र। (क) यदि ए, ज़ेड की संपत्ति को ज़ेड के कब्जे से सद्भावनापूर्वक…
पूरा पढ़ेंधारा 403 - सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग
सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग जो कोई बेईमानी से किसी जंगम सम्पत्ति का दुर्विनियोग करेगा या उसको अपने उपयोग के लिए संपरिवर्तित कर लेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा । दृष्टांत : (क) क, य की सम्पत्ति को उस समय जब कि क उस…
पूरा पढ़ेंमृतक व्यक्ति की मृत्यु के समय उसके पास मौजूद संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग करना।
जो कोई भी बेईमानी से किसी संपत्ति का दुरुपयोग करता है या उसे अपने निजी उपयोग के लिए परिवर्तित करता है, यह जानते हुए कि ऐसी संपत्ति किसी मृत व्यक्ति के कब्जे में उसकी मृत्यु के समय थी, और उसके बाद से किसी ऐसे व्यक्ति के कब्जे में नहीं रही है जो कानूनी रूप से उस संपत्ति पर कब्जा करने का हकदार हो, उसे किसी भी प्रकार के…
पूरा पढ़ेंधारा 404 - ऐसी सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग जो मॄत व्यक्ति की मॄत्यु के समय उसके कब्जे में थी
ऐसी सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग जो मॄत व्यक्ति की मॄत्यु के समय उसके कब्जे में थी जो कोई किसी सम्पत्ति को, यह जानते हुए कि ऐसी सम्पत्ति किसी व्यक्ति की मॄत्यु के समय उस मॄत व्यक्ति के कब्जे में थी, और तब से किसी व्यक्ति के कब्जे में नहीं रही है, जो ऐसे कब्जे का वैध रूप से हकदार है, बेईमानी से दुर्विनियोजित…
पूरा पढ़ेंविश्वासघात का आपराधिक मामला।
(1) जो कोई भी, किसी भी प्रकार से संपत्ति या संपत्ति पर किसी भी आधिपत्य के साथ सौंपा गया हो, बेईमानी से उस संपत्ति का दुरुपयोग करता है या उसे अपने उपयोग के लिए परिवर्तित करता है, या बेईमानी से उस संपत्ति का उपयोग करता है या उसका निपटान करता है, कानून के किसी भी निर्देश का उल्लंघन करते हुए, जिसमें ऐसे विश्वास के निर्वहन…
पूरा पढ़ेंधारा 405 - आपराधिक न्यासभंग
आपराधिक न्यासभंग जो कोई किसी सम्पत्ति का, या सम्पत्ति पर के किसी आधिपत्य का, किसी भी प्रकार से न्यास सौंपा जाकर, उस सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग कर लेगा या उसे अपने उपयोग में संपरिवर्तित कर लेगा, अथवा उस सम्पत्ति का उपयोग या व्ययन विधि के किसी ऐसे निदेश के, जो उस ढंग को विहित करता है जिससे ऐसे न्यास का निर्वहन…
पूरा पढ़ेंविश्वासघात का आपराधिक मामला।
(1) जो कोई भी, किसी भी प्रकार से संपत्ति या संपत्ति पर किसी भी आधिपत्य के साथ सौंपा गया हो, बेईमानी से उस संपत्ति का दुरुपयोग करता है या उसे अपने उपयोग के लिए परिवर्तित करता है, या बेईमानी से उस संपत्ति का उपयोग करता है या उसका निपटान करता है, कानून के किसी भी निर्देश का उल्लंघन करते हुए, जिसमें ऐसे विश्वास के निर्वहन…
पूरा पढ़ेंधारा 405 - आपराधिक न्यासभंग
आपराधिक न्यासभंग जो कोई किसी सम्पत्ति का, या सम्पत्ति पर के किसी आधिपत्य का, किसी भी प्रकार से न्यास सौंपा जाकर, उस सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग कर लेगा या उसे अपने उपयोग में संपरिवर्तित कर लेगा, अथवा उस सम्पत्ति का उपयोग या व्ययन विधि के किसी ऐसे निदेश के, जो उस ढंग को विहित करता है जिससे ऐसे न्यास का निर्वहन…
पूरा पढ़ेंविश्वासघात का आपराधिक मामला।
(1) जो कोई भी, किसी भी प्रकार से संपत्ति या संपत्ति पर किसी भी आधिपत्य के साथ सौंपा गया हो, बेईमानी से उस संपत्ति का दुरुपयोग करता है या उसे अपने उपयोग के लिए परिवर्तित करता है, या बेईमानी से उस संपत्ति का उपयोग करता है या उसका निपटान करता है, कानून के किसी भी निर्देश का उल्लंघन करते हुए, जिसमें ऐसे विश्वास के निर्वहन…
पूरा पढ़ेंधारा 406 - आपराधिक न्यासभंग के लिए दंड
आपराधिक न्यासभंग के लिए दंड जो कोई आपराधिक न्यासभंग करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंविश्वासघात का आपराधिक मामला।
(1) जो कोई भी, किसी भी प्रकार से संपत्ति या संपत्ति पर किसी भी आधिपत्य के साथ सौंपा गया हो, बेईमानी से उस संपत्ति का दुरुपयोग करता है या उसे अपने उपयोग के लिए परिवर्तित करता है, या बेईमानी से उस संपत्ति का उपयोग करता है या उसका निपटान करता है, कानून के किसी भी निर्देश का उल्लंघन करते हुए, जिसमें ऐसे विश्वास के निर्वहन…
पूरा पढ़ेंधारा 407 - वाहक, आदि द्वारा आपराधिक न्यासभंग
वाहक, आदि द्वारा आपराधिक न्यासभंग जो कोई वाहक, घाटवाल, या भांडागारिक के रूप में अपने पास संपत्ति न्यस्त किए जाने पर ऐसी संपत्ति के विषय में आपराधिक न्यासभंग करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंविश्वासघात का आपराधिक मामला।
(1) जो कोई भी, किसी भी प्रकार से संपत्ति या संपत्ति पर किसी भी आधिपत्य के साथ सौंपा गया हो, बेईमानी से उस संपत्ति का दुरुपयोग करता है या उसे अपने उपयोग के लिए परिवर्तित करता है, या बेईमानी से उस संपत्ति का उपयोग करता है या उसका निपटान करता है, कानून के किसी भी निर्देश का उल्लंघन करते हुए, जिसमें ऐसे विश्वास के निर्वहन…
पूरा पढ़ेंधारा 408 - लिपिक या सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग
लिपिक या सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग जो कोई लिपिक या सेवक होते हुए, या लिपिक या सेवक के रूप में नियोजित होते हुए, और इस नाते किसी प्रकार संपत्ति, या संमत्ति पर कोई भी अख्त्यार अपने में न्यस्त होते हुए, उस संपत्ति के विषय में आपराधिक न्यासभंग करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की…
पूरा पढ़ेंविश्वासघात का आपराधिक मामला।
(1) जो कोई भी, किसी भी प्रकार से संपत्ति या संपत्ति पर किसी भी आधिपत्य के साथ सौंपा गया हो, बेईमानी से उस संपत्ति का दुरुपयोग करता है या उसे अपने उपयोग के लिए परिवर्तित करता है, या बेईमानी से उस संपत्ति का उपयोग करता है या उसका निपटान करता है, कानून के किसी भी निर्देश का उल्लंघन करते हुए, जिसमें ऐसे विश्वास के निर्वहन…
पूरा पढ़ेंधारा 409 - लोक सेवक द्वारा या बैंकार, व्यापारी या अभिकर्ता द्वारा आपराधिक न्यासभंग
लोक सेवक द्वारा या बैंकार, व्यापारी या अभिकर्ता द्वारा आपराधिक न्यासभंग जो कोई लोक सेवक के नाते अथवा बैंकार, व्यापारी, फैक्टर, दलाल, अटर्नी या अभिकर्ता के रूप में अपने कारबार के अनुक्रम में किसी प्रकार संपत्ति या संपत्ति पर कोई भी अख्त्यार अपने को न्यस्त होते हुए उस संपत्ति के विषय में आपराधिक न्यासभंग करेगा, वह आजीवन…
पूरा पढ़ें- BNS §2(24)IPC §40
परिभाषाएँ।
धारा 40 - “अपराध”
- BNS §40IPC §102
शरीर की निजी रक्षा के अधिकार का प्रारंभ और निरंतरता।
धारा 102 - शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
- BNS §310 (5)IPC §402
डकैती।
धारा 402 - डकैती करने के प्रयोजन से एकत्रित होना
- BNS §310 (6)IPC §400
डकैती।
धारा 400 - डाकुओं की टोली का होने के लिए दण्ड
- BNS §313IPC §401
डाकुओं के गिरोह से संबंधित होने पर मिलने वाली सजा, आदि।
धारा 401 - चोरों की टोली का होने के लिए दण्ड
- BNS §314IPC §403बदलाव हुआ
संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग।
धारा 403 - सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग
- BNS §315IPC §404
मृतक व्यक्ति की मृत्यु के समय उसके पास मौजूद संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग करना।
धारा 404 - ऐसी सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग जो मॄत व्यक्ति की मॄत्यु के समय उसके कब्जे में थी
- BNS §316IPC §405बदलाव हुआ
विश्वासघात का आपराधिक मामला।
धारा 405 - आपराधिक न्यासभंग
- BNS §316 (1)IPC §405
विश्वासघात का आपराधिक मामला।
धारा 405 - आपराधिक न्यासभंग
- BNS §316 (2)IPC §406
विश्वासघात का आपराधिक मामला।
धारा 406 - आपराधिक न्यासभंग के लिए दंड
- BNS §316 (3)IPC §407
विश्वासघात का आपराधिक मामला।
धारा 407 - वाहक, आदि द्वारा आपराधिक न्यासभंग
- BNS §316 (4)IPC §408
विश्वासघात का आपराधिक मामला।
धारा 408 - लिपिक या सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग
- BNS §316 (5)IPC §409
विश्वासघात का आपराधिक मामला।
धारा 409 - लोक सेवक द्वारा या बैंकार, व्यापारी या अभिकर्ता द्वारा आपराधिक न्यासभंग
