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17 प्रविष्टियाँ
सामान्य स्पष्टीकरण।
(1) इस संहिता में अपराध की प्रत्येक परिभाषा, प्रत्येक दंड प्रावधान और ऐसी प्रत्येक परिभाषा या दंड प्रावधान के प्रत्येक उदाहरण को सामान्य अपवाद नामक अध्याय में निहित अपवादों के अधीन समझा जाएगा, भले ही वे अपवाद ऐसी परिभाषा, दंड प्रावधान या उदाहरण में दोहराए न गए हों। चित्र। (क) इस संहिता में अपराधों की परिभाषाएँ देने…
पूरा पढ़ेंधारा 36 - अंशत: कार्य द्वारा और अंशत: लोप द्वारा कारित परिणाम
अंशत: कार्य द्वारा और अंशत: लोप द्वारा कारित परिणाम जहां कहीं किसी कार्य द्वारा या किसी लोप द्वारा किसी परिणाम का कारित किया जाना या उस परिणाम को कारित करने का प्रयत्न करना अपराध है, वहां यह समझा जाना है कि उस परिणाम का अंशत: कार्य द्वारा और अंशत: लोप द्वारा कारित किया जाना वही अपराध है । दृष्टांत : क अंशत: य को भोजन…
पूरा पढ़ेंमानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति आदि के कृत्यों के विरुद्ध आत्मरक्षा का अधिकार।
जब कोई ऐसा कार्य, जो अन्यथा निश्चित रूप से अपराध होता, उस कार्य को करने वाले व्यक्ति की कम उम्र, अपरिपक्व बुद्धि, मानसिक अस्वस्थता या नशे की हालत के कारण, या उस व्यक्ति की किसी गलतफहमी के कारण, वह अपराध नहीं होता, तो प्रत्येक व्यक्ति को उस कार्य के विरुद्ध आत्मरक्षा का वही अधिकार होता है जो उसे तब होता जब वह कार्य…
पूरा पढ़ेंधारा 98 - ऐसे व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकॄतचित्त आदि हो
ऐसे व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकॄतचित्त आदि हो जब कि कोई कार्य जो अन्यथा कोई अपराध होता, उस कार्य को करने वाले कार्य के बालकपन, समझ की परिपक्वता के अभाव, चित्तविकॄति या मत्तता के कारण, या उस कार्य के किसी भरम के कारण, वही अपराध नहीं है, तब हर कार्य उस कार्य के विरुदध प्राइवेट…
पूरा पढ़ेंकिसी महिला का अपहरण करना, उसे अगवा करना या उसे जबरन शादी के लिए प्रेरित करना आदि।
जो कोई भी किसी स्त्री का अपहरण इस इरादे से करता है कि उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी व्यक्ति से विवाह करने के लिए विवश किया जाए, या यह जानते हुए कि ऐसा होने की संभावना है, या उसे अवैध यौन संबंध के लिए विवश या बहकाया जाए, या यह जानते हुए कि ऐसा होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की सजा दी…
पूरा पढ़ेंधारा 366 - विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना
विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना जो कोई किसी स्त्री का व्यपहरण या अपहरण उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी व्यक्ति से विवाह करने के लिए उस स्त्री को विवश करने के आशय से या वह विवश की जाएगी यह सम्भाव्य जानते हुए अथवा अयुक्त संभोग करने के लिए उस स्त्री को विवश या…
पूरा पढ़ेंबच्चे का अपहरण।
जो कोई भी किसी भी तरह से किसी बच्चे को किसी स्थान से जाने के लिए प्रेरित करता है या ऐसा कोई कार्य करने के लिए उकसाता है जिससे वह बच्चा किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर या बहकाया जा सके, या यह जानते हुए कि ऐसा होने की संभावना है, तो उसे दस वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जाएगा और उस पर…
पूरा पढ़ेंधारा 366A - अप्राप्तवय लड़की का उपापन
अप्राप्तवय लड़की का उपापन जो कोई अठारह वर्ष से कम आयु की अप्राप्तवय लड़की को अन्य व्यक्ति से अयुक्त संभोग करने के लिएविवश या विलुब्ध करने के आशय से या तद्द्वारा विवश या विलुब्ध किया जाएगा यह सम्भाव्य जानते हुए ऐसी लड़की को किसी स्थान से जाने को या कोई का¹ करने को किसी भी साधन द्वारा उत्प्रेरित करेगा, वह कारावास से…
पूरा पढ़ेंदस वर्ष से कम आयु के बच्चे का अपहरण करना या उसे अगवा करना, ताकि उससे चोरी की जा सके।
जो कोई भी दस वर्ष से कम आयु के किसी बच्चे का अपहरण करता है या उसे अगवा करता है, इस इरादे से कि उस बच्चे से बेईमानी से कोई चल संपत्ति ले ली जाए, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि सात वर्ष तक बढ़ सकती है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ेंधारा 369 - दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण
दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण जो कोई दस वर्ष से कम आयु के किसी शिशु का इस आशय से व्यवहरण या अपहरण करेगा कि ऐसे शिशु के शरीर पर से कोई जंगम संम्पत्ति बेईमानी से ले ले, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और…
पूरा पढ़ेंअपहरण।
(1) अपहरण दो प्रकार के होते हैं: भारत से अपहरण और वैधानिक संरक्षकता से अपहरण— (क) जो कोई भी किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना, या उस व्यक्ति की ओर से सहमति देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, भारत की सीमाओं से बाहर ले जाता है, तो उसे उस व्यक्ति का भारत से अपहरण करना कहा जाता है; (ख) जो कोई…
पूरा पढ़ेंधारा 360 - भारत में से व्यपहरण
भारत में से व्यपहरण जो कोई किसी व्यक्ति का उस व्यक्ति की, या उस व्यक्ति की ओर से सम्मति देने के लिए वैध रूप से प्राधिकॄत किसी व्यक्ति की सम्मति के बिना, 1[भारत] की सीमाओं से परे प्रवहण कर देता है, वह 1[भारत] में से उस व्यक्ति का व्यपहरण करता है, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंअपहरण।
(1) अपहरण दो प्रकार के होते हैं: भारत से अपहरण और वैधानिक संरक्षकता से अपहरण— (क) जो कोई भी किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना, या उस व्यक्ति की ओर से सहमति देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, भारत की सीमाओं से बाहर ले जाता है, तो उसे उस व्यक्ति का भारत से अपहरण करना कहा जाता है; (ख) जो कोई…
पूरा पढ़ेंधारा 361 - विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण
विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण जो कोई किसी अप्राप्तव्य को, यदि वह नर हो, तो सोलह वर्ष से कम आयु वाले को, या यदि वह नारी हो तो अठारह वर्ष से कम आयु वाली को या किसी विकॄतचित्त व्यक्ति को, ऐसे अप्राप्तवय या विकॄतचित्त व्यक्ति के विधिपूर्ण संरक्षक की संरक्षकता में से ऐसे संरक्षक की सम्मति के बिना ले जाता है या बहका ले…
पूरा पढ़ेंअपहरण।
(1) अपहरण दो प्रकार के होते हैं: भारत से अपहरण और वैधानिक संरक्षकता से अपहरण— (क) जो कोई भी किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना, या उस व्यक्ति की ओर से सहमति देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, भारत की सीमाओं से बाहर ले जाता है, तो उसे उस व्यक्ति का भारत से अपहरण करना कहा जाता है; (ख) जो कोई…
पूरा पढ़ेंधारा 363 - व्यपहरण के लिए दण्ड
व्यपहरण के लिए दण्ड जो कोई भारत में से या विधिपूर्ण संरक्षकता में से किसी व्यक्ति का व्यपहरण करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंअपहरण।
जो कोई भी बलपूर्वक या छलपूर्ण साधनों से किसी व्यक्ति को किसी स्थान से जाने के लिए विवश करता है, उसे उस व्यक्ति का अपहरण करना कहा जाता है।
पूरा पढ़ेंधारा 362 - अपहरण
अपहरण जो कोई किसी व्यक्ति को किसी स्थान से जाने के लिए बल द्वारा विवश करता है, या किन्हीं प्रवंचनापूर्ण उपायों द्वारा उत्प्रेरित करता है, वह उस व्यक्ति का अपहरण करता है, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंभीख मांगने के उद्देश्य से किसी बच्चे का अपहरण करना या उसे अपंग करना।
(1) जो कोई किसी बच्चे का अपहरण करता है या, ऐसे बच्चे का वैध अभिभावक न होते हुए, उस बच्चे की अभिरक्षा प्राप्त करता है, ताकि ऐसे बच्चे को भीख मांगने के उद्देश्य से नियोजित या उपयोग किया जा सके, उसे कम से कम दस वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जो आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और वह जुर्माने का भी हकदार…
पूरा पढ़ेंधारा 363A - भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण
भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण (1) जो कोई किसी अप्राप्तवय का इसलिए व्यपहरण करेगा या अप्राप्तवय का विधिपूर्ण संरक्षक स्वयं न होते हुए अप्राप्तवय की अभिरक्षा इसलिए अभिप्राप्त करेगा कि ऐसा अप्राप्तवय भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए, वह दोनों में से किसी…
पूरा पढ़ेंहत्या करने या फिरौती आदि के लिए अपहरण करना।
(1) जो कोई किसी व्यक्ति का अपहरण करता है ताकि उसकी हत्या की जा सके या उसे इस प्रकार निपटाया जा सके जिससे उसकी हत्या का खतरा उत्पन्न हो, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। चित्र। (क) यदि कोई व्यक्ति भारत से जेड का अपहरण करता है, इस इरादे से या यह जानते…
पूरा पढ़ेंधारा 364 - हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण
हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण जो कोई इसलिए किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण करेगा कि ऐसे व्यक्ति की हत्या की जाए या उसको ऐसे व्ययनित किया जाए कि वह अपनी हत्या होने के खतरे में पड़ जाए, वह आजीवन कारावास से या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।…
पूरा पढ़ेंहत्या करने या फिरौती आदि के लिए अपहरण करना।
(1) जो कोई किसी व्यक्ति का अपहरण करता है ताकि उसकी हत्या की जा सके या उसे इस प्रकार निपटाया जा सके जिससे उसकी हत्या का खतरा उत्पन्न हो, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। चित्र। (क) यदि कोई व्यक्ति भारत से जेड का अपहरण करता है, इस इरादे से या यह जानते…
पूरा पढ़ेंधारा 364 - हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण
हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण जो कोई इसलिए किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण करेगा कि ऐसे व्यक्ति की हत्या की जाए या उसको ऐसे व्ययनित किया जाए कि वह अपनी हत्या होने के खतरे में पड़ जाए, वह आजीवन कारावास से या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।…
पूरा पढ़ेंहत्या करने या फिरौती आदि के लिए अपहरण करना।
(1) जो कोई किसी व्यक्ति का अपहरण करता है ताकि उसकी हत्या की जा सके या उसे इस प्रकार निपटाया जा सके जिससे उसकी हत्या का खतरा उत्पन्न हो, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। चित्र। (क) यदि कोई व्यक्ति भारत से जेड का अपहरण करता है, इस इरादे से या यह जानते…
पूरा पढ़ेंधारा 364A - फिरौती, आदि के लिए व्यपहरण
फिरौती, आदि के लिए व्यपहरण जो कोई इसलिए किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण करेगा या ऐसे व्यपहरण या अपहरण के पश्चात् ऐसे व्यक्ति को निरोध में रखेगा और ऐसे व्यक्ति की मॄत्यु या उसकी उपहति कारित करने की धमकी देगा या अपने आचरण से ऐसी युक्तियुक्त आशंका पैदा करेगा कि ऐसे व्यक्ति की मॄत्यु हो सकती है या उसको उपहति की जा सकती…
पूरा पढ़ेंहत्या करने या फिरौती आदि के लिए अपहरण करना।
(1) जो कोई किसी व्यक्ति का अपहरण करता है ताकि उसकी हत्या की जा सके या उसे इस प्रकार निपटाया जा सके जिससे उसकी हत्या का खतरा उत्पन्न हो, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। चित्र। (क) यदि कोई व्यक्ति भारत से जेड का अपहरण करता है, इस इरादे से या यह जानते…
पूरा पढ़ेंधारा 365 - किसी व्यक्ति का गुप्त रीति से और सदोष परिरोध करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण
किसी व्यक्ति का गुप्त रीति से और सदोष परिरोध करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण जो कोई इस आशय से किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण करेगा कि उसका गुप्त रीति से और सदोष परिरोध किया जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंहत्या करने या फिरौती आदि के लिए अपहरण करना।
(1) जो कोई किसी व्यक्ति का अपहरण करता है ताकि उसकी हत्या की जा सके या उसे इस प्रकार निपटाया जा सके जिससे उसकी हत्या का खतरा उत्पन्न हो, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। चित्र। (क) यदि कोई व्यक्ति भारत से जेड का अपहरण करता है, इस इरादे से या यह जानते…
पूरा पढ़ेंधारा 367 - व्यक्ति को घोर उपहति, दासत्व, आदि का विषय बनाने के उद्देश्य से व्यपहरण या अपहरण
व्यक्ति को घोर उपहति, दासत्व, आदि का विषय बनाने के उद्देश्य से व्यपहरण या अपहरण जो कोई किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण इसलिए करेगा कि उसे घोर उपहति या दासत्व का या किसी व्यक्ति की प्रकॄति विरुद्ध काम वासना का विषय बनाया जाए या बनाए जाने के खतरे में वह जैसे पड़ सकता है वैसे उसे व्ययनित किया जाए या सम्भाव्य जानते हुए…
पूरा पढ़ेंविदेश से लड़के या लड़की का आयात।
जो कोई भी भारत के बाहर किसी भी देश से इक्कीस वर्ष से कम आयु की किसी लड़की या अठारह वर्ष से कम आयु के किसी लड़के को इस इरादे से भारत में लाता है कि लड़की या लड़का किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर या बहकाया जा सकता है, या यह जानते हुए कि लड़की या लड़का ऐसा करने की संभावना है, तो उसे दस वर्ष तक…
पूरा पढ़ेंधारा 366B - विदेश से लड़की का आयात करना
विदेश से लड़की का आयात करना जो कोई इक्कीस वर्ष से कम आयु की किसी लड़की को भारत के बाहर के किसी देश से या जम्मू-कश्मीर राज्य से आयात, उसे किसी अन्य व्यक्ति से अयुक्त संभोग करने के लिए विवश या विलुब्ध करने के आशय से या तद्द्वारा वह विवश या विलुब्ध की जाएगी यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा वह कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक…
पूरा पढ़ेंअपहृत या अगवा किए गए व्यक्ति को गलत तरीके से छिपाना या कैद में रखना।
जो कोई भी यह जानते हुए कि किसी व्यक्ति का अपहरण कर लिया गया है, उस व्यक्ति को गैरकानूनी रूप से छुपाता है या कैद में रखता है, उसे उसी प्रकार दंडित किया जाएगा जैसे कि उसने उस व्यक्ति का अपहरण उसी इरादे या जानकारी के साथ या उसी उद्देश्य से किया हो जिसके लिए वह उस व्यक्ति को छुपाता है या कैद में रखता है।
पूरा पढ़ेंधारा 368 - व्यपहृत या अपहृत व्यक्ति को सदोष छिपाना या परिरोध में रखना
व्यपहृत या अपहृत व्यक्ति को सदोष छिपाना या परिरोध में रखना जो कोई यह जानते हुए कि कोई व्यक्ति व्यपहृत या अपहृत किया गया है, ऐसे व्यक्ति को सदोष छिपाएगा या परिरोध में रखेगा, वह उसी प्रकार दण्डित किया जाएगा मानो उसने उसी आशय या ज्ञान या प्रयोजन से ऐसे व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण किया हो जिससे उसने ऐसे व्यक्ति को छिपाया…
पूरा पढ़ें- BNS §3(7)IPC §36
सामान्य स्पष्टीकरण।
धारा 36 - अंशत: कार्य द्वारा और अंशत: लोप द्वारा कारित परिणाम
- BNS §36IPC §98
मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति आदि के कृत्यों के विरुद्ध आत्मरक्षा का अधिकार।
धारा 98 - ऐसे व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकॄतचित्त आदि हो
- BNS §87IPC §366
किसी महिला का अपहरण करना, उसे अगवा करना या उसे जबरन शादी के लिए प्रेरित करना आदि।
धारा 366 - विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना
- BNS §96IPC §366A
बच्चे का अपहरण।
धारा 366A - अप्राप्तवय लड़की का उपापन
- BNS §97IPC §369
दस वर्ष से कम आयु के बच्चे का अपहरण करना या उसे अगवा करना, ताकि उससे चोरी की जा सके।
धारा 369 - दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण
- BNS §137(1)(a)IPC §360
अपहरण।
धारा 360 - भारत में से व्यपहरण
- BNS §137(1)(b)IPC §361
अपहरण।
धारा 361 - विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण
- BNS §137(2)IPC §363
अपहरण।
धारा 363 - व्यपहरण के लिए दण्ड
- BNS §138IPC §362
अपहरण।
धारा 362 - अपहरण
- BNS §139IPC §363Aबदलाव हुआ
भीख मांगने के उद्देश्य से किसी बच्चे का अपहरण करना या उसे अपंग करना।
धारा 363A - भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण
- BNS §140IPC §364बदलाव हुआ
हत्या करने या फिरौती आदि के लिए अपहरण करना।
धारा 364 - हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण
- BNS §140(1)IPC §364
हत्या करने या फिरौती आदि के लिए अपहरण करना।
धारा 364 - हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण
- BNS §140(2)IPC §364A
हत्या करने या फिरौती आदि के लिए अपहरण करना।
धारा 364A - फिरौती, आदि के लिए व्यपहरण
- BNS §140(3)IPC §365
हत्या करने या फिरौती आदि के लिए अपहरण करना।
धारा 365 - किसी व्यक्ति का गुप्त रीति से और सदोष परिरोध करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण
- BNS §140(4)IPC §367
हत्या करने या फिरौती आदि के लिए अपहरण करना।
धारा 367 - व्यक्ति को घोर उपहति, दासत्व, आदि का विषय बनाने के उद्देश्य से व्यपहरण या अपहरण
- BNS §141IPC §366Bबदलाव हुआ
विदेश से लड़के या लड़की का आयात।
धारा 366B - विदेश से लड़की का आयात करना
- BNS §142IPC §368
अपहृत या अगवा किए गए व्यक्ति को गलत तरीके से छिपाना या कैद में रखना।
धारा 368 - व्यपहृत या अपहृत व्यक्ति को सदोष छिपाना या परिरोध में रखना
