UWMEED Act 73अध्याय VII · Finance of the Board
धारा 73 · मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पास बैंकों या अन्य व्यक्तियों को भुगतान करने का निर्देश देने का अधिकार है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी, यदि मुख्य कार्यकारी अधिकारी संतुष्ट हो कि ऐसा करना आवश्यक एवं उचित है, तो वह किसी बैंक को, जिसमें या किसी व्यक्ति को, जिसके पास किसी वक्फ से संबंधित कोई धन जमा है, धारा 72 के अधीन देय अंशदान का भुगतान करने का आदेश दे सकता है, ऐसे धन में से जो उस बैंक में वक्फ के खाते में हो या उस व्यक्ति के पास जमा हो, या उस धन में से जो समय-समय पर बैंक या अन्य व्यक्ति द्वारा वक्फ के लिए या उसकी ओर से जमा के रूप में प्राप्त होता हो। ऐसे आदेश प्राप्त होने पर, बैंक या अन्य व्यक्ति, जैसा भी मामला हो, यदि उपधारा (3) के अंतर्गत कोई अपील नहीं की गई है, तो ऐसे आदेशों का पालन करेगा, या यदि उपधारा (3) के अंतर्गत अपील की गई है, तो न्यायाधिकरण द्वारा ऐसी अपील पर दिए गए आदेशों का पालन करेगा।
(2) उपधारा (1) के तहत जारी किसी आदेश के अनुसरण में किसी बैंक या अन्य व्यक्ति द्वारा किया गया प्रत्येक भुगतान, भुगतान की गई राशि के संबंध में ऐसे बैंक या अन्य व्यक्ति के दायित्व का पूर्ण निर्वहन माना जाएगा।
(3) कोई बैंक या अन्य व्यक्ति जिसे उप-धारा (1) के तहत कोई भुगतान करने का आदेश दिया गया है, आदेश की तिथि से तीस दिनों के भीतर न्यायाधिकरण 2 *** के समक्ष ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील कर सकता है।
(4) बैंक का प्रत्येक अधिकारी या अन्य व्यक्ति जो उपधारा (1) या, जैसा भी मामला हो, उपधारा (3) के तहत दिए गए आदेश का बिना किसी उचित कारण के पालन करने में विफल रहता है, उसे छह महीने तक के कारावास या आठ हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(2) उपधारा (1) के तहत जारी किसी आदेश के अनुसरण में किसी बैंक या अन्य व्यक्ति द्वारा किया गया प्रत्येक भुगतान, भुगतान की गई राशि के संबंध में ऐसे बैंक या अन्य व्यक्ति के दायित्व का पूर्ण निर्वहन माना जाएगा।
(3) कोई बैंक या अन्य व्यक्ति जिसे उप-धारा (1) के तहत कोई भुगतान करने का आदेश दिया गया है, आदेश की तिथि से तीस दिनों के भीतर न्यायाधिकरण 2 *** के समक्ष ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील कर सकता है।
(4) बैंक का प्रत्येक अधिकारी या अन्य व्यक्ति जो उपधारा (1) या, जैसा भी मामला हो, उपधारा (3) के तहत दिए गए आदेश का बिना किसी उचित कारण के पालन करने में विफल रहता है, उसे छह महीने तक के कारावास या आठ हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
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