IDB Act 4अध्याय II · Transfer and Vesting of the Undertaking of Development Bank in Company
धारा 4 · उपक्रम के हस्तांतरण और निहित होने का सामान्य प्रभाव।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार, विकास बैंक की शेयरधारक होने के नाते, और नियुक्त दिन से ठीक पहले विकास बैंक के प्रत्येक अन्य शेयरधारक को नियुक्त दिन से कंपनी के शेयरधारक के रूप में पंजीकृत माना जाएगा, उस शेयरधारक द्वारा धारित शेयरों के अंकित मूल्य की सीमा तक।
(2) विकास बैंक का वह उपक्रम, जो धारा 3 के अधीन कंपनी को हस्तांतरित किया जाता है और उसमें निहित होता है, उसमें वे सभी व्यवसाय, परिसंपत्तियाँ, अधिकार, शक्तियाँ, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा सभी चल और अचल संपत्तियाँ, वास्तविक और चल, मूर्त और अमूर्त, कब्जे में या आरक्षित, वर्तमान या आकस्मिक, किसी भी प्रकार की और कहीं भी स्थित, जिनमें भूमि, भवन, वाहन, नकद शेष, जमा, विदेशी मुद्राएँ, प्रकट और अप्रकट भंडार, आरक्षित निधि, विशेष आरक्षित निधि, परोपकारी आरक्षित निधि, कोई अन्य निधि, स्टॉक, निवेश, शेयर, बांड, डिबेंचर, प्रतिभूति, किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान का प्रबंधन, किसी व्यक्ति या औद्योगिक प्रतिष्ठान को दिए गए ऋण, अग्रिम और गारंटी, किरायेदारी, पट्टे और बही खाते के ऋण तथा ऐसी संपत्ति से उत्पन्न होने वाले अन्य सभी अधिकार और हित शामिल माने जाएँगे, जो नियुक्त दिवस से ठीक पहले विकास बैंक के स्वामित्व, कब्जे या अधिकार में उसके उपक्रम के संबंध में, भारत के भीतर या बाहर, थे, तथा उनसे संबंधित सभी लेखा-पुस्तकें, रजिस्टर, अभिलेख और दस्तावेज भी शामिल माने जाएँगे और इसमें सभी उधार, देनदारियाँ और दायित्व भी शामिल माने जाएँगे। भारत के भीतर या बाहर विकास बैंक द्वारा अपने संबंधित उपक्रमों के संबंध में किसी भी प्रकार की जो भी व्यवस्था लागू हो।
(3) निर्धारित तिथि से ठीक पहले विद्यमान सभी अनुबंध, विलेख, बांड, गारंटी, अभिरक्षा पत्र, अन्य दस्तावेज और कार्य व्यवस्थाएं जो विकास बैंक को प्रभावित करती हैं, विकास बैंक के विरुद्ध प्रभावी या लागू नहीं रहेंगी और वे उस कंपनी के विरुद्ध या उसके पक्ष में पूर्ण रूप से प्रभावी होंगी जिसमें इस अधिनियम के आधार पर विकास बैंक का उपक्रम निहित है और वे उतनी ही पूर्ण और प्रभावी रूप से लागू होंगी मानो विकास बैंक के स्थान पर कंपनी का नाम उसमें शामिल किया गया हो या वह उसकी पक्षकार रही हो।
(4) नियुक्त दिन से ठीक पहले विकास बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध उसके उपक्रम के संबंध में लंबित या विद्यमान कोई भी कार्यवाही या वाद, नियुक्त दिन से उस कंपनी द्वारा जारी रखी जा सकती है और उसके विरुद्ध लागू की जा सकती है जिसमें इस अधिनियम के आधार पर विकास बैंक का उपक्रम निहित है, जैसा कि इस अधिनियम के अधिनियमित न होने पर विकास बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध लागू किया जा सकता था और विकास बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध लागू करने योग्य नहीं रहेगी।
(2) विकास बैंक का वह उपक्रम, जो धारा 3 के अधीन कंपनी को हस्तांतरित किया जाता है और उसमें निहित होता है, उसमें वे सभी व्यवसाय, परिसंपत्तियाँ, अधिकार, शक्तियाँ, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा सभी चल और अचल संपत्तियाँ, वास्तविक और चल, मूर्त और अमूर्त, कब्जे में या आरक्षित, वर्तमान या आकस्मिक, किसी भी प्रकार की और कहीं भी स्थित, जिनमें भूमि, भवन, वाहन, नकद शेष, जमा, विदेशी मुद्राएँ, प्रकट और अप्रकट भंडार, आरक्षित निधि, विशेष आरक्षित निधि, परोपकारी आरक्षित निधि, कोई अन्य निधि, स्टॉक, निवेश, शेयर, बांड, डिबेंचर, प्रतिभूति, किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान का प्रबंधन, किसी व्यक्ति या औद्योगिक प्रतिष्ठान को दिए गए ऋण, अग्रिम और गारंटी, किरायेदारी, पट्टे और बही खाते के ऋण तथा ऐसी संपत्ति से उत्पन्न होने वाले अन्य सभी अधिकार और हित शामिल माने जाएँगे, जो नियुक्त दिवस से ठीक पहले विकास बैंक के स्वामित्व, कब्जे या अधिकार में उसके उपक्रम के संबंध में, भारत के भीतर या बाहर, थे, तथा उनसे संबंधित सभी लेखा-पुस्तकें, रजिस्टर, अभिलेख और दस्तावेज भी शामिल माने जाएँगे और इसमें सभी उधार, देनदारियाँ और दायित्व भी शामिल माने जाएँगे। भारत के भीतर या बाहर विकास बैंक द्वारा अपने संबंधित उपक्रमों के संबंध में किसी भी प्रकार की जो भी व्यवस्था लागू हो।
(3) निर्धारित तिथि से ठीक पहले विद्यमान सभी अनुबंध, विलेख, बांड, गारंटी, अभिरक्षा पत्र, अन्य दस्तावेज और कार्य व्यवस्थाएं जो विकास बैंक को प्रभावित करती हैं, विकास बैंक के विरुद्ध प्रभावी या लागू नहीं रहेंगी और वे उस कंपनी के विरुद्ध या उसके पक्ष में पूर्ण रूप से प्रभावी होंगी जिसमें इस अधिनियम के आधार पर विकास बैंक का उपक्रम निहित है और वे उतनी ही पूर्ण और प्रभावी रूप से लागू होंगी मानो विकास बैंक के स्थान पर कंपनी का नाम उसमें शामिल किया गया हो या वह उसकी पक्षकार रही हो।
(4) नियुक्त दिन से ठीक पहले विकास बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध उसके उपक्रम के संबंध में लंबित या विद्यमान कोई भी कार्यवाही या वाद, नियुक्त दिन से उस कंपनी द्वारा जारी रखी जा सकती है और उसके विरुद्ध लागू की जा सकती है जिसमें इस अधिनियम के आधार पर विकास बैंक का उपक्रम निहित है, जैसा कि इस अधिनियम के अधिनियमित न होने पर विकास बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध लागू किया जा सकता था और विकास बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध लागू करने योग्य नहीं रहेगी।
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