FEO Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) "प्रशासक" से तात्पर्य धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्रशासक से है;
(ख) " बेनामी संपत्ति" और " बेनामी लेनदेन" का वही अर्थ होगा जो उन्हें बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध अधिनियम, 1988 (45 ऑफ 1988) की धारा 2 के खंड (8) और (9) के तहत क्रमशः दिया गया है;
(ग) "अनुबंध करने वाला राज्य" से तात्पर्य भारत के बाहर किसी ऐसे देश या स्थान से है जिसके संबंध में केंद्र सरकार ने संधि या किसी अन्य माध्यम से उस देश की सरकार के साथ व्यवस्था की हो;
(घ) "उप निदेशक" से तात्पर्य धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (15 ऑफ 2003) की धारा 49 की उपधारा (1) के तहत नियुक्त उप निदेशक से है;
(ई) "निदेशक" से तात्पर्य धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (15 ऑफ 2003) की धारा 49 की उपधारा (1) के तहत नियुक्त निदेशक से है;
(f) “भगोड़ा आर्थिक अपराधी” से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जिसके विरुद्ध भारत के किसी न्यायालय द्वारा अनुसूचित अपराध के संबंध में गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया हो, जो
(i) आपराधिक अभियोजन से बचने के लिए भारत छोड़ दिया है; या
(ii) विदेश में रहते हुए, आपराधिक अभियोजन का सामना करने के लिए भारत लौटने से इनकार करता है;
(जी) "प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक" का वही अर्थ होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 2 के खंड (51) में दिया गया है;
(h) "अधिसूचना" से तात्पर्य राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है तथा "अधिसूचित करना" अभिव्यक्ति का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;
(i) "व्यक्ति" में शामिल हैं--
(i) एक व्यक्ति;
(ii) एक हिंदू अविभाजित परिवार;
(iii) एक कंपनी;
(iv) एक ट्रस्ट;
(v) साझेदारी;
(vi) एक सीमित देयता साझेदारी;
(vii) व्यक्तियों का संघ या व्यक्तियों का निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं;
(viii) प्रत्येक कृत्रिम कानूनी व्यक्ति जो पूर्ववर्ती उपखंडों में से किसी के अंतर्गत नहीं आता; और
(ix) पूर्ववर्ती उपखंडों में उल्लिखित उपरोक्त व्यक्तियों में से किसी के स्वामित्व या नियंत्रण वाली कोई एजेंसी, कार्यालय या शाखा;
(j) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(k) "अपराध की आय" से तात्पर्य किसी अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त की गई किसी संपत्ति से है, या ऐसी किसी संपत्ति के मूल्य से है, या यदि ऐसी संपत्ति देश के बाहर ले जाई गई है या रखी गई है, तो देश के भीतर या विदेश में रखी गई समतुल्य मूल्य की संपत्ति से है;
(l) "अनुसूची" से तात्पर्य इस अधिनियम के साथ संलग्न अनुसूची से है;
(m) "अनुसूचित अपराध" से तात्पर्य अनुसूची में निर्दिष्ट अपराध से है, यदि ऐसे अपराध या अपराधों में शामिल कुल मूल्य एक सौ करोड़ रुपये या उससे अधिक हो;
(n) "विशेष न्यायालय" से तात्पर्य सत्र न्यायालय से है जिसे धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (15 ऑफ 2003) की धारा 43 की उपधारा (1) के तहत विशेष न्यायालय के रूप में नामित किया गया है।
(2) इस अधिनियम में प्रयुक्त और परिभाषित न किए गए शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ, परन्तु धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (15 ऑफ 2003) में परिभाषित किए गए शब्दों एवं अभिव्यक्तियों का वही अर्थ होगा जो उस अधिनियम में उन्हें दिया गया है।
(क) "प्रशासक" से तात्पर्य धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्रशासक से है;
(ख) " बेनामी संपत्ति" और " बेनामी लेनदेन" का वही अर्थ होगा जो उन्हें बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध अधिनियम, 1988 (45 ऑफ 1988) की धारा 2 के खंड (8) और (9) के तहत क्रमशः दिया गया है;
(ग) "अनुबंध करने वाला राज्य" से तात्पर्य भारत के बाहर किसी ऐसे देश या स्थान से है जिसके संबंध में केंद्र सरकार ने संधि या किसी अन्य माध्यम से उस देश की सरकार के साथ व्यवस्था की हो;
(घ) "उप निदेशक" से तात्पर्य धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (15 ऑफ 2003) की धारा 49 की उपधारा (1) के तहत नियुक्त उप निदेशक से है;
(ई) "निदेशक" से तात्पर्य धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (15 ऑफ 2003) की धारा 49 की उपधारा (1) के तहत नियुक्त निदेशक से है;
(f) “भगोड़ा आर्थिक अपराधी” से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जिसके विरुद्ध भारत के किसी न्यायालय द्वारा अनुसूचित अपराध के संबंध में गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया हो, जो
(i) आपराधिक अभियोजन से बचने के लिए भारत छोड़ दिया है; या
(ii) विदेश में रहते हुए, आपराधिक अभियोजन का सामना करने के लिए भारत लौटने से इनकार करता है;
(जी) "प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक" का वही अर्थ होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 2 के खंड (51) में दिया गया है;
(h) "अधिसूचना" से तात्पर्य राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है तथा "अधिसूचित करना" अभिव्यक्ति का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;
(i) "व्यक्ति" में शामिल हैं--
(i) एक व्यक्ति;
(ii) एक हिंदू अविभाजित परिवार;
(iii) एक कंपनी;
(iv) एक ट्रस्ट;
(v) साझेदारी;
(vi) एक सीमित देयता साझेदारी;
(vii) व्यक्तियों का संघ या व्यक्तियों का निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं;
(viii) प्रत्येक कृत्रिम कानूनी व्यक्ति जो पूर्ववर्ती उपखंडों में से किसी के अंतर्गत नहीं आता; और
(ix) पूर्ववर्ती उपखंडों में उल्लिखित उपरोक्त व्यक्तियों में से किसी के स्वामित्व या नियंत्रण वाली कोई एजेंसी, कार्यालय या शाखा;
(j) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(k) "अपराध की आय" से तात्पर्य किसी अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त की गई किसी संपत्ति से है, या ऐसी किसी संपत्ति के मूल्य से है, या यदि ऐसी संपत्ति देश के बाहर ले जाई गई है या रखी गई है, तो देश के भीतर या विदेश में रखी गई समतुल्य मूल्य की संपत्ति से है;
(l) "अनुसूची" से तात्पर्य इस अधिनियम के साथ संलग्न अनुसूची से है;
(m) "अनुसूचित अपराध" से तात्पर्य अनुसूची में निर्दिष्ट अपराध से है, यदि ऐसे अपराध या अपराधों में शामिल कुल मूल्य एक सौ करोड़ रुपये या उससे अधिक हो;
(n) "विशेष न्यायालय" से तात्पर्य सत्र न्यायालय से है जिसे धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (15 ऑफ 2003) की धारा 43 की उपधारा (1) के तहत विशेष न्यायालय के रूप में नामित किया गया है।
(2) इस अधिनियम में प्रयुक्त और परिभाषित न किए गए शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ, परन्तु धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (15 ऑफ 2003) में परिभाषित किए गए शब्दों एवं अभिव्यक्तियों का वही अर्थ होगा जो उस अधिनियम में उन्हें दिया गया है।
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