NI Act 142Aअध्याय XVII · Of Penalties in Case of Dishonour of Certain Cheques for Insufficiency of Funds in the Accounts
धारा 142A · लंबित मामलों के हस्तांतरण के लिए सत्यापन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [142ए. लंबित मामलों के स्थानांतरण के लिए वैधता.-- (1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) या किसी न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री, आदेश या निर्देश में निहित किसी भी बात के बावजूद, धारा 142 की उपधारा (2) के तहत अधिकार क्षेत्र रखने वाले न्यायालय को स्थानांतरित किए गए सभी मामले, जैसा कि परक्राम्य लिखत (संशोधन) अध्यादेश, 2015 (अध्यादेश 6 ऑफ 2015) द्वारा संशोधित किया गया है, इस अधिनियम के तहत स्थानांतरित किए गए माने जाएंगे, मानो वह उपधारा सभी प्रासंगिक समयों पर लागू रही हो।
(2) धारा 142 की उपधारा (2) या उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि भुगतान पाने वाले या विधिवत धारक ने धारा 142 की उपधारा (2) के अधीन अधिकार क्षेत्र रखने वाले न्यायालय में चेक के जारीकर्ता के विरुद्ध शिकायत दर्ज की है, या उपधारा (1) के अधीन मामला उस न्यायालय में स्थानांतरित किया गया है और ऐसी शिकायत उस न्यायालय में लंबित है, तो धारा 138 के तहत उसी जारीकर्ता के विरुद्ध सभी बाद की शिकायतें उसी न्यायालय में दायर की जाएंगी, चाहे वे चेक उस न्यायालय के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के भीतर संग्रह के लिए दिए गए हों या भुगतान के लिए प्रस्तुत किए गए हों।
(3) यदि परक्राम्य लिखत (संशोधन) अधिनियम, 2015 (26 ऑफ 2015) के प्रारंभ होने की तिथि को, एक ही चेक प्राप्तकर्ता या विधिवत धारक द्वारा, जैसा भी मामला हो, एक ही चेक जारीकर्ता के विरुद्ध एक से अधिक अभियोग विभिन्न न्यायालयों में लंबित हों, तो उक्त तथ्य न्यायालय के संज्ञान में आने पर, ऐसा न्यायालय मामले को धारा 142 की उपधारा (2) के अंतर्गत क्षेत्राधिकार रखने वाले न्यायालय को, जैसा कि परक्राम्य लिखत (संशोधन) अध्यादेश, 2015 (अध्यादेश 6 ऑफ 2015) द्वारा संशोधित किया गया है, उस न्यायालय को स्थानांतरित कर देगा जिसके समक्ष पहला मामला दायर किया गया था और लंबित है, मानो वह उपधारा सभी प्रासंगिक समयों पर लागू रही हो।]
(2) धारा 142 की उपधारा (2) या उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि भुगतान पाने वाले या विधिवत धारक ने धारा 142 की उपधारा (2) के अधीन अधिकार क्षेत्र रखने वाले न्यायालय में चेक के जारीकर्ता के विरुद्ध शिकायत दर्ज की है, या उपधारा (1) के अधीन मामला उस न्यायालय में स्थानांतरित किया गया है और ऐसी शिकायत उस न्यायालय में लंबित है, तो धारा 138 के तहत उसी जारीकर्ता के विरुद्ध सभी बाद की शिकायतें उसी न्यायालय में दायर की जाएंगी, चाहे वे चेक उस न्यायालय के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के भीतर संग्रह के लिए दिए गए हों या भुगतान के लिए प्रस्तुत किए गए हों।
(3) यदि परक्राम्य लिखत (संशोधन) अधिनियम, 2015 (26 ऑफ 2015) के प्रारंभ होने की तिथि को, एक ही चेक प्राप्तकर्ता या विधिवत धारक द्वारा, जैसा भी मामला हो, एक ही चेक जारीकर्ता के विरुद्ध एक से अधिक अभियोग विभिन्न न्यायालयों में लंबित हों, तो उक्त तथ्य न्यायालय के संज्ञान में आने पर, ऐसा न्यायालय मामले को धारा 142 की उपधारा (2) के अंतर्गत क्षेत्राधिकार रखने वाले न्यायालय को, जैसा कि परक्राम्य लिखत (संशोधन) अध्यादेश, 2015 (अध्यादेश 6 ऑफ 2015) द्वारा संशोधित किया गया है, उस न्यायालय को स्थानांतरित कर देगा जिसके समक्ष पहला मामला दायर किया गया था और लंबित है, मानो वह उपधारा सभी प्रासंगिक समयों पर लागू रही हो।]
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