MSRSEBC Act 2
धारा 2 · परिभाषाएं
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
परिभाषाएँ।
(1)
इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-(क)
शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के संबंध में "प्रवेश प्राधिकारी" से तात्पर्य उस प्राधिकारी से है जिसके पास विशिष्ट शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए जिम्मेदार शैक्षणिक संस्थानों पर पर्यवेक्षी एवं नियंत्रण शक्तियां हैं;(ख)
लोक सेवाओं एवं पदों के संबंध में "नियुक्ति प्राधिकारी" से तात्पर्य ऐसी सेवाओं एवं पदों पर नियुक्ति करने के लिए अधिकृत प्राधिकारी से है;(ग)
"सक्षम प्राधिकारी" से तात्पर्य धारा 6 के अधीन नियुक्त सक्षम प्राधिकारी से है;(घ)
"शैक्षणिक संस्थान" में महाराष्ट्र राज्य में सरकार के स्वामित्व और नियंत्रण वाले शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं, जो सरकार से अनुदान प्राप्त करते हैं, जिनमें संबंधित महाराष्ट्र अधिनियमों द्वारा या उनके तहत स्थापित विश्वविद्यालय शामिल हैं, जिनमें निजी शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं, चाहे वे राज्य द्वारा सहायता प्राप्त हों या न हों, भारत के संविधान के अनुच्छेद 30 के खंड (1) में निर्दिष्ट अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को छोड़कर।(ई)
"प्रतिष्ठान" से तात्पर्य सरकार का कोई कार्यालय, या किसी स्थानीय प्राधिकरण या राज्य विधानमंडल के किसी अधिनियम के तहत गठित वैधानिक प्राधिकरण, या विश्वविद्यालय, कंपनी, निगम या सहकारी समिति, जिसमें शेयर पूंजी सरकार द्वारा धारित हो, या सरकार द्वारा सहायता प्राप्त संस्थानों से है।(f)
"सरकार" या "राज्य सरकार" से तात्पर्य महाराष्ट्र सरकार से है;(जी)
"निर्धारित" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;(h)
"सार्वजनिक सेवाएं और पद" से तात्पर्य राज्य के मामलों से संबंधित सेवाओं और पदों से है और इसमें निम्नलिखित सेवाएं और पद शामिल हैं,-(i)
"आरक्षण" से तात्पर्य राज्य में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के नागरिकों (एसईबीसी) के सदस्यों के लिए शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए सीटों का आरक्षण और सार्वजनिक सेवाओं और पदों में नियुक्तियों के लिए पदों का आरक्षण है;(j)
"सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े नागरिकों के वर्ग (एसईबीसी)" में मराठा समुदाय शामिल है जिसे महाराष्ट्र राज्य आरक्षण (राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए सीटों और राज्य के अधीन सार्वजनिक सेवाओं में नियुक्तियों या पदों के लिए) शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईएसबीसी) अधिनियम, 2014 के अनुसरण में शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईएसबीसी) घोषित किया गया है।(2)
इस अधिनियम में प्रयुक्त शब्द और अभिव्यक्तियाँ, जो परिभाषित नहीं हैं, उनका वही अर्थ होगा जो महाराष्ट्र राज्य लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जनजातियाँ, खानाबदोश जनजातियाँ, विशेष पिछड़ा वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम, 2001 में क्रमशः उन्हें दिया गया है।इस धारा पर आपका निजी नोट
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