पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 93 अब BNS धारा 31 है
धारा 93 - सद्भावपूरवक दी गई संसूचना
पुराना कानून
IPC §93
धारा 93 - सद्भावपूरवक दी गई संसूचना
सद्भावपूरवक दी गई संसूचना
सद्भावपूर्वक दी गई संसूचना उस अपहानि के कारण अपराध नहीं है, जो उस व्यक्ति की हो जिसे वह दी गई है, यदि वह उस व्यक्ति के फायदे के लिए दी गई हो ।
द्रष्टांत :
क, एक शल्यचिकित्सक, एक रोगी को सद्भावपूर्वक यह संसूचित कर्ता है कि उसकी राय में वह जीवित नहीं रह सकता । इस आघात के परिणामस्वरूप उस रोगी की मृत्यु हो जाती है । क ने कोई अपराध नहीं किया है, यद्यपी वह जानता था कि उस संसूचना से उस रोगी की मृत्यु कारित होना संभाव्य है ।
पूरा पढ़ें: IPC §93सद्भावपूर्वक दी गई संसूचना उस अपहानि के कारण अपराध नहीं है, जो उस व्यक्ति की हो जिसे वह दी गई है, यदि वह उस व्यक्ति के फायदे के लिए दी गई हो ।
द्रष्टांत :
क, एक शल्यचिकित्सक, एक रोगी को सद्भावपूर्वक यह संसूचित कर्ता है कि उसकी राय में वह जीवित नहीं रह सकता । इस आघात के परिणामस्वरूप उस रोगी की मृत्यु हो जाती है । क ने कोई अपराध नहीं किया है, यद्यपी वह जानता था कि उस संसूचना से उस रोगी की मृत्यु कारित होना संभाव्य है ।
नया कानून
BNS §31
यह संचार सद्भावना से किया गया था।
सद्भावना से किया गया कोई भी संचार, उस व्यक्ति को होने वाली किसी भी हानि के कारण अपराध नहीं है, यदि वह संचार उस व्यक्ति के लाभ के लिए किया गया हो।
चित्रण ।
सर्जन ए ने सद्भावनापूर्वक एक मरीज को अपनी राय बताई कि वह जीवित नहीं रह सकता। इस सदमे के कारण मरीज की मृत्यु हो गई। ए ने कोई अपराध नहीं किया, हालांकि वह जानता था कि इस सूचना के कारण मरीज की मृत्यु हो सकती है।
पूरा पढ़ें: BNS §31चित्रण ।
सर्जन ए ने सद्भावनापूर्वक एक मरीज को अपनी राय बताई कि वह जीवित नहीं रह सकता। इस सदमे के कारण मरीज की मृत्यु हो गई। ए ने कोई अपराध नहीं किया, हालांकि वह जानता था कि इस सूचना के कारण मरीज की मृत्यु हो सकती है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
