पुराना कानून
IPC §499
मानहानि।
जो कोई भी, बोले गए या पढ़े जाने के उद्देश्य से लिखे गए शब्दों द्वारा, या संकेतों द्वारा, या दृश्य प्रस्तुतियों द्वारा, किसी व्यक्ति के संबंध में ऐसा कोई आरोप लगाता है या प्रकाशित करता है जिसका उद्देश्य उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाना हो, या यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि ऐसा आरोप उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाएगा, तो उसे, नीचे दिए गए अपवादों को छोड़कर, उस व्यक्ति को बदनाम करने वाला कहा जाता है।
स्पष्टीकरण 1. —किसी मृत व्यक्ति पर कोई आरोप लगाना मानहानि हो सकता है, यदि वह आरोप जीवित रहते हुए उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता हो, और उसका उद्देश्य उसके परिवार या अन्य निकट संबंधियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना हो।
स्पष्टीकरण 2. —किसी कंपनी या संघ या व्यक्तियों के समूह के बारे में इस प्रकार का आरोप लगाना मानहानि के बराबर हो सकता है।
स्पष्टीकरण 3. —वैकल्पिक रूप में या व्यंग्यात्मक रूप से व्यक्त किया गया आरोप मानहानि के बराबर हो सकता है।
स्पष्टीकरण 4. —किसी भी आरोप को किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला तब तक नहीं कहा जाता, जब तक कि वह आरोप प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, दूसरों की दृष्टि में, उस व्यक्ति के नैतिक या बौद्धिक चरित्र को कम न करे, या उसकी जाति या उसके व्यवसाय के संबंध में उसके चरित्र को कम न करे, या उस व्यक्ति की साख को कम न करे, या यह विश्वास न दिलाए कि उस व्यक्ति का शरीर घृणित अवस्था में है, या ऐसी अवस्था में है जिसे आम तौर पर अपमानजनक माना जाता है।
रेखांकन
(क) ए कहता है— "जेड एक ईमानदार आदमी है; उसने बी की घड़ी कभी नहीं चुराई"; इसका उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि जेड ने बी की घड़ी चुराई थी। यह मानहानि है, जब तक कि यह अपवादों में से किसी एक के अंतर्गत न आता हो।
(ख) ए से पूछा जाता है कि बी की घड़ी किसने चुराई। ए, जेड की ओर इशारा करता है, जिसका उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि जेड ने बी की घड़ी चुराई है। यह मानहानि है, जब तक कि यह अपवादों में से किसी एक के अंतर्गत न आता हो।
(ग) ए, जेड द्वारा बी की घड़ी लेकर भागते हुए का चित्र बनाता है, जिसका उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि जेड ने बी की घड़ी चुराई है। यह मानहानि है, जब तक कि यह अपवादों में से किसी एक के अंतर्गत न आता हो।
पहला अपवाद.— सार्वजनिक हित के लिए आवश्यक सत्य का आरोपण.— किसी व्यक्ति के संबंध में कोई सत्य बात कहना मानहानि नहीं है, यदि ऐसा आरोपण या प्रकाशन सार्वजनिक हित के लिए आवश्यक हो। यह सार्वजनिक हित के लिए है या नहीं, यह तथ्य का प्रश्न है।
दूसरा अपवाद.— लोक सेवकों का सार्वजनिक आचरण.— किसी लोक सेवक द्वारा अपने सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में किए गए आचरण या उसके चरित्र के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि उसका चरित्र उस आचरण में प्रकट होता हो, और इससे आगे नहीं।
तीसरा अपवाद.— किसी सार्वजनिक प्रश्न से संबंधित किसी व्यक्ति का आचरण.— किसी सार्वजनिक प्रश्न से संबंधित किसी व्यक्ति के आचरण और उसके चरित्र के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि उसका चरित्र उस आचरण में प्रकट होता हो, और इससे आगे नहीं।
चित्रण
किसी सार्वजनिक मुद्दे पर सरकार से याचिका दायर करने, किसी सार्वजनिक मुद्दे पर बैठक के लिए अनुरोध पर हस्ताक्षर करने, ऐसी बैठक की अध्यक्षता करने या उसमें उपस्थित होने, सार्वजनिक समर्थन आमंत्रित करने वाले किसी भी समाज का गठन करने या उसमें शामिल होने, या किसी ऐसे पद के लिए किसी विशेष उम्मीदवार के लिए मतदान करने या प्रचार करने में, जिसमें जनता की रुचि हो, Z के आचरण के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना A के लिए मानहानि नहीं है।
चौथा अपवाद.— अदालतों की कार्यवाही की रिपोर्टों का प्रकाशन.— किसी न्यायालय की कार्यवाही या ऐसी किसी कार्यवाही के परिणाम की सारतः सत्य रिपोर्ट प्रकाशित करना मानहानि नहीं है।
स्पष्टीकरण. —न्यायालय में मुकदमे से पहले खुली अदालत में जांच करने वाला शांति न्यायाधीश या अन्य अधिकारी, उपरोक्त धारा के अर्थ में न्यायालय है।
पांचवां अपवाद.— न्यायालय द्वारा तय किए गए मामले के गुण-दोष या गवाहों और अन्य संबंधित व्यक्तियों का आचरण.— किसी भी मामले, चाहे वह दीवानी हो या आपराधिक, जिसका निर्णय न्यायालय द्वारा किया गया हो, के गुण-दोष के संबंध में, या किसी व्यक्ति के आचरण के संबंध में, चाहे वह किसी मामले में पक्षकार, गवाह या प्रतिनिधि के रूप में हो, या ऐसे व्यक्ति के चरित्र के संबंध में, जहाँ तक उसका चरित्र उस आचरण में प्रकट होता है, और इससे आगे नहीं, सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है।
रेखांकन
(क) ए कहता है—"मुझे लगता है कि उस मुकदमे में जेड की गवाही इतनी विरोधाभासी है कि वह या तो मूर्ख है या बेईमान।" ए इस अपवाद के अंतर्गत आता है यदि वह यह बात सद्भावना से कहता है, क्योंकि उसकी राय जेड के चरित्र से संबंधित है जैसा कि एक गवाह के रूप में उसके आचरण में प्रकट होता है, और इससे आगे नहीं।
(ख) लेकिन यदि ए कहता है—"मैं ज़ेड द्वारा उस मुकदमे में कही गई बात पर विश्वास नहीं करता क्योंकि मैं जानता हूँ कि वह एक असत्य व्यक्ति है"; ए इस अपवाद के अंतर्गत नहीं आता, क्योंकि ज़ेड के चरित्र के बारे में व्यक्त की गई राय, गवाह के रूप में ज़ेड के आचरण पर आधारित नहीं है।
छठा अपवाद.— सार्वजनिक प्रदर्शन के गुण.— किसी ऐसे प्रदर्शन के गुणों के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है जिसे उसके लेखक ने जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत किया है, या लेखक के चरित्र के संबंध में, जहाँ तक उसका चरित्र ऐसे प्रदर्शन में प्रकट होता है, और इससे आगे नहीं।
स्पष्टीकरण. —किसी प्रस्तुति को स्पष्ट रूप से या लेखक द्वारा किए गए ऐसे कार्यों के माध्यम से जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है जो जनता के निर्णय के लिए ऐसी प्रस्तुति का संकेत देते हैं।
रेखांकन
(क) जो व्यक्ति पुस्तक प्रकाशित करता है, वह उस पुस्तक को जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत करता है।
(ख) जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से भाषण देता है, वह उस भाषण को जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत करता है।
(ग) कोई अभिनेता या गायक जो सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुति देता है, वह अपने अभिनय या गायन को जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत करता है।
(घ) ए, जेड द्वारा प्रकाशित पुस्तक के बारे में कहता है—"जेड की पुस्तक मूर्खतापूर्ण है; जेड अवश्य ही दुर्बल व्यक्ति होगा। जेड की पुस्तक अश्लील है; जेड अवश्य ही अपवित्र मन का व्यक्ति होगा।" यदि ए सद्भावना से यह कहता है, तो वह अपवाद के अंतर्गत आता है, क्योंकि जेड के बारे में उसकी राय केवल जेड के चरित्र से संबंधित है, जो जेड की पुस्तक में प्रकट होता है, इससे आगे नहीं।
(ई) लेकिन अगर ए कहता है, "मुझे आश्चर्य नहीं है कि जेड की किताब मूर्खतापूर्ण और अभद्र है, क्योंकि वह एक कमजोर और स्वच्छंद व्यक्ति है।" ए इस अपवाद के अंतर्गत नहीं आता, क्योंकि जेड के चरित्र के बारे में उसकी राय जेड की किताब पर आधारित नहीं है।
सातवाँ अपवाद.— किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे पर वैध अधिकार रखने के कारण सद्भावनापूर्वक की गई निंदा.— किसी व्यक्ति द्वारा, जिसे किसी दूसरे पर कोई अधिकार प्राप्त हो, चाहे वह अधिकार कानून द्वारा प्रदत्त हो या उस दूसरे के साथ किए गए वैध अनुबंध से उत्पन्न हो, सद्भावनापूर्वक उस दूसरे के आचरण पर उन मामलों में निंदा करना, जिनसे वह वैध अधिकार संबंधित है, मानहानि नहीं है।
चित्रण
किसी न्यायाधीश द्वारा सद्भावनापूर्वक किसी गवाह या न्यायालय के अधिकारी के आचरण की निंदा करना; किसी विभाग के प्रमुख द्वारा सद्भावनापूर्वक अपने अधीन कर्मचारियों की निंदा करना; किसी अभिभावक द्वारा अन्य बच्चों की उपस्थिति में किसी बच्चे की सद्भावनापूर्वक निंदा करना; किसी विद्यालय के शिक्षक, जिसका अधिकार किसी अभिभावक से प्राप्त होता है, द्वारा सद्भावनापूर्वक किसी छात्र की उपस्थिति में निंदा करना; किसी स्वामी द्वारा सेवा में लापरवाही के लिए किसी नौकर की सद्भावनापूर्वक निंदा करना; किसी बैंकर द्वारा अपने बैंक के कैशियर के आचरण की सद्भावनापूर्वक निंदा करना - ये सभी इस अपवाद के अंतर्गत आते हैं।
आठवाँ अपवाद.— अधिकृत व्यक्ति के समक्ष सद्भावनापूर्वक लगाया गया आरोप.— किसी व्यक्ति के विरुद्ध सद्भावनापूर्वक किसी ऐसे व्यक्ति के समक्ष आरोप लगाना मानहानि नहीं है, जिसे आरोप के विषयवस्तु के संबंध में उस व्यक्ति पर वैध अधिकार प्राप्त हो।
चित्रण
यदि A सद्भावनापूर्वक किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष Z पर आरोप लगाता है; यदि A सद्भावनापूर्वक Z के आचरण की शिकायत Z के स्वामी से करता है; यदि A सद्भावनापूर्वक Z के आचरण की शिकायत Z के पिता से करता है - तो A इस अपवाद के अंतर्गत आता है।
नौवां अपवाद.— किसी व्यक्ति द्वारा अपने या दूसरों के हितों की रक्षा के लिए सद्भावपूर्वक लगाया गया आरोप.— किसी दूसरे व्यक्ति के चरित्र पर आरोप लगाना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति के हितों की रक्षा के लिए या सार्वजनिक हित के लिए सद्भावपूर्वक लगाया गया हो।
रेखांकन
(a) दुकानदार A अपने व्यवसाय के प्रबंधक B से कहता है, “Z को तब तक कुछ मत बेचना जब तक वह तुम्हें नकद भुगतान न कर दे, क्योंकि मुझे उसकी ईमानदारी पर भरोसा नहीं है।” A अपवाद के अंतर्गत आता है, यदि उसने अपने हितों की रक्षा के लिए सद्भावनापूर्वक Z पर यह आरोप लगाया है।
(ख) मजिस्ट्रेट ए, अपने वरिष्ठ अधिकारी को रिपोर्ट देते समय जेड के चरित्र पर आरोप लगाता है। यदि यह आरोप सद्भावनापूर्वक और जनहित में लगाया गया है, तो ए अपवाद के अंतर्गत आता है।
दसवाँ अपवाद.— चेतावनी जो किसी व्यक्ति के हित में या जनहित के लिए दी गई हो.— सद्भावनापूर्वक किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के विरुद्ध चेतावनी देना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि ऐसी चेतावनी उस व्यक्ति के हित में हो जिसमें वह दी गई हो, या किसी ऐसे व्यक्ति के हित में हो जिसमें वह व्यक्ति रुचि रखता हो, या जनहित के लिए हो।
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स्पष्टीकरण 2. —किसी कंपनी या संघ या व्यक्तियों के समूह के बारे में इस प्रकार का आरोप लगाना मानहानि के बराबर हो सकता है।
स्पष्टीकरण 3. —वैकल्पिक रूप में या व्यंग्यात्मक रूप से व्यक्त किया गया आरोप मानहानि के बराबर हो सकता है।
स्पष्टीकरण 4. —किसी भी आरोप को किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला तब तक नहीं कहा जाता, जब तक कि वह आरोप प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, दूसरों की दृष्टि में, उस व्यक्ति के नैतिक या बौद्धिक चरित्र को कम न करे, या उसकी जाति या उसके व्यवसाय के संबंध में उसके चरित्र को कम न करे, या उस व्यक्ति की साख को कम न करे, या यह विश्वास न दिलाए कि उस व्यक्ति का शरीर घृणित अवस्था में है, या ऐसी अवस्था में है जिसे आम तौर पर अपमानजनक माना जाता है।
रेखांकन
(क) ए कहता है— "जेड एक ईमानदार आदमी है; उसने बी की घड़ी कभी नहीं चुराई"; इसका उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि जेड ने बी की घड़ी चुराई थी। यह मानहानि है, जब तक कि यह अपवादों में से किसी एक के अंतर्गत न आता हो।
(ख) ए से पूछा जाता है कि बी की घड़ी किसने चुराई। ए, जेड की ओर इशारा करता है, जिसका उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि जेड ने बी की घड़ी चुराई है। यह मानहानि है, जब तक कि यह अपवादों में से किसी एक के अंतर्गत न आता हो।
(ग) ए, जेड द्वारा बी की घड़ी लेकर भागते हुए का चित्र बनाता है, जिसका उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि जेड ने बी की घड़ी चुराई है। यह मानहानि है, जब तक कि यह अपवादों में से किसी एक के अंतर्गत न आता हो।
पहला अपवाद.— सार्वजनिक हित के लिए आवश्यक सत्य का आरोपण.— किसी व्यक्ति के संबंध में कोई सत्य बात कहना मानहानि नहीं है, यदि ऐसा आरोपण या प्रकाशन सार्वजनिक हित के लिए आवश्यक हो। यह सार्वजनिक हित के लिए है या नहीं, यह तथ्य का प्रश्न है।
दूसरा अपवाद.— लोक सेवकों का सार्वजनिक आचरण.— किसी लोक सेवक द्वारा अपने सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में किए गए आचरण या उसके चरित्र के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि उसका चरित्र उस आचरण में प्रकट होता हो, और इससे आगे नहीं।
तीसरा अपवाद.— किसी सार्वजनिक प्रश्न से संबंधित किसी व्यक्ति का आचरण.— किसी सार्वजनिक प्रश्न से संबंधित किसी व्यक्ति के आचरण और उसके चरित्र के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि उसका चरित्र उस आचरण में प्रकट होता हो, और इससे आगे नहीं।
चित्रण
किसी सार्वजनिक मुद्दे पर सरकार से याचिका दायर करने, किसी सार्वजनिक मुद्दे पर बैठक के लिए अनुरोध पर हस्ताक्षर करने, ऐसी बैठक की अध्यक्षता करने या उसमें उपस्थित होने, सार्वजनिक समर्थन आमंत्रित करने वाले किसी भी समाज का गठन करने या उसमें शामिल होने, या किसी ऐसे पद के लिए किसी विशेष उम्मीदवार के लिए मतदान करने या प्रचार करने में, जिसमें जनता की रुचि हो, Z के आचरण के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना A के लिए मानहानि नहीं है।
चौथा अपवाद.— अदालतों की कार्यवाही की रिपोर्टों का प्रकाशन.— किसी न्यायालय की कार्यवाही या ऐसी किसी कार्यवाही के परिणाम की सारतः सत्य रिपोर्ट प्रकाशित करना मानहानि नहीं है।
स्पष्टीकरण. —न्यायालय में मुकदमे से पहले खुली अदालत में जांच करने वाला शांति न्यायाधीश या अन्य अधिकारी, उपरोक्त धारा के अर्थ में न्यायालय है।
पांचवां अपवाद.— न्यायालय द्वारा तय किए गए मामले के गुण-दोष या गवाहों और अन्य संबंधित व्यक्तियों का आचरण.— किसी भी मामले, चाहे वह दीवानी हो या आपराधिक, जिसका निर्णय न्यायालय द्वारा किया गया हो, के गुण-दोष के संबंध में, या किसी व्यक्ति के आचरण के संबंध में, चाहे वह किसी मामले में पक्षकार, गवाह या प्रतिनिधि के रूप में हो, या ऐसे व्यक्ति के चरित्र के संबंध में, जहाँ तक उसका चरित्र उस आचरण में प्रकट होता है, और इससे आगे नहीं, सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है।
रेखांकन
(क) ए कहता है—"मुझे लगता है कि उस मुकदमे में जेड की गवाही इतनी विरोधाभासी है कि वह या तो मूर्ख है या बेईमान।" ए इस अपवाद के अंतर्गत आता है यदि वह यह बात सद्भावना से कहता है, क्योंकि उसकी राय जेड के चरित्र से संबंधित है जैसा कि एक गवाह के रूप में उसके आचरण में प्रकट होता है, और इससे आगे नहीं।
(ख) लेकिन यदि ए कहता है—"मैं ज़ेड द्वारा उस मुकदमे में कही गई बात पर विश्वास नहीं करता क्योंकि मैं जानता हूँ कि वह एक असत्य व्यक्ति है"; ए इस अपवाद के अंतर्गत नहीं आता, क्योंकि ज़ेड के चरित्र के बारे में व्यक्त की गई राय, गवाह के रूप में ज़ेड के आचरण पर आधारित नहीं है।
छठा अपवाद.— सार्वजनिक प्रदर्शन के गुण.— किसी ऐसे प्रदर्शन के गुणों के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है जिसे उसके लेखक ने जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत किया है, या लेखक के चरित्र के संबंध में, जहाँ तक उसका चरित्र ऐसे प्रदर्शन में प्रकट होता है, और इससे आगे नहीं।
स्पष्टीकरण. —किसी प्रस्तुति को स्पष्ट रूप से या लेखक द्वारा किए गए ऐसे कार्यों के माध्यम से जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है जो जनता के निर्णय के लिए ऐसी प्रस्तुति का संकेत देते हैं।
रेखांकन
(क) जो व्यक्ति पुस्तक प्रकाशित करता है, वह उस पुस्तक को जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत करता है।
(ख) जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से भाषण देता है, वह उस भाषण को जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत करता है।
(ग) कोई अभिनेता या गायक जो सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुति देता है, वह अपने अभिनय या गायन को जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत करता है।
(घ) ए, जेड द्वारा प्रकाशित पुस्तक के बारे में कहता है—"जेड की पुस्तक मूर्खतापूर्ण है; जेड अवश्य ही दुर्बल व्यक्ति होगा। जेड की पुस्तक अश्लील है; जेड अवश्य ही अपवित्र मन का व्यक्ति होगा।" यदि ए सद्भावना से यह कहता है, तो वह अपवाद के अंतर्गत आता है, क्योंकि जेड के बारे में उसकी राय केवल जेड के चरित्र से संबंधित है, जो जेड की पुस्तक में प्रकट होता है, इससे आगे नहीं।
(ई) लेकिन अगर ए कहता है, "मुझे आश्चर्य नहीं है कि जेड की किताब मूर्खतापूर्ण और अभद्र है, क्योंकि वह एक कमजोर और स्वच्छंद व्यक्ति है।" ए इस अपवाद के अंतर्गत नहीं आता, क्योंकि जेड के चरित्र के बारे में उसकी राय जेड की किताब पर आधारित नहीं है।
सातवाँ अपवाद.— किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे पर वैध अधिकार रखने के कारण सद्भावनापूर्वक की गई निंदा.— किसी व्यक्ति द्वारा, जिसे किसी दूसरे पर कोई अधिकार प्राप्त हो, चाहे वह अधिकार कानून द्वारा प्रदत्त हो या उस दूसरे के साथ किए गए वैध अनुबंध से उत्पन्न हो, सद्भावनापूर्वक उस दूसरे के आचरण पर उन मामलों में निंदा करना, जिनसे वह वैध अधिकार संबंधित है, मानहानि नहीं है।
चित्रण
किसी न्यायाधीश द्वारा सद्भावनापूर्वक किसी गवाह या न्यायालय के अधिकारी के आचरण की निंदा करना; किसी विभाग के प्रमुख द्वारा सद्भावनापूर्वक अपने अधीन कर्मचारियों की निंदा करना; किसी अभिभावक द्वारा अन्य बच्चों की उपस्थिति में किसी बच्चे की सद्भावनापूर्वक निंदा करना; किसी विद्यालय के शिक्षक, जिसका अधिकार किसी अभिभावक से प्राप्त होता है, द्वारा सद्भावनापूर्वक किसी छात्र की उपस्थिति में निंदा करना; किसी स्वामी द्वारा सेवा में लापरवाही के लिए किसी नौकर की सद्भावनापूर्वक निंदा करना; किसी बैंकर द्वारा अपने बैंक के कैशियर के आचरण की सद्भावनापूर्वक निंदा करना - ये सभी इस अपवाद के अंतर्गत आते हैं।
आठवाँ अपवाद.— अधिकृत व्यक्ति के समक्ष सद्भावनापूर्वक लगाया गया आरोप.— किसी व्यक्ति के विरुद्ध सद्भावनापूर्वक किसी ऐसे व्यक्ति के समक्ष आरोप लगाना मानहानि नहीं है, जिसे आरोप के विषयवस्तु के संबंध में उस व्यक्ति पर वैध अधिकार प्राप्त हो।
चित्रण
यदि A सद्भावनापूर्वक किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष Z पर आरोप लगाता है; यदि A सद्भावनापूर्वक Z के आचरण की शिकायत Z के स्वामी से करता है; यदि A सद्भावनापूर्वक Z के आचरण की शिकायत Z के पिता से करता है - तो A इस अपवाद के अंतर्गत आता है।
नौवां अपवाद.— किसी व्यक्ति द्वारा अपने या दूसरों के हितों की रक्षा के लिए सद्भावपूर्वक लगाया गया आरोप.— किसी दूसरे व्यक्ति के चरित्र पर आरोप लगाना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति के हितों की रक्षा के लिए या सार्वजनिक हित के लिए सद्भावपूर्वक लगाया गया हो।
रेखांकन
(a) दुकानदार A अपने व्यवसाय के प्रबंधक B से कहता है, “Z को तब तक कुछ मत बेचना जब तक वह तुम्हें नकद भुगतान न कर दे, क्योंकि मुझे उसकी ईमानदारी पर भरोसा नहीं है।” A अपवाद के अंतर्गत आता है, यदि उसने अपने हितों की रक्षा के लिए सद्भावनापूर्वक Z पर यह आरोप लगाया है।
(ख) मजिस्ट्रेट ए, अपने वरिष्ठ अधिकारी को रिपोर्ट देते समय जेड के चरित्र पर आरोप लगाता है। यदि यह आरोप सद्भावनापूर्वक और जनहित में लगाया गया है, तो ए अपवाद के अंतर्गत आता है।
दसवाँ अपवाद.— चेतावनी जो किसी व्यक्ति के हित में या जनहित के लिए दी गई हो.— सद्भावनापूर्वक किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के विरुद्ध चेतावनी देना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि ऐसी चेतावनी उस व्यक्ति के हित में हो जिसमें वह दी गई हो, या किसी ऐसे व्यक्ति के हित में हो जिसमें वह व्यक्ति रुचि रखता हो, या जनहित के लिए हो।
नया कानून
BNS §356(1)
मानहानि।
(1) जो कोई भी, बोले गए या पढ़े जाने के उद्देश्य से शब्दों द्वारा, या संकेतों द्वारा, या दृश्य प्रस्तुतियों द्वारा, किसी भी तरह से किसी व्यक्ति के संबंध में कोई आरोप लगाता है या प्रकाशित करता है, जिसका उद्देश्य उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाना हो, या यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि ऐसा आरोप उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाएगा, तो उसे, इसके बाद अपवादित मामलों को छोड़कर, उस व्यक्ति को बदनाम करना कहा जाता है।
स्पष्टीकरण 1.---किसी मृत व्यक्ति पर कोई आरोप लगाना मानहानि हो सकता है, यदि वह आरोप जीवित रहते हुए उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता हो, और उसका उद्देश्य उसके परिवार या अन्य निकट संबंधियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना हो।
स्पष्टीकरण 2.---किसी कंपनी या संघ या व्यक्तियों के समूह के बारे में इस प्रकार का आरोप लगाना मानहानि का अपराध हो सकता है।
स्पष्टीकरण 3.---वैकल्पिक रूप में या व्यंग्यात्मक रूप से व्यक्त किया गया आरोप मानहानि के बराबर हो सकता है।
स्पष्टीकरण 4.---किसी भी आरोप को किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला तब तक नहीं कहा जाता, जब तक कि वह आरोप प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, दूसरों की दृष्टि में, उस व्यक्ति के नैतिक या बौद्धिक चरित्र को कम न करे, या उसकी जाति या उसके व्यवसाय के संबंध में उसके चरित्र को कम न करे, या उस व्यक्ति की साख को कम न करे, या यह विश्वास न दिलाए कि उस व्यक्ति का शरीर घृणित अवस्था में है, या ऐसी अवस्था में है जिसे आम तौर पर अपमानजनक माना जाता है।
चित्र।
(क) ए कहता है---"जेड एक ईमानदार आदमी है; उसने बी की घड़ी कभी नहीं चुराई"; इसका उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि जेड ने बी की घड़ी चुराई थी। यह मानहानि है, जब तक कि यह अपवादों में से किसी एक के अंतर्गत न आता हो।
(ख) ए से पूछा जाता है कि बी की घड़ी किसने चुराई। ए, जेड की ओर इशारा करता है, जिसका उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि जेड ने बी की घड़ी चुराई है। यह मानहानि है, जब तक कि यह अपवादों में से किसी एक के अंतर्गत न आता हो।
(ग) ए, जेड द्वारा बी की घड़ी लेकर भागते हुए का चित्र बनाता है, जिसका उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि जेड ने बी की घड़ी चुराई है। यह मानहानि है, जब तक कि यह अपवादों में से किसी एक के अंतर्गत न आता हो।
अपवाद 1.---किसी व्यक्ति के बारे में कोई सत्य बात कहना मानहानि नहीं है, यदि ऐसा कहना या प्रकाशित करना जनहित में हो। जनहित में है या नहीं, यह तथ्य का प्रश्न है।
अपवाद 2.---किसी लोक सेवक द्वारा अपने सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में किए गए आचरण के संबंध में, या उसके चरित्र के संबंध में, सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि उसका चरित्र उस आचरण में प्रकट होता हो, और इससे आगे नहीं।
अपवाद 3.---किसी सार्वजनिक प्रश्न से संबंधित किसी व्यक्ति के आचरण और उसके चरित्र के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि उसका चरित्र उस आचरण में प्रकट होता हो, और इससे आगे नहीं।
चित्रण।
किसी सार्वजनिक मुद्दे पर सरकार से याचिका दायर करने, किसी सार्वजनिक मुद्दे पर बैठक के लिए अनुरोध पर हस्ताक्षर करने, ऐसी बैठक की अध्यक्षता करने या उसमें उपस्थित होने, सार्वजनिक समर्थन आमंत्रित करने वाले किसी भी समाज का गठन करने या उसमें शामिल होने, या किसी ऐसे पद के लिए किसी विशेष उम्मीदवार के लिए मतदान करने या प्रचार करने में, जिसमें जनता की रुचि हो, Z के आचरण के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना A के लिए मानहानि नहीं है।
अपवाद 4.---अदालत की कार्यवाही या ऐसी किसी कार्यवाही के परिणाम की सारतः सत्य रिपोर्ट प्रकाशित करना मानहानि नहीं है।
स्पष्टीकरण। ---अदालत में मुकदमे से पहले खुली अदालत में जांच करने वाला मजिस्ट्रेट या अन्य अधिकारी, उपरोक्त धारा के अर्थ में एक अदालत है।
अपवाद 5.---किसी न्यायालय द्वारा तय किए गए किसी भी दीवानी या आपराधिक मामले के गुण-दोष के संबंध में, या किसी व्यक्ति के किसी मामले में पक्षकार, गवाह या प्रतिनिधि के रूप में आचरण के संबंध में, या ऐसे व्यक्ति के चरित्र के संबंध में, जहाँ तक उसका चरित्र उस आचरण में प्रकट होता है, और उससे आगे नहीं, सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है।
चित्र।
(क) ए कहता है---"मुझे लगता है कि उस मुकदमे में जेड की गवाही इतनी विरोधाभासी है कि वह या तो मूर्ख है या बेईमान।" ए इस अपवाद के अंतर्गत आता है यदि वह यह बात सद्भावना से कहता है, क्योंकि उसकी राय जेड के चरित्र से संबंधित है जैसा कि एक गवाह के रूप में उसके आचरण से पता चलता है, और इससे आगे नहीं।
(ख) लेकिन यदि ए कहता है---"मैं ज़ेड द्वारा उस मुकदमे में कही गई बातों पर विश्वास नहीं करता क्योंकि मैं जानता हूँ कि वह एक असत्य व्यक्ति है"; ए इस अपवाद के अंतर्गत नहीं आता, क्योंकि ज़ेड के चरित्र के बारे में व्यक्त की गई राय, गवाह के रूप में ज़ेड के आचरण पर आधारित नहीं है।
अपवाद 6. ---किसी भी प्रदर्शन की खूबियों के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई राय व्यक्त करना, जिसे उसके लेखक ने जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत किया है, या लेखक के चरित्र के संबंध में, जहाँ तक उसका चरित्र ऐसे प्रदर्शन में प्रकट होता है, और इससे आगे नहीं, मानहानि नहीं है।
स्पष्टीकरण .---किसी प्रस्तुति को स्पष्ट रूप से या लेखक द्वारा किए गए ऐसे कार्यों के माध्यम से जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है जो जनता के निर्णय के लिए ऐसी प्रस्तुति का संकेत देते हैं।
चित्र।
(क) जो व्यक्ति पुस्तक प्रकाशित करता है, वह उस पुस्तक को जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत करता है।
(ख) जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से भाषण देता है, वह उस भाषण को जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत करता है।
(ग) कोई अभिनेता या गायक जो सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुति देता है, वह अपने अभिनय या गायन को जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत करता है।
(घ) ए, जेड द्वारा प्रकाशित पुस्तक के बारे में कहता है---"जेड की पुस्तक मूर्खतापूर्ण है; जेड अवश्य ही कमजोर व्यक्ति होगा। जेड की पुस्तक अश्लील है; जेड अवश्य ही अशुद्ध मन का व्यक्ति होगा।" यदि ए सद्भावना से यह कहता है, तो वह अपवाद के अंतर्गत आता है, क्योंकि जेड के बारे में उसकी राय केवल जेड के चरित्र से संबंधित है, जो कि उसकी पुस्तक में प्रकट होता है, इससे आगे नहीं।
(ई) लेकिन यदि ए कहता है, "मुझे आश्चर्य नहीं है कि जेड की किताब मूर्खतापूर्ण और अभद्र है, क्योंकि वह एक कमजोर और स्वच्छंद व्यक्ति है।" ए इस अपवाद के अंतर्गत नहीं आता, क्योंकि जेड के चरित्र के बारे में उसकी राय जेड की किताब पर आधारित नहीं है।
अपवाद 7. ---किसी व्यक्ति द्वारा, जिसे किसी अन्य व्यक्ति पर कोई अधिकार प्राप्त है, चाहे वह अधिकार कानून द्वारा प्रदत्त हो या उस अन्य व्यक्ति के साथ किए गए वैध अनुबंध से उत्पन्न हो, सद्भावनापूर्वक उस अन्य व्यक्ति के आचरण पर उन मामलों में निंदा करना, जिनसे ऐसा वैध अधिकार संबंधित है, मानहानि नहीं है।
चित्रण।
किसी न्यायाधीश द्वारा सद्भावनापूर्वक किसी गवाह या न्यायालय के अधिकारी के आचरण की निंदा करना; किसी विभाग के प्रमुख द्वारा सद्भावनापूर्वक अपने अधीन कर्मचारियों की निंदा करना; किसी अभिभावक द्वारा अन्य बच्चों की उपस्थिति में किसी बच्चे की सद्भावनापूर्वक निंदा करना; किसी विद्यालय के शिक्षक, जिसका अधिकार किसी अभिभावक से प्राप्त होता है, द्वारा सद्भावनापूर्वक किसी छात्र की उपस्थिति में निंदा करना; किसी स्वामी द्वारा सेवा में लापरवाही के लिए किसी नौकर की सद्भावनापूर्वक निंदा करना; किसी बैंकर द्वारा अपने बैंक के कैशियर के आचरण की सद्भावनापूर्वक निंदा करना, ये सभी इस अपवाद के अंतर्गत आते हैं।
अपवाद 8. ---किसी व्यक्ति के विरुद्ध सद्भावनापूर्वक किसी ऐसे व्यक्ति के समक्ष आरोप लगाना मानहानि नहीं है, जिसे आरोप के विषयवस्तु के संबंध में उस व्यक्ति पर वैध अधिकार प्राप्त हो।
चित्रण। .
यदि A सद्भावनापूर्वक किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष Z पर आरोप लगाता है; यदि A सद्भावनापूर्वक Z (एक नौकर) के आचरण की शिकायत Z के स्वामी से करता है; यदि A सद्भावनापूर्वक Z (एक बच्चे) के आचरण की शिकायत Z के पिता से करता है, तो A इस अपवाद के अंतर्गत आता है।
अपवाद 9.---किसी अन्य व्यक्ति के चरित्र पर आरोप लगाना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति के हितों की रक्षा के लिए या सार्वजनिक हित के लिए सद्भावनापूर्वक लगाया गया हो।
चित्रण। .
(a) दुकानदार A अपने व्यवसाय के प्रबंधक B से कहता है, "Z को तब तक कुछ मत बेचो जब तक वह तुम्हें नकद भुगतान न कर दे, क्योंकि मुझे उसकी ईमानदारी पर भरोसा नहीं है।" A अपवाद के अंतर्गत आता है, यदि उसने अपने हितों की रक्षा के लिए सद्भावनापूर्वक Z पर यह आरोप लगाया है।
(ख) मजिस्ट्रेट ए, अपने वरिष्ठ अधिकारी को रिपोर्ट देते समय जेड के चरित्र पर आरोप लगाता है। यदि यह आरोप सद्भावनापूर्वक और जनहित में लगाया गया है, तो ए अपवाद के अंतर्गत आता है।
अपवाद 10.---सद्भावनापूर्वक किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के विरुद्ध चेतावनी देना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि ऐसी चेतावनी उस व्यक्ति के भले के लिए हो जिसे यह दी गई है, या किसी ऐसे व्यक्ति के भले के लिए हो जिसमें वह व्यक्ति रुचि रखता हो, या सार्वजनिक हित के लिए हो।
(2) जो कोई दूसरे की मानहानि करेगा, उसे दो वर्ष तक की साधारण कारावास, या जुर्माना, या दोनों, या सामुदायिक सेवा से दंडित किया जाएगा।
(3) जो कोई भी किसी ऐसी सामग्री को मुद्रित या उत्कीर्ण करता है, यह जानते हुए या यह मानने का अच्छा कारण रखते हुए कि ऐसी सामग्री किसी व्यक्ति की मानहानि करती है, उसे दो वर्ष तक की साधारण कारावास, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(4) जो कोई भी मानहानिकारक सामग्री युक्त मुद्रित या उत्कीर्णित पदार्थ को बेचता है या बेचने की पेशकश करता है, यह जानते हुए कि उसमें ऐसी सामग्री है, उसे दो वर्ष तक की साधारण कारावास, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ें: BNS §356(1)स्पष्टीकरण 1.---किसी मृत व्यक्ति पर कोई आरोप लगाना मानहानि हो सकता है, यदि वह आरोप जीवित रहते हुए उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता हो, और उसका उद्देश्य उसके परिवार या अन्य निकट संबंधियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना हो।
स्पष्टीकरण 2.---किसी कंपनी या संघ या व्यक्तियों के समूह के बारे में इस प्रकार का आरोप लगाना मानहानि का अपराध हो सकता है।
स्पष्टीकरण 3.---वैकल्पिक रूप में या व्यंग्यात्मक रूप से व्यक्त किया गया आरोप मानहानि के बराबर हो सकता है।
स्पष्टीकरण 4.---किसी भी आरोप को किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला तब तक नहीं कहा जाता, जब तक कि वह आरोप प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, दूसरों की दृष्टि में, उस व्यक्ति के नैतिक या बौद्धिक चरित्र को कम न करे, या उसकी जाति या उसके व्यवसाय के संबंध में उसके चरित्र को कम न करे, या उस व्यक्ति की साख को कम न करे, या यह विश्वास न दिलाए कि उस व्यक्ति का शरीर घृणित अवस्था में है, या ऐसी अवस्था में है जिसे आम तौर पर अपमानजनक माना जाता है।
चित्र।
(क) ए कहता है---"जेड एक ईमानदार आदमी है; उसने बी की घड़ी कभी नहीं चुराई"; इसका उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि जेड ने बी की घड़ी चुराई थी। यह मानहानि है, जब तक कि यह अपवादों में से किसी एक के अंतर्गत न आता हो।
(ख) ए से पूछा जाता है कि बी की घड़ी किसने चुराई। ए, जेड की ओर इशारा करता है, जिसका उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि जेड ने बी की घड़ी चुराई है। यह मानहानि है, जब तक कि यह अपवादों में से किसी एक के अंतर्गत न आता हो।
(ग) ए, जेड द्वारा बी की घड़ी लेकर भागते हुए का चित्र बनाता है, जिसका उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि जेड ने बी की घड़ी चुराई है। यह मानहानि है, जब तक कि यह अपवादों में से किसी एक के अंतर्गत न आता हो।
अपवाद 1.---किसी व्यक्ति के बारे में कोई सत्य बात कहना मानहानि नहीं है, यदि ऐसा कहना या प्रकाशित करना जनहित में हो। जनहित में है या नहीं, यह तथ्य का प्रश्न है।
अपवाद 2.---किसी लोक सेवक द्वारा अपने सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में किए गए आचरण के संबंध में, या उसके चरित्र के संबंध में, सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि उसका चरित्र उस आचरण में प्रकट होता हो, और इससे आगे नहीं।
अपवाद 3.---किसी सार्वजनिक प्रश्न से संबंधित किसी व्यक्ति के आचरण और उसके चरित्र के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि उसका चरित्र उस आचरण में प्रकट होता हो, और इससे आगे नहीं।
चित्रण।
किसी सार्वजनिक मुद्दे पर सरकार से याचिका दायर करने, किसी सार्वजनिक मुद्दे पर बैठक के लिए अनुरोध पर हस्ताक्षर करने, ऐसी बैठक की अध्यक्षता करने या उसमें उपस्थित होने, सार्वजनिक समर्थन आमंत्रित करने वाले किसी भी समाज का गठन करने या उसमें शामिल होने, या किसी ऐसे पद के लिए किसी विशेष उम्मीदवार के लिए मतदान करने या प्रचार करने में, जिसमें जनता की रुचि हो, Z के आचरण के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना A के लिए मानहानि नहीं है।
अपवाद 4.---अदालत की कार्यवाही या ऐसी किसी कार्यवाही के परिणाम की सारतः सत्य रिपोर्ट प्रकाशित करना मानहानि नहीं है।
स्पष्टीकरण। ---अदालत में मुकदमे से पहले खुली अदालत में जांच करने वाला मजिस्ट्रेट या अन्य अधिकारी, उपरोक्त धारा के अर्थ में एक अदालत है।
अपवाद 5.---किसी न्यायालय द्वारा तय किए गए किसी भी दीवानी या आपराधिक मामले के गुण-दोष के संबंध में, या किसी व्यक्ति के किसी मामले में पक्षकार, गवाह या प्रतिनिधि के रूप में आचरण के संबंध में, या ऐसे व्यक्ति के चरित्र के संबंध में, जहाँ तक उसका चरित्र उस आचरण में प्रकट होता है, और उससे आगे नहीं, सद्भावनापूर्वक कोई भी राय व्यक्त करना मानहानि नहीं है।
चित्र।
(क) ए कहता है---"मुझे लगता है कि उस मुकदमे में जेड की गवाही इतनी विरोधाभासी है कि वह या तो मूर्ख है या बेईमान।" ए इस अपवाद के अंतर्गत आता है यदि वह यह बात सद्भावना से कहता है, क्योंकि उसकी राय जेड के चरित्र से संबंधित है जैसा कि एक गवाह के रूप में उसके आचरण से पता चलता है, और इससे आगे नहीं।
(ख) लेकिन यदि ए कहता है---"मैं ज़ेड द्वारा उस मुकदमे में कही गई बातों पर विश्वास नहीं करता क्योंकि मैं जानता हूँ कि वह एक असत्य व्यक्ति है"; ए इस अपवाद के अंतर्गत नहीं आता, क्योंकि ज़ेड के चरित्र के बारे में व्यक्त की गई राय, गवाह के रूप में ज़ेड के आचरण पर आधारित नहीं है।
अपवाद 6. ---किसी भी प्रदर्शन की खूबियों के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई राय व्यक्त करना, जिसे उसके लेखक ने जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत किया है, या लेखक के चरित्र के संबंध में, जहाँ तक उसका चरित्र ऐसे प्रदर्शन में प्रकट होता है, और इससे आगे नहीं, मानहानि नहीं है।
स्पष्टीकरण .---किसी प्रस्तुति को स्पष्ट रूप से या लेखक द्वारा किए गए ऐसे कार्यों के माध्यम से जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है जो जनता के निर्णय के लिए ऐसी प्रस्तुति का संकेत देते हैं।
चित्र।
(क) जो व्यक्ति पुस्तक प्रकाशित करता है, वह उस पुस्तक को जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत करता है।
(ख) जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से भाषण देता है, वह उस भाषण को जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत करता है।
(ग) कोई अभिनेता या गायक जो सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुति देता है, वह अपने अभिनय या गायन को जनता के निर्णय के लिए प्रस्तुत करता है।
(घ) ए, जेड द्वारा प्रकाशित पुस्तक के बारे में कहता है---"जेड की पुस्तक मूर्खतापूर्ण है; जेड अवश्य ही कमजोर व्यक्ति होगा। जेड की पुस्तक अश्लील है; जेड अवश्य ही अशुद्ध मन का व्यक्ति होगा।" यदि ए सद्भावना से यह कहता है, तो वह अपवाद के अंतर्गत आता है, क्योंकि जेड के बारे में उसकी राय केवल जेड के चरित्र से संबंधित है, जो कि उसकी पुस्तक में प्रकट होता है, इससे आगे नहीं।
(ई) लेकिन यदि ए कहता है, "मुझे आश्चर्य नहीं है कि जेड की किताब मूर्खतापूर्ण और अभद्र है, क्योंकि वह एक कमजोर और स्वच्छंद व्यक्ति है।" ए इस अपवाद के अंतर्गत नहीं आता, क्योंकि जेड के चरित्र के बारे में उसकी राय जेड की किताब पर आधारित नहीं है।
अपवाद 7. ---किसी व्यक्ति द्वारा, जिसे किसी अन्य व्यक्ति पर कोई अधिकार प्राप्त है, चाहे वह अधिकार कानून द्वारा प्रदत्त हो या उस अन्य व्यक्ति के साथ किए गए वैध अनुबंध से उत्पन्न हो, सद्भावनापूर्वक उस अन्य व्यक्ति के आचरण पर उन मामलों में निंदा करना, जिनसे ऐसा वैध अधिकार संबंधित है, मानहानि नहीं है।
चित्रण।
किसी न्यायाधीश द्वारा सद्भावनापूर्वक किसी गवाह या न्यायालय के अधिकारी के आचरण की निंदा करना; किसी विभाग के प्रमुख द्वारा सद्भावनापूर्वक अपने अधीन कर्मचारियों की निंदा करना; किसी अभिभावक द्वारा अन्य बच्चों की उपस्थिति में किसी बच्चे की सद्भावनापूर्वक निंदा करना; किसी विद्यालय के शिक्षक, जिसका अधिकार किसी अभिभावक से प्राप्त होता है, द्वारा सद्भावनापूर्वक किसी छात्र की उपस्थिति में निंदा करना; किसी स्वामी द्वारा सेवा में लापरवाही के लिए किसी नौकर की सद्भावनापूर्वक निंदा करना; किसी बैंकर द्वारा अपने बैंक के कैशियर के आचरण की सद्भावनापूर्वक निंदा करना, ये सभी इस अपवाद के अंतर्गत आते हैं।
अपवाद 8. ---किसी व्यक्ति के विरुद्ध सद्भावनापूर्वक किसी ऐसे व्यक्ति के समक्ष आरोप लगाना मानहानि नहीं है, जिसे आरोप के विषयवस्तु के संबंध में उस व्यक्ति पर वैध अधिकार प्राप्त हो।
चित्रण। .
यदि A सद्भावनापूर्वक किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष Z पर आरोप लगाता है; यदि A सद्भावनापूर्वक Z (एक नौकर) के आचरण की शिकायत Z के स्वामी से करता है; यदि A सद्भावनापूर्वक Z (एक बच्चे) के आचरण की शिकायत Z के पिता से करता है, तो A इस अपवाद के अंतर्गत आता है।
अपवाद 9.---किसी अन्य व्यक्ति के चरित्र पर आरोप लगाना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति के हितों की रक्षा के लिए या सार्वजनिक हित के लिए सद्भावनापूर्वक लगाया गया हो।
चित्रण। .
(a) दुकानदार A अपने व्यवसाय के प्रबंधक B से कहता है, "Z को तब तक कुछ मत बेचो जब तक वह तुम्हें नकद भुगतान न कर दे, क्योंकि मुझे उसकी ईमानदारी पर भरोसा नहीं है।" A अपवाद के अंतर्गत आता है, यदि उसने अपने हितों की रक्षा के लिए सद्भावनापूर्वक Z पर यह आरोप लगाया है।
(ख) मजिस्ट्रेट ए, अपने वरिष्ठ अधिकारी को रिपोर्ट देते समय जेड के चरित्र पर आरोप लगाता है। यदि यह आरोप सद्भावनापूर्वक और जनहित में लगाया गया है, तो ए अपवाद के अंतर्गत आता है।
अपवाद 10.---सद्भावनापूर्वक किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के विरुद्ध चेतावनी देना मानहानि नहीं है, बशर्ते कि ऐसी चेतावनी उस व्यक्ति के भले के लिए हो जिसे यह दी गई है, या किसी ऐसे व्यक्ति के भले के लिए हो जिसमें वह व्यक्ति रुचि रखता हो, या सार्वजनिक हित के लिए हो।
(2) जो कोई दूसरे की मानहानि करेगा, उसे दो वर्ष तक की साधारण कारावास, या जुर्माना, या दोनों, या सामुदायिक सेवा से दंडित किया जाएगा।
(3) जो कोई भी किसी ऐसी सामग्री को मुद्रित या उत्कीर्ण करता है, यह जानते हुए या यह मानने का अच्छा कारण रखते हुए कि ऐसी सामग्री किसी व्यक्ति की मानहानि करती है, उसे दो वर्ष तक की साधारण कारावास, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(4) जो कोई भी मानहानिकारक सामग्री युक्त मुद्रित या उत्कीर्णित पदार्थ को बेचता है या बेचने की पेशकश करता है, यह जानते हुए कि उसमें ऐसी सामग्री है, उसे दो वर्ष तक की साधारण कारावास, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
