पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 451 अब BNS धारा 332(c) है
धारा 451 - कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार
पुराना कानून
IPC §451
धारा 451 - कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार
कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार
जो कोई कारावास से दंडनीय कोई अपराध करने के लिए गॄह-अतिचार करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा, तथा यदि वह अपराध, जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी ।
पूरा पढ़ें: IPC §451जो कोई कारावास से दंडनीय कोई अपराध करने के लिए गॄह-अतिचार करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा, तथा यदि वह अपराध, जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी ।
नया कानून
BNS §332(c)
अपराध करने के इरादे से घर में घुसपैठ करना।
जो कोई भी किसी अपराध को अंजाम देने के इरादे से घर में घुसपैठ करता है---
(क) मृत्युदंड के दंडनीय व्यक्ति को आजीवन कारावास या दस वर्ष से अधिक की अवधि के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा;
(ख) आजीवन कारावास से दंडनीय व्यक्ति को दस वर्ष से अधिक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा;
(ग) कारावास से दंडनीय होने पर, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा:
बशर्ते कि यदि किया जाने वाला अपराध चोरी है, तो कारावास की अवधि सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।
पूरा पढ़ें: BNS §332(c)(क) मृत्युदंड के दंडनीय व्यक्ति को आजीवन कारावास या दस वर्ष से अधिक की अवधि के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा;
(ख) आजीवन कारावास से दंडनीय व्यक्ति को दस वर्ष से अधिक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा;
(ग) कारावास से दंडनीय होने पर, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा:
बशर्ते कि यदि किया जाने वाला अपराध चोरी है, तो कारावास की अवधि सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
