पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 414 अब BNS धारा 317(5) है
धारा 414 - चुराई हुई संपत्ति छिपाने में सहायता करना
पुराना कानून
IPC §414
धारा 414 - चुराई हुई संपत्ति छिपाने में सहायता करना
चुराई हुई संपत्ति छिपाने में सहायता करना
जो कोई ऐसी संपत्ति को छिपाने में, या व्ययनित करने में, या इधर उधर करने में स्वेच्छया सहायता करेगा, जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई संपत्ति है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि 3 वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किसा जाएगा ।
पूरा पढ़ें: IPC §414जो कोई ऐसी संपत्ति को छिपाने में, या व्ययनित करने में, या इधर उधर करने में स्वेच्छया सहायता करेगा, जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई संपत्ति है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि 3 वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किसा जाएगा ।
नया कानून
BNS §317(5)
चोरी की संपत्ति।
(1) वह संपत्ति जिसका कब्ज़ा चोरी, जबरन वसूली, डकैती या धोखाधड़ी द्वारा हस्तांतरित किया गया हो, और वह संपत्ति जिसका आपराधिक रूप से दुरुपयोग किया गया हो या जिसके संबंध में आपराधिक विश्वासघात किया गया हो, चोरी की संपत्ति कहलाती है, चाहे हस्तांतरण भारत के भीतर हुआ हो या भारत के बाहर, या दुरुपयोग या विश्वासघात किया गया हो, लेकिन यदि ऐसी संपत्ति बाद में किसी ऐसे व्यक्ति के कब्जे में आ जाती है जो कानूनी रूप से उस पर कब्जा करने का हकदार है, तो वह चोरी की संपत्ति नहीं रह जाती।
(2) जो कोई बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करता है या अपने पास रखता है, यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि वह चोरी की संपत्ति है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(3) जो कोई बेईमानी से किसी चोरी की संपत्ति को प्राप्त करता है या अपने पास रखता है, जिसके कब्जे के बारे में वह जानता है या उसे विश्वास करने का कारण है कि वह डकैती के द्वारा हस्तांतरित की गई है, या बेईमानी से किसी ऐसे व्यक्ति से संपत्ति प्राप्त करता है, जिसके बारे में वह जानता है या उसे विश्वास करने का कारण है कि वह डकैतों के गिरोह से संबंधित है या रहा है, ऐसी संपत्ति जिसके बारे में वह जानता है या उसे विश्वास करने का कारण है कि वह चोरी की गई है, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
(4) जो कोई आदतन ऐसी संपत्ति प्राप्त करता है या उसका लेन-देन करता है जिसे वह जानता है या जिसके बारे में उसे विश्वास करने का कारण है कि वह चोरी की संपत्ति है, उसे आजीवन कारावास या किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
(5) जो कोई स्वेच्छा से ऐसी संपत्ति को छिपाने, उसका निपटान करने या उसे ले जाने में सहायता करता है जिसे वह जानता है या जिसके बारे में उसे विश्वास करने का कारण है कि वह चोरी की संपत्ति है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ें: BNS §317(5)(2) जो कोई बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करता है या अपने पास रखता है, यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि वह चोरी की संपत्ति है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(3) जो कोई बेईमानी से किसी चोरी की संपत्ति को प्राप्त करता है या अपने पास रखता है, जिसके कब्जे के बारे में वह जानता है या उसे विश्वास करने का कारण है कि वह डकैती के द्वारा हस्तांतरित की गई है, या बेईमानी से किसी ऐसे व्यक्ति से संपत्ति प्राप्त करता है, जिसके बारे में वह जानता है या उसे विश्वास करने का कारण है कि वह डकैतों के गिरोह से संबंधित है या रहा है, ऐसी संपत्ति जिसके बारे में वह जानता है या उसे विश्वास करने का कारण है कि वह चोरी की गई है, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
(4) जो कोई आदतन ऐसी संपत्ति प्राप्त करता है या उसका लेन-देन करता है जिसे वह जानता है या जिसके बारे में उसे विश्वास करने का कारण है कि वह चोरी की संपत्ति है, उसे आजीवन कारावास या किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
(5) जो कोई स्वेच्छा से ऐसी संपत्ति को छिपाने, उसका निपटान करने या उसे ले जाने में सहायता करता है जिसे वह जानता है या जिसके बारे में उसे विश्वास करने का कारण है कि वह चोरी की संपत्ति है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
