पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 363A अब BNS धारा 139 है
धारा 363A - भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण
पुराना कानून
IPC §363A
धारा 363A - भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण
भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण
(1) जो कोई किसी अप्राप्तवय का इसलिए व्यपहरण करेगा या अप्राप्तवय का विधिपूर्ण संरक्षक स्वयं न होते हुए अप्राप्तवय की अभिरक्षा इसलिए अभिप्राप्त करेगा कि ऐसा अप्राप्तवय भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
(2) जो कोई किसी अप्राप्तवय को विकलांग इसलिए करेगा कि ऐसा अप्राप्तवय भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए, वह आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
(3) जहां कि कोई व्यक्ति, जो अप्राप्तवय का विधिपूर्ण संरक्षक नहीं है, उस अप्राप्तवय को भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त करेगा, वहां जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, यह उपधारणा की जाएगी कि उसने इस उद्देश्य से उस अप्राप्तवय का व्यपहरण किया था या अन्यथा उसकी अभिरक्षा अभिप्राप्त की थी कि वह अप्राप्तवय भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए।
(4) इस धारा में -
(क) “भीख मांगने” से अभिप्रेत है -
(a) लोक स्थान में भिक्षा की याचना या प्राप्ति चाहे गाने, नाचने, भाग्य बताने, करतब दिखाने या चीजें बेचने के बहाने अथवा अन्यथा करना,
(b) भिक्षा की याचना या प्राप्ति करने के प्रयोजन से किसी प्राइवेट परिसर में प्रवेश करना,
(c) भिक्षा अभिप्राप्त या उद्दापित करने के उद्देश्य से अपना या किसी अन्य व्यक्ति का या जीवजन्तु का कोई व्रण, घाव, क्षति, विरूपता या रोग अभिदर्शित या प्रदर्शित करना,
(d) भिक्षा की याचना या प्राप्ति के प्रयोजन से अप्राप्तवय का प्रदर्शित के रूप में प्रयोग करना ;
(ख) अप्राप्तवय से वह व्यक्ति अभिप्रेत है, जो -
(a) यदि नर है, तो सोलह वर्ष से कम आयु का है ; तथा
(b) यदि नारी है, तो अठारह वर्ष से कम आयु की है ।
पूरा पढ़ें: IPC §363A(1) जो कोई किसी अप्राप्तवय का इसलिए व्यपहरण करेगा या अप्राप्तवय का विधिपूर्ण संरक्षक स्वयं न होते हुए अप्राप्तवय की अभिरक्षा इसलिए अभिप्राप्त करेगा कि ऐसा अप्राप्तवय भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
(2) जो कोई किसी अप्राप्तवय को विकलांग इसलिए करेगा कि ऐसा अप्राप्तवय भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए, वह आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
(3) जहां कि कोई व्यक्ति, जो अप्राप्तवय का विधिपूर्ण संरक्षक नहीं है, उस अप्राप्तवय को भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त करेगा, वहां जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, यह उपधारणा की जाएगी कि उसने इस उद्देश्य से उस अप्राप्तवय का व्यपहरण किया था या अन्यथा उसकी अभिरक्षा अभिप्राप्त की थी कि वह अप्राप्तवय भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए।
(4) इस धारा में -
(क) “भीख मांगने” से अभिप्रेत है -
(a) लोक स्थान में भिक्षा की याचना या प्राप्ति चाहे गाने, नाचने, भाग्य बताने, करतब दिखाने या चीजें बेचने के बहाने अथवा अन्यथा करना,
(b) भिक्षा की याचना या प्राप्ति करने के प्रयोजन से किसी प्राइवेट परिसर में प्रवेश करना,
(c) भिक्षा अभिप्राप्त या उद्दापित करने के उद्देश्य से अपना या किसी अन्य व्यक्ति का या जीवजन्तु का कोई व्रण, घाव, क्षति, विरूपता या रोग अभिदर्शित या प्रदर्शित करना,
(d) भिक्षा की याचना या प्राप्ति के प्रयोजन से अप्राप्तवय का प्रदर्शित के रूप में प्रयोग करना ;
(ख) अप्राप्तवय से वह व्यक्ति अभिप्रेत है, जो -
(a) यदि नर है, तो सोलह वर्ष से कम आयु का है ; तथा
(b) यदि नारी है, तो अठारह वर्ष से कम आयु की है ।
नया कानून
BNS §139
भीख मांगने के उद्देश्य से किसी बच्चे का अपहरण करना या उसे अपंग करना।
(1) जो कोई किसी बच्चे का अपहरण करता है या, ऐसे बच्चे का वैध अभिभावक न होते हुए, उस बच्चे की अभिरक्षा प्राप्त करता है, ताकि ऐसे बच्चे को भीख मांगने के उद्देश्य से नियोजित या उपयोग किया जा सके, उसे कम से कम दस वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जो आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
(2) जो कोई भी किसी बच्चे को इस उद्देश्य से अपंग कर दे कि उस बच्चे को भीख मांगने के लिए नियोजित या उपयोग किया जा सके, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा जो बीस वर्ष से कम नहीं होगा, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन के शेष समय के लिए कारावास होगा, और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
(3) जहाँ कोई व्यक्ति, जो किसी बच्चे का वैध अभिभावक नहीं है, ऐसे बच्चे को भीख मांगने के उद्देश्य से नियोजित करता है या उसका उपयोग करता है, तो यह माना जाएगा, जब तक कि इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, कि उसने ऐसे बच्चे का अपहरण किया है या अन्यथा उसकी हिरासत प्राप्त की है ताकि ऐसे बच्चे को भीख मांगने के उद्देश्य से नियोजित या उपयोग किया जा सके।
(4) इस खंड में "भीख मांगना" का अर्थ है---
(i) सार्वजनिक स्थान पर भीख मांगना या प्राप्त करना, चाहे गायन, नृत्य, भाग्य बताने, करतब दिखाने या सामान बेचने के बहाने हो या किसी अन्य प्रकार से;
(ii) भीख मांगने या प्राप्त करने के उद्देश्य से किसी निजी परिसर में प्रवेश करना;
(iii) भीख मांगने या जबरन वसूली करने के उद्देश्य से स्वयं के, किसी अन्य व्यक्ति के या किसी जानवर के किसी घाव, चोट, विकृति या बीमारी को उजागर करना या प्रदर्शित करना;
(iv) भिक्षा मांगने या प्राप्त करने के उद्देश्य से ऐसे बच्चे को प्रदर्शनी के रूप में उपयोग करना।
पूरा पढ़ें: BNS §139(2) जो कोई भी किसी बच्चे को इस उद्देश्य से अपंग कर दे कि उस बच्चे को भीख मांगने के लिए नियोजित या उपयोग किया जा सके, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा जो बीस वर्ष से कम नहीं होगा, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन के शेष समय के लिए कारावास होगा, और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
(3) जहाँ कोई व्यक्ति, जो किसी बच्चे का वैध अभिभावक नहीं है, ऐसे बच्चे को भीख मांगने के उद्देश्य से नियोजित करता है या उसका उपयोग करता है, तो यह माना जाएगा, जब तक कि इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, कि उसने ऐसे बच्चे का अपहरण किया है या अन्यथा उसकी हिरासत प्राप्त की है ताकि ऐसे बच्चे को भीख मांगने के उद्देश्य से नियोजित या उपयोग किया जा सके।
(4) इस खंड में "भीख मांगना" का अर्थ है---
(i) सार्वजनिक स्थान पर भीख मांगना या प्राप्त करना, चाहे गायन, नृत्य, भाग्य बताने, करतब दिखाने या सामान बेचने के बहाने हो या किसी अन्य प्रकार से;
(ii) भीख मांगने या प्राप्त करने के उद्देश्य से किसी निजी परिसर में प्रवेश करना;
(iii) भीख मांगने या जबरन वसूली करने के उद्देश्य से स्वयं के, किसी अन्य व्यक्ति के या किसी जानवर के किसी घाव, चोट, विकृति या बीमारी को उजागर करना या प्रदर्शित करना;
(iv) भिक्षा मांगने या प्राप्त करने के उद्देश्य से ऐसे बच्चे को प्रदर्शनी के रूप में उपयोग करना।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
