पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 321 अब BNS धारा 115(1) है
धारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
पुराना कानून
IPC §321
धारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
स्वेच्छया उपहति कारित करना
जो कोई किसी कार्य को इस आशय से करता है कि तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे या इस ज्ञान के साथ करता है कि यह संभाव्य है कि वह तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे और तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करता है, वह “स्वेच्छया उपहति करता है”, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ें: IPC §321जो कोई किसी कार्य को इस आशय से करता है कि तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे या इस ज्ञान के साथ करता है कि यह संभाव्य है कि वह तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे और तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करता है, वह “स्वेच्छया उपहति करता है”, यह कहा जाता है ।
नया कानून
BNS §115(1)
जानबूझकर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने के इरादे से, या इस ज्ञान के साथ कि वह किसी व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, कोई कार्य करता है और इस प्रकार किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाता है, तो उसे “स्वेच्छा से चोट पहुँचाना” कहा जाता है।
(2) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या दस हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ें: BNS §115(1)(2) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या दस हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
