पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 249 अब BNS धारा 178 है
धारा 249 - इस आशय से भारतीय सिक्के का रूप परिवर्तित करना कि वह भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में चल जाए
पुराना कानून
IPC §249
धारा 249 - इस आशय से भारतीय सिक्के का रूप परिवर्तित करना कि वह भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में चल जाए
इस आशय से भारतीय सिक्के का रूप परिवर्तित करना कि वह भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में चल जाए
जो कोई किसी भारतीय सिक्के पर इस आशय से कि वह सिक्का भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में चल जाए, कोई ऐसी क्रिया करेगा, जिससे उस सिक्के का रूप परिवर्तित हो जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
पूरा पढ़ें: IPC §249जो कोई किसी भारतीय सिक्के पर इस आशय से कि वह सिक्का भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में चल जाए, कोई ऐसी क्रिया करेगा, जिससे उस सिक्के का रूप परिवर्तित हो जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
नया कानून
BNS §178
नकली सिक्के, सरकारी डाक टिकट, करेंसी नोट या बैंक नोट बनाना।
जो कोई भी सरकार द्वारा राजस्व के उद्देश्य से जारी किए गए किसी भी सिक्के, स्टाम्प, करेंसी नोट या बैंक नोट की जालसाजी करता है, या जानबूझकर जालसाजी की प्रक्रिया के किसी भी भाग को अंजाम देता है, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
स्पष्टीकरण.—इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,—
(1) “बैंक-नोट” अभिव्यक्ति का अर्थ है किसी भी व्यक्ति द्वारा जारी किया गया, जो विश्व के किसी भी भाग में बैंकिंग व्यवसाय करता हो, या किसी राज्य या संप्रभु शक्ति द्वारा या उसके अधिकार के तहत जारी किया गया हो, और जिसका उद्देश्य धन के समतुल्य या धन के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाना हो;
(2) “सिक्का” का वही अर्थ होगा जो इसे मुद्रा अधिनियम, 2011 (11 ऑफ 2011) की धारा 2 में दिया गया है और इसमें धातु शामिल है जो उस समय मुद्रा के रूप में उपयोग की जाती है और किसी राज्य या संप्रभु शक्ति द्वारा या उसके अधिकार के तहत इस प्रकार उपयोग किए जाने के लिए मुहरबंद और जारी की जाती है;
(3) कोई व्यक्ति “सरकारी स्टाम्प की जालसाजी” का अपराध करता है, जो एक मूल्यवर्ग के असली स्टाम्प को दूसरे मूल्यवर्ग के असली स्टाम्प की तरह दिखाकर जालसाजी करता है; (4) कोई व्यक्ति नकली सिक्का बनाने का अपराध करता है, यदि वह धोखाधड़ी करने के इरादे से, या यह जानते हुए कि इससे धोखाधड़ी होने की संभावना है, किसी असली सिक्के को दूसरे सिक्के जैसा बना देता है; और
(5) “सिक्के की जालसाजी” के अपराध में वजन कम करना या संरचना में परिवर्तन करना या सिक्के की दिखावट में परिवर्तन करना शामिल है।
पूरा पढ़ें: BNS §178स्पष्टीकरण.—इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,—
(1) “बैंक-नोट” अभिव्यक्ति का अर्थ है किसी भी व्यक्ति द्वारा जारी किया गया, जो विश्व के किसी भी भाग में बैंकिंग व्यवसाय करता हो, या किसी राज्य या संप्रभु शक्ति द्वारा या उसके अधिकार के तहत जारी किया गया हो, और जिसका उद्देश्य धन के समतुल्य या धन के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाना हो;
(2) “सिक्का” का वही अर्थ होगा जो इसे मुद्रा अधिनियम, 2011 (11 ऑफ 2011) की धारा 2 में दिया गया है और इसमें धातु शामिल है जो उस समय मुद्रा के रूप में उपयोग की जाती है और किसी राज्य या संप्रभु शक्ति द्वारा या उसके अधिकार के तहत इस प्रकार उपयोग किए जाने के लिए मुहरबंद और जारी की जाती है;
(3) कोई व्यक्ति “सरकारी स्टाम्प की जालसाजी” का अपराध करता है, जो एक मूल्यवर्ग के असली स्टाम्प को दूसरे मूल्यवर्ग के असली स्टाम्प की तरह दिखाकर जालसाजी करता है; (4) कोई व्यक्ति नकली सिक्का बनाने का अपराध करता है, यदि वह धोखाधड़ी करने के इरादे से, या यह जानते हुए कि इससे धोखाधड़ी होने की संभावना है, किसी असली सिक्के को दूसरे सिक्के जैसा बना देता है; और
(5) “सिक्के की जालसाजी” के अपराध में वजन कम करना या संरचना में परिवर्तन करना या सिक्के की दिखावट में परिवर्तन करना शामिल है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
