पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 211 अब BNS धारा 248 है
धारा 211 - क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप
पुराना कानून
IPC §211
धारा 211 - क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप
क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप
जो कोई किसी व्यक्ति को यह जानते हुए कि उस व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी कार्यवाही या आरोप के लिए कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है क्षति कारित करने के आशय से उस व्यक्ति के विरुद्ध कोई दांडिक कार्यवाही संस्थित करेगा या करवाएगा या उस व्यक्ति पर मिथ्या आरोप लगाएगा कि उसने अपराध किया है वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ;
तथा ऐसी दांडिक कार्यवाही मॄत्यु, आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध के मिथ्या आरोप पर संस्थित की जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
पूरा पढ़ें: IPC §211जो कोई किसी व्यक्ति को यह जानते हुए कि उस व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी कार्यवाही या आरोप के लिए कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है क्षति कारित करने के आशय से उस व्यक्ति के विरुद्ध कोई दांडिक कार्यवाही संस्थित करेगा या करवाएगा या उस व्यक्ति पर मिथ्या आरोप लगाएगा कि उसने अपराध किया है वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ;
तथा ऐसी दांडिक कार्यवाही मॄत्यु, आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध के मिथ्या आरोप पर संस्थित की जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
नया कानून
BNS §248
धारा 248. क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप ।
248. जो कोई किसी व्यक्ति को यह जानते हुए कि उस व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी कार्यवाही या आरोप के लिए कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है क्षति कारित करने कै आशय से उस व्यक्ति के विरूद्ध कोई दांडिक कार्यवाही संस्थित करेगा या करवाएगा या उस व्यक्ति पर मिथ्या आरोप लगाएगा कि उसने अपराध किया है-- (क) वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या दो लाख रुपए तक के जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ; (ख) ऐसी दांडिक कार्यवाही मृत्यु, आजीवन कारावास या दस वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध के मिथ्या आरोप पर संस्थित की जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
पूरा पढ़ें: BNS §2481 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
