पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 182 अब BNS धारा 217 है
धारा 182 - इस आशय से मिथ्या इत्तिला देना कि लोक सेवक अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति की क्षति के लिए करे
पुराना कानून
IPC §182
धारा 182 - इस आशय से मिथ्या इत्तिला देना कि लोक सेवक अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति की क्षति के लिए करे
इस आशय से मिथ्या इत्तिला देना कि लोक सेवक अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति की क्षति के लिए करे
जो कोई किसी लोक सेवक को कोई ऐसी इत्तिला देगा, जिसका मिथ्या होना वह जानता है या विश्वास करता है, इस आशय से कि तद्द्वारा वह ऐसे लोक सेवक से यह कराए, या यह जानते हुए कि तद्द्वारा वह ऐसे लोक सेवक से यह कराएगा यह सम्भाव्य है, कि वह लोक सेवक -
(क) कोई ऐसी बात करे, या ऐसी किसी बात का लोप करे, जो उस लोक सेवक को नहीं करनी चाहिए या जिसका लोप उसे नहीं करना चाहिए, यदि उन तथ्यों की सही स्थिति, जिनके बारे में ऐसी इत्तिला दी गई है, उसे ज्ञात होती, अथवा
(ख) ऐसे लोक सेवक की विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग किसी व्यक्ति की क्षति या क्षोभ के लिए करे,
वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
दृष्टांत :
(क) क, एक मजिस्ट्रेट को यह इत्तिला देता है कि य, जो ऐसे मजिस्ट्रेट का अधीनस्थ पुलिस आफिसर है, कर्तव्य की उपेक्षा या अवचार का दोषी रहा है, यह जानते हुए कि ऐसी इत्तिला मिथ्या है, और यह जानते हुए कि यह सम्भाव्य है कि उस इत्तिला से मजिस्ट्रेट य को पदच्युत कर देगा । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
(ख) क, एक लोक सेवक को यह मिथ्या इत्तिला देता है कि य के पास एक गुप्त स्थान में प्रतिषिद्ध नमक है, यह जानते हुए कि ऐसी इत्तिला मिथ्या है, और यह जानते हुए कि यह सम्भाव्य है कि उस इत्तिला का परिणाम य के परिसर की तलाशी होगी, जिससे य को क्षोभ होगा । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
(ग) क, एक पुलिस वाले को यह मिथ्या इत्तिला देता है कि किसी विशिष्ट ग्राम के पड़ोस में उस पर हमला किया गया है और उसे लूट लिया गया है । वह अपने हमलावरों में से किसी का नाम नहीं बताता, किन्तु यह जानता है कि यह सम्भाव्य है कि इस इत्तिला के परिणामस्वरूप पुलिस उस ग्राम में जांच करेगी और तलाशियां लेगी, जिससे ग्रामवासियों को या उनमें से कुछ को क्षोभ होगा । क ने इस धारा के अधीन अपराध किया है ।
पूरा पढ़ें: IPC §182जो कोई किसी लोक सेवक को कोई ऐसी इत्तिला देगा, जिसका मिथ्या होना वह जानता है या विश्वास करता है, इस आशय से कि तद्द्वारा वह ऐसे लोक सेवक से यह कराए, या यह जानते हुए कि तद्द्वारा वह ऐसे लोक सेवक से यह कराएगा यह सम्भाव्य है, कि वह लोक सेवक -
(क) कोई ऐसी बात करे, या ऐसी किसी बात का लोप करे, जो उस लोक सेवक को नहीं करनी चाहिए या जिसका लोप उसे नहीं करना चाहिए, यदि उन तथ्यों की सही स्थिति, जिनके बारे में ऐसी इत्तिला दी गई है, उसे ज्ञात होती, अथवा
(ख) ऐसे लोक सेवक की विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग किसी व्यक्ति की क्षति या क्षोभ के लिए करे,
वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
दृष्टांत :
(क) क, एक मजिस्ट्रेट को यह इत्तिला देता है कि य, जो ऐसे मजिस्ट्रेट का अधीनस्थ पुलिस आफिसर है, कर्तव्य की उपेक्षा या अवचार का दोषी रहा है, यह जानते हुए कि ऐसी इत्तिला मिथ्या है, और यह जानते हुए कि यह सम्भाव्य है कि उस इत्तिला से मजिस्ट्रेट य को पदच्युत कर देगा । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
(ख) क, एक लोक सेवक को यह मिथ्या इत्तिला देता है कि य के पास एक गुप्त स्थान में प्रतिषिद्ध नमक है, यह जानते हुए कि ऐसी इत्तिला मिथ्या है, और यह जानते हुए कि यह सम्भाव्य है कि उस इत्तिला का परिणाम य के परिसर की तलाशी होगी, जिससे य को क्षोभ होगा । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
(ग) क, एक पुलिस वाले को यह मिथ्या इत्तिला देता है कि किसी विशिष्ट ग्राम के पड़ोस में उस पर हमला किया गया है और उसे लूट लिया गया है । वह अपने हमलावरों में से किसी का नाम नहीं बताता, किन्तु यह जानता है कि यह सम्भाव्य है कि इस इत्तिला के परिणामस्वरूप पुलिस उस ग्राम में जांच करेगी और तलाशियां लेगी, जिससे ग्रामवासियों को या उनमें से कुछ को क्षोभ होगा । क ने इस धारा के अधीन अपराध किया है ।
नया कानून
BNS §217
किसी लोक सेवक को उसकी वैध शक्ति का दुरुपयोग करके किसी अन्य व्यक्ति को हानि पहुंचाने के इरादे से झूठी सूचना देना।
जो कोई भी किसी लोक सेवक को ऐसी कोई जानकारी देता है जिसे वह जानता हो या मानता हो कि वह झूठी है, और ऐसा करने का उसका इरादा हो, या यह जानते हुए कि ऐसा करने से ऐसे लोक सेवक को झूठी सूचना मिलने की संभावना है—
(क) ऐसा कोई कार्य करना या न करना जो ऐसे लोक सेवक को नहीं करना चाहिए था या नहीं करना चाहिए था यदि उसे उस जानकारी से संबंधित तथ्यों की सही स्थिति ज्ञात होती; या
(ख) किसी व्यक्ति को हानि पहुँचाने या उसे परेशान करने के लिए ऐसे लोक सेवक की वैध शक्ति का प्रयोग करना,
इस अपराध के लिए एक वर्ष तक की किसी भी प्रकार की कारावास की सजा, या दस हजार रुपये तक का जुर्माना, या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।
चित्र।
(क) यदि ए किसी मजिस्ट्रेट को यह सूचना देता है कि जेड, जो उस मजिस्ट्रेट के अधीन एक पुलिस अधिकारी है, कर्तव्य की उपेक्षा या कदाचार का दोषी है, और ए यह जानता है कि यह सूचना झूठी है तथा यह भी जानता है कि इस सूचना के कारण मजिस्ट्रेट जेड को बर्खास्त कर सकता है, तो ए ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
(ख) यदि कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक को यह झूठी सूचना देता है कि जेड ने किसी गुप्त स्थान पर अवैध नमक रखा है, और वह जानता है कि यह सूचना झूठी है, तथा यह भी जानता है कि इस सूचना के परिणामस्वरूप जेड के परिसर की तलाशी ली जाएगी, जिससे जेड को असुविधा होगी, तो ए ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
(ग) यदि कोई व्यक्ति किसी पुलिसकर्मी को झूठी सूचना देता है कि उस पर किसी विशेष गाँव के आसपास हमला किया गया और उसे लूट लिया गया। वह हमलावरों में से किसी का नाम नहीं बताता, लेकिन जानता है कि इस सूचना के परिणामस्वरूप पुलिस गाँव में पूछताछ करेगी और तलाशी अभियान चलाएगी, जिससे ग्रामीणों या उनमें से कुछ को असुविधा होगी। ऐसे व्यक्ति ने इस धारा के अंतर्गत अपराध किया है।
पूरा पढ़ें: BNS §217(क) ऐसा कोई कार्य करना या न करना जो ऐसे लोक सेवक को नहीं करना चाहिए था या नहीं करना चाहिए था यदि उसे उस जानकारी से संबंधित तथ्यों की सही स्थिति ज्ञात होती; या
(ख) किसी व्यक्ति को हानि पहुँचाने या उसे परेशान करने के लिए ऐसे लोक सेवक की वैध शक्ति का प्रयोग करना,
इस अपराध के लिए एक वर्ष तक की किसी भी प्रकार की कारावास की सजा, या दस हजार रुपये तक का जुर्माना, या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।
चित्र।
(क) यदि ए किसी मजिस्ट्रेट को यह सूचना देता है कि जेड, जो उस मजिस्ट्रेट के अधीन एक पुलिस अधिकारी है, कर्तव्य की उपेक्षा या कदाचार का दोषी है, और ए यह जानता है कि यह सूचना झूठी है तथा यह भी जानता है कि इस सूचना के कारण मजिस्ट्रेट जेड को बर्खास्त कर सकता है, तो ए ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
(ख) यदि कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक को यह झूठी सूचना देता है कि जेड ने किसी गुप्त स्थान पर अवैध नमक रखा है, और वह जानता है कि यह सूचना झूठी है, तथा यह भी जानता है कि इस सूचना के परिणामस्वरूप जेड के परिसर की तलाशी ली जाएगी, जिससे जेड को असुविधा होगी, तो ए ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
(ग) यदि कोई व्यक्ति किसी पुलिसकर्मी को झूठी सूचना देता है कि उस पर किसी विशेष गाँव के आसपास हमला किया गया और उसे लूट लिया गया। वह हमलावरों में से किसी का नाम नहीं बताता, लेकिन जानता है कि इस सूचना के परिणामस्वरूप पुलिस गाँव में पूछताछ करेगी और तलाशी अभियान चलाएगी, जिससे ग्रामीणों या उनमें से कुछ को असुविधा होगी। ऐसे व्यक्ति ने इस धारा के अंतर्गत अपराध किया है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
