पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 177 अब BNS धारा 212 है
धारा 177 - मिथ्या इत्तिला देना
पुराना कानून
IPC §177
धारा 177 - मिथ्या इत्तिला देना
मिथ्या इत्तिला देना
जो कोई किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते, किसी विषय पर इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उस विषय पर ऐसी इत्तिला सच्ची के रूप में देगा, जिसका मिथ्या होना वह जानता है या जिसके मिथ्या होने का विश्वास करने का कारण रखता है, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,
अथवा, यदि वह इत्तिला, जिसे देने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध है, किसी अपराध के किए जाने के विषय में हो, या किसी अपराध के किए जाने का निवारण करने के प्रयोजन से या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए अपेक्षित हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से,
दण्डित किया जाएगा ।
दृष्टांत :
(क) क, एक भूधारी, अपनी जागीर की सीमाओं के भीतर हत्या किया जाना जानते हुए, जिले के मजिस्ट्रेट को साशय यह मिथ्या इत्तिला देता है कि वह मृत्यु सांप के काटने के परिणामस्वरूप दुर्घटना से हुई है । क इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है ।
(ख) क, एक ग्राम चौकीदार, यह जानते हुए कि अजनबियों का एक बड़ा गिरोह पड़ोस के स्थान में रहने वाले य नामक धनी व्यापारी के घर में डकैती करने के लिए उसके ग्राम से होकर गुजरा है, और बंगाल संहिता के विनियम 3, 1821 की धारा 7 के खंड 5 के अधीन उपर्युक्त तथ्य की शीघ्र और यथासमय इत्तिला निकटतम पुलिस थाने के आफिसर को देने के लिए आबद्ध होते हुए, पुलिस आफिसर को साशय यह मिथ्या इत्तिला देता है कि संदिग्ध व्यक्तियों का एक गिरोह भिन्न दिशा में किसी दूरवर्ती स्थान में डकैती करने की दृष्टि से उस ग्राम से होकर गुजरा है । यहां क इस धारा के पिछले भाग में परिभाषित अपराध का दोषी है ।
स्पष्टीकरण - धारा 176 में और इस धारा में “अपराध” शब्द के अन्तर्गत भारत से बाहर किसी स्थान में किया गया ऐसा कोई भी कार्य आता है, जो यदि भारत में किया जाता, तो निम्नलिखित धाराओं में से किसी के अधीन दण्डनीय होता, अर्थात् धारा 302, 304, 382, 392, 393, 394, 395, 396, 397, 398, 399, 402, 435, 436, 449, 450, 457, 458, 459 और 460 ; और “अपराधी” शब्द के अन्तर्गत ऐसा कोई भी व्यक्ति आता है, जिसके बारे में यह अभिकथन हो कि वह ऐसे किसी कार्य का दोषी रहा है ।
पूरा पढ़ें: IPC §177जो कोई किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते, किसी विषय पर इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उस विषय पर ऐसी इत्तिला सच्ची के रूप में देगा, जिसका मिथ्या होना वह जानता है या जिसके मिथ्या होने का विश्वास करने का कारण रखता है, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,
अथवा, यदि वह इत्तिला, जिसे देने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध है, किसी अपराध के किए जाने के विषय में हो, या किसी अपराध के किए जाने का निवारण करने के प्रयोजन से या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए अपेक्षित हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से,
दण्डित किया जाएगा ।
दृष्टांत :
(क) क, एक भूधारी, अपनी जागीर की सीमाओं के भीतर हत्या किया जाना जानते हुए, जिले के मजिस्ट्रेट को साशय यह मिथ्या इत्तिला देता है कि वह मृत्यु सांप के काटने के परिणामस्वरूप दुर्घटना से हुई है । क इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है ।
(ख) क, एक ग्राम चौकीदार, यह जानते हुए कि अजनबियों का एक बड़ा गिरोह पड़ोस के स्थान में रहने वाले य नामक धनी व्यापारी के घर में डकैती करने के लिए उसके ग्राम से होकर गुजरा है, और बंगाल संहिता के विनियम 3, 1821 की धारा 7 के खंड 5 के अधीन उपर्युक्त तथ्य की शीघ्र और यथासमय इत्तिला निकटतम पुलिस थाने के आफिसर को देने के लिए आबद्ध होते हुए, पुलिस आफिसर को साशय यह मिथ्या इत्तिला देता है कि संदिग्ध व्यक्तियों का एक गिरोह भिन्न दिशा में किसी दूरवर्ती स्थान में डकैती करने की दृष्टि से उस ग्राम से होकर गुजरा है । यहां क इस धारा के पिछले भाग में परिभाषित अपराध का दोषी है ।
स्पष्टीकरण - धारा 176 में और इस धारा में “अपराध” शब्द के अन्तर्गत भारत से बाहर किसी स्थान में किया गया ऐसा कोई भी कार्य आता है, जो यदि भारत में किया जाता, तो निम्नलिखित धाराओं में से किसी के अधीन दण्डनीय होता, अर्थात् धारा 302, 304, 382, 392, 393, 394, 395, 396, 397, 398, 399, 402, 435, 436, 449, 450, 457, 458, 459 और 460 ; और “अपराधी” शब्द के अन्तर्गत ऐसा कोई भी व्यक्ति आता है, जिसके बारे में यह अभिकथन हो कि वह ऐसे किसी कार्य का दोषी रहा है ।
नया कानून
BNS §212
गलत जानकारी देना।
जो कोई भी, किसी लोक सेवक को किसी विषय पर सूचना प्रदान करने के लिए विधिवत बाध्य होते हुए, उस विषय पर ऐसी सूचना को सत्य बताकर प्रस्तुत करता है जिसे वह जानता है या जिसके असत्य होने का उसे विश्वास करने का कारण है,—
(क) उसे छह महीने तक की साधारण कारावास की सजा, या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा, या दोनों से दंडित किया जाएगा;
(ख) जहां वह जानकारी जो उसे कानूनी रूप से देने के लिए बाध्य है, किसी अपराध के घटित होने से संबंधित है, या किसी अपराध के घटित होने को रोकने के उद्देश्य से, या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए आवश्यक है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
चित्र।
(क) यदि कोई भूस्वामी 'ए' अपनी जागीर की सीमा के भीतर हुई हत्या के बारे में जानता है, और जानबूझकर जिले के मजिस्ट्रेट को यह गलत सूचना देता है कि मृत्यु सांप के काटने से हुई दुर्घटना है, तो 'ए' इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।
(ख) ए, जो एक ग्राम चौकीदार है, यह जानते हुए कि उसके गाँव से होकर बड़ी संख्या में अजनबी लोग पास के ही एक स्थान पर रहने वाले धनी व्यापारी जेड के घर में डकैती करने के इरादे से गुजरे हैं, और विधिवत रूप से इस तथ्य की शीघ्र और समय पर सूचना निकटतम पुलिस स्टेशन के अधिकारी को देने के लिए बाध्य होने के बावजूद, जानबूझकर पुलिस अधिकारी को गलत सूचना देता है कि संदिग्ध व्यक्तियों का एक समूह किसी दूर स्थित स्थान पर डकैती करने के इरादे से गाँव से गुजरा है। यहाँ ए इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।
स्पष्टीकरण.—धारा 211 और इस धारा में “अपराध” शब्द में भारत के बाहर किसी स्थान पर किया गया कोई भी ऐसा कार्य शामिल है, जो यदि भारत में किया जाता, तो निम्नलिखित धाराओं में से किसी के तहत दंडनीय होता, अर्थात् धारा 103, 105, 307, धारा 309 की उपधारा (2), (3) और (4), धारा 310, 311, 312 की उपधारा (2), (3), (4) और (5), धारा 326 के खंड (एफ) और (जी), धारा 331 की उपधारा (4), (6), (7) और (8), धारा 332 के खंड (ए) और (बी) और “अपराधी” शब्द में ऐसा कोई भी व्यक्ति शामिल है जिस पर ऐसे किसी कार्य का दोषी होने का आरोप लगाया गया हो।
पूरा पढ़ें: BNS §212(क) उसे छह महीने तक की साधारण कारावास की सजा, या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा, या दोनों से दंडित किया जाएगा;
(ख) जहां वह जानकारी जो उसे कानूनी रूप से देने के लिए बाध्य है, किसी अपराध के घटित होने से संबंधित है, या किसी अपराध के घटित होने को रोकने के उद्देश्य से, या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए आवश्यक है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
चित्र।
(क) यदि कोई भूस्वामी 'ए' अपनी जागीर की सीमा के भीतर हुई हत्या के बारे में जानता है, और जानबूझकर जिले के मजिस्ट्रेट को यह गलत सूचना देता है कि मृत्यु सांप के काटने से हुई दुर्घटना है, तो 'ए' इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।
(ख) ए, जो एक ग्राम चौकीदार है, यह जानते हुए कि उसके गाँव से होकर बड़ी संख्या में अजनबी लोग पास के ही एक स्थान पर रहने वाले धनी व्यापारी जेड के घर में डकैती करने के इरादे से गुजरे हैं, और विधिवत रूप से इस तथ्य की शीघ्र और समय पर सूचना निकटतम पुलिस स्टेशन के अधिकारी को देने के लिए बाध्य होने के बावजूद, जानबूझकर पुलिस अधिकारी को गलत सूचना देता है कि संदिग्ध व्यक्तियों का एक समूह किसी दूर स्थित स्थान पर डकैती करने के इरादे से गाँव से गुजरा है। यहाँ ए इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।
स्पष्टीकरण.—धारा 211 और इस धारा में “अपराध” शब्द में भारत के बाहर किसी स्थान पर किया गया कोई भी ऐसा कार्य शामिल है, जो यदि भारत में किया जाता, तो निम्नलिखित धाराओं में से किसी के तहत दंडनीय होता, अर्थात् धारा 103, 105, 307, धारा 309 की उपधारा (2), (3) और (4), धारा 310, 311, 312 की उपधारा (2), (3), (4) और (5), धारा 326 के खंड (एफ) और (जी), धारा 331 की उपधारा (4), (6), (7) और (8), धारा 332 के खंड (ए) और (बी) और “अपराधी” शब्द में ऐसा कोई भी व्यक्ति शामिल है जिस पर ऐसे किसी कार्य का दोषी होने का आरोप लगाया गया हो।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
