पुराना कानून
IPC §17
सरकार''।
1 [17 “सरकार”। --“सरकार” शब्द केंद्र सरकार या किसी राज्य की सरकार को दर्शाता है।]
पूरा पढ़ें: IPC §17नया कानून
BNS §2(12)
परिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,---
(1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है;
(2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है;
(3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है;
(4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी वस्तु को दूसरी वस्तु के समान बनाता है, उस समानता के माध्यम से धोखा देने के इरादे से, या यह जानते हुए कि इससे धोखा होने की संभावना है।
स्पष्टीकरण 1.---नकली वस्तु बनाने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि नकल हूबहू हो।
स्पष्टीकरण 2.---जब कोई व्यक्ति किसी एक वस्तु को दूसरी वस्तु के समान बनाता है, और समानता ऐसी होती है कि कोई व्यक्ति उससे धोखा खा सकता है, तो जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, यह माना जाएगा कि किसी वस्तु को दूसरी वस्तु के समान बनाने वाले व्यक्ति का इरादा उस समानता के माध्यम से धोखा देना था या उसे पता था कि इससे धोखा होने की संभावना है;
(5) "न्यायालय" से तात्पर्य ऐसे न्यायाधीश से है जिसे कानून द्वारा अकेले न्यायिक रूप से कार्य करने का अधिकार प्राप्त है, या न्यायाधीशों के ऐसे निकाय से है जिसे कानून द्वारा एक निकाय के रूप में न्यायिक रूप से कार्य करने का अधिकार प्राप्त है, जब ऐसा न्यायाधीश या न्यायाधीशों का निकाय न्यायिक रूप से कार्य कर रहा हो;
(6) "मृत्यु" से तात्पर्य किसी मनुष्य की मृत्यु से है, जब तक कि संदर्भ से इसके विपरीत स्पष्ट न हो;
(7) "बेईमानी से" का अर्थ है किसी व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुँचाने या किसी अन्य व्यक्ति को अनुचित हानि पहुँचाने के इरादे से कोई कार्य करना;
(8) "दस्तावेज़" से तात्पर्य किसी पदार्थ पर अक्षरों, अंकों या चिह्नों के माध्यम से या इनमें से एक से अधिक माध्यमों से व्यक्त या वर्णित किसी भी विषय वस्तु से है, और इसमें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं, जिनका उपयोग उस विषय वस्तु के साक्ष्य के रूप में किया जाना है, या किया जा सकता है।
स्पष्टीकरण 1.---यह अप्रासंगिक है कि अक्षर, अंक या चिह्न किस साधन से या किस पदार्थ पर बने हैं, या साक्ष्य न्यायालय के लिए अभिप्रेत है या न्यायालय में उपयोग किया जा सकता है या नहीं।
(क) अनुबंध की शर्तों को व्यक्त करने वाला कोई लिखित दस्तावेज, जिसका उपयोग अनुबंध के साक्ष्य के रूप में किया जा सकता है, एक दस्तावेज कहलाता है।
(ख) बैंकर पर दिया गया चेक एक दस्तावेज है।
(सी) पावर ऑफ अटॉर्नी एक दस्तावेज है।
(घ) ऐसा नक्शा या योजना जिसका उपयोग साक्ष्य के रूप में किया जाना है या जिसका उपयोग साक्ष्य के रूप में किया जा सकता है, एक दस्तावेज है।
(ई) निर्देश या हिदायतें युक्त कोई लेखन एक दस्तावेज है।
स्पष्टीकरण 2.---व्यापारिक या अन्य उपयोग के अनुसार अक्षरों, अंकों या चिह्नों के माध्यम से जो कुछ भी व्यक्त किया जाता है, उसे इस धारा के अर्थ के अंतर्गत ऐसे अक्षरों, अंकों या चिह्नों द्वारा व्यक्त किया गया माना जाएगा, भले ही वह वास्तव में व्यक्त न किया गया हो।
चित्रण .
A अपने नाम से एक विनिमय पत्र के पीछे अपना नाम लिखता है, जो उसके नाम पर देय है। व्यापारिक नियमों के अनुसार, इस पृष्ठांकन का अर्थ यह है कि पत्र धारक को भुगतान किया जाना है। पृष्ठांकन एक दस्तावेज़ है, और इसका अर्थ उसी प्रकार लगाया जाएगा जैसे कि हस्ताक्षर के ऊपर "धारक को भुगतान करें" या इसी तरह के शब्द लिखे गए हों।
(9) "धोखाधड़ी से" का अर्थ है धोखाधड़ी करने के इरादे से कुछ करना, अन्यथा नहीं;
(10) "लिंग".---सर्वनाम "वह" और इसके व्युत्पन्न किसी भी व्यक्ति के लिए प्रयोग किए जाते हैं, चाहे वह पुरुष हो, महिला हो या ट्रांसजेंडर हो।
स्पष्टीकरण .--- "ट्रांसजेंडर" का वही अर्थ होगा जो ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 (2019 का 40) की धारा 2 के खंड (k) में दिया गया है;
(11) "सद्भावना".---कोई भी कार्य या विश्वास "सद्भावना" से किया गया या माना गया नहीं कहा जाता है जो उचित सावधानी और ध्यान के बिना किया गया हो;
(12) "सरकार" से तात्पर्य केंद्र सरकार या राज्य सरकार से है;
(13) "आश्रय" में किसी व्यक्ति को आश्रय, भोजन, पेय, धन, कपड़े, हथियार, गोला-बारूद या परिवहन के साधन उपलब्ध कराना, या किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार से, चाहे वह इस खंड में सूचीबद्ध साधनों के समान हो या नहीं, गिरफ्तारी से बचने में सहायता करना शामिल है;
(14) "चोट" से तात्पर्य किसी व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, प्रतिष्ठा या संपत्ति में अवैध रूप से पहुँचाई गई किसी भी प्रकार की हानि से है;
(15) "अवैध" और "कानूनी रूप से करने के लिए बाध्य".--- "अवैध" शब्द हर उस चीज़ पर लागू होता है जो अपराध है या जो कानून द्वारा निषिद्ध है, या जो दीवानी कार्रवाई का आधार प्रदान करती है; और किसी व्यक्ति को "कानूनी रूप से करने के लिए बाध्य" कहा जाता है, वह कुछ भी जिसे न करना उसके लिए अवैध है;
(16) "न्यायाधीश" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसे आधिकारिक तौर पर न्यायाधीश के रूप में नामित किया गया है और इसमें वह व्यक्ति भी शामिल है, ---
(i) जो किसी भी कानूनी कार्यवाही, चाहे वह दीवानी हो या आपराधिक, में अंतिम निर्णय देने के लिए, या ऐसा निर्णय देने के लिए, जिसके विरुद्ध अपील न की जाए तो वह अंतिम होगा, या ऐसा निर्णय देने के लिए, जिसे किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा पुष्टि किए जाने पर वह अंतिम होगा, कानून द्वारा सशक्त है; या
(ii) जो किसी निकाय या व्यक्तियों में से एक है, और वह निकाय या व्यक्ति कानून द्वारा ऐसा निर्णय देने के लिए सशक्त है।
चित्रण .
किसी ऐसे आरोप के संबंध में अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने वाला मजिस्ट्रेट, जिसके संबंध में उसे अपील के साथ या बिना अपील के जुर्माना या कारावास की सजा देने का अधिकार है, न्यायाधीश कहलाता है;
(17) "जीवन" से तात्पर्य मनुष्य के जीवन से है, जब तक कि संदर्भ से इसके विपरीत स्पष्ट न हो;
(18) "स्थानीय कानून" से तात्पर्य भारत के किसी विशेष भाग पर ही लागू होने वाले कानून से है;
(19) "मनुष्य" से तात्पर्य किसी भी आयु के पुरुष मानव से है;
(20) "माह" और "वर्ष".---जहाँ कहीं भी "माह" या "वर्ष" शब्द का प्रयोग किया गया हो, यह समझा जाना चाहिए कि माह या वर्ष की गणना ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार की जाएगी;
(21) "चल संपत्ति" में हर प्रकार की संपत्ति शामिल है, सिवाय भूमि और पृथ्वी से जुड़ी वस्तुओं या पृथ्वी से स्थायी रूप से जुड़ी किसी वस्तु के;
(22) "संख्या".---जब तक संदर्भ से इसके विपरीत न प्रतीत हो, एकवचन संख्या को दर्शाने वाले शब्दों में बहुवचन संख्या भी शामिल होती है, और बहुवचन संख्या को दर्शाने वाले शब्दों में एकवचन संख्या भी शामिल होती है;
(23) "शपथ" में कानून द्वारा शपथ के स्थान पर प्रतिस्थापित की गई गंभीर प्रतिज्ञा और किसी लोक सेवक के समक्ष कानून द्वारा आवश्यक या अधिकृत कोई घोषणा या न्यायालय में हो या न हो, प्रमाण के उद्देश्य से उपयोग की जाने वाली कोई घोषणा शामिल है;
(24) "अपराध".---उपधारा (क) और (ख) में उल्लिखित अध्यायों एवं खंडों को छोड़कर, "अपराध" शब्द का अर्थ इस संहिता द्वारा दंडनीय बनाया गया कोई भी कार्य है, परन्तु---
(क) अध्याय तृतीय में और निम्नलिखित धाराओं में, अर्थात् धारा 8 की उपधारा (2), (3), (4) और (5), धारा 9, 49, 50, 52, 54, 55, 56, 57, 58, 59, 60, 61, 119, 120, 123, धारा 127, 222, 230, 231, 240, 248, 250, 251, 259, 260, 261, 262, 263 की उपधारा (7) और (8), धारा 308 की उपधारा (6) और (7) और धारा 330 की उपधारा (2) में, 'अपराध' शब्द का अर्थ इस संहिता के तहत या किसी विशेष कानून या स्थानीय कानून के तहत दंडनीय वस्तु है; और
(ख) धारा 189 की उपधारा (1), धारा 211, 212, 238, 239, 249, 253 और धारा 329 की उपधारा (1) में, "अपराध" शब्द का वही अर्थ होगा जब विशेष कानून या स्थानीय कानून के तहत दंडनीय कार्य ऐसे कानून के तहत छह महीने या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय हो, चाहे जुर्माना सहित हो या बिना जुर्माना के;
(25) "लोप" से एक ही लोप के साथ-साथ कई लोपों की श्रृंखला भी तात्पर्य है;
(26) "व्यक्ति" में कोई कंपनी या संघ या व्यक्तियों का समूह शामिल है, चाहे वह निगमित हो या नहीं;
(27) "सार्वजनिक" में जनता का कोई वर्ग या कोई समुदाय शामिल है;
(28) "लोक सेवक" से तात्पर्य निम्नलिखित विवरणों में से किसी एक के अंतर्गत आने वाले व्यक्ति से है, अर्थात्:---
(क) सेना, नौसेना या वायु सेना में प्रत्येक कमीशन प्राप्त अधिकारी;
(ख) प्रत्येक न्यायाधीश, जिसमें कोई भी व्यक्ति शामिल है जिसे कानून द्वारा किसी भी न्यायिक कार्य को स्वयं या किसी निकाय के सदस्य के रूप में करने का अधिकार दिया गया है;
(ग) न्यायालय का प्रत्येक अधिकारी, जिसमें परिसमापक, रिसीवर या आयुक्त शामिल हैं, जिसका कर्तव्य किसी विधि या तथ्य के मामले की जांच करना या उस पर रिपोर्ट देना, या किसी दस्तावेज को बनाना, प्रमाणित करना या रखना, या किसी संपत्ति का प्रभार लेना या उसका निपटान करना, या किसी न्यायिक प्रक्रिया को निष्पादित करना, या किसी शपथ को दिलाना, या व्याख्या करना, या न्यायालय में व्यवस्था बनाए रखना है, और न्यायालय द्वारा विशेष रूप से ऐसे किसी कर्तव्य को निभाने के लिए अधिकृत प्रत्येक व्यक्ति;
(घ) न्यायालय या लोक सेवक की सहायता करने वाला प्रत्येक निर्धारक या पंचायत सदस्य;
(ई) प्रत्येक मध्यस्थ या अन्य व्यक्ति जिसे किसी न्यायालय या किसी अन्य सक्षम सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा निर्णय या रिपोर्ट के लिए कोई मामला या विषय संदर्भित किया गया हो;
(f) प्रत्येक व्यक्ति जो किसी ऐसे पद का धारक है जिसके आधार पर उसे किसी व्यक्ति को कारावास में रखने या कैद करने का अधिकार प्राप्त है;
(जी) सरकार का प्रत्येक अधिकारी जिसका कर्तव्य, ऐसे अधिकारी के रूप में, अपराधों को रोकना, अपराधों की सूचना देना, अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाना, या सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा या सुविधा की रक्षा करना है;
(h) प्रत्येक अधिकारी जिसका कर्तव्य है कि वह अधिकारी के रूप में सरकार की ओर से किसी संपत्ति को ले, प्राप्त करे, रखे या खर्च करे, या सरकार की ओर से कोई सर्वेक्षण, मूल्यांकन या अनुबंध करे, या कोई राजस्व प्रक्रिया निष्पादित करे, या सरकार के वित्तीय हितों को प्रभावित करने वाले किसी मामले की जांच करे या उस पर रिपोर्ट दे, या सरकार के वित्तीय हितों से संबंधित कोई दस्तावेज बनाए, प्रमाणित करे या रखे, या सरकार के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए किसी कानून के उल्लंघन को रोके;
(i) प्रत्येक अधिकारी जिसका कर्तव्य है कि वह अधिकारी के रूप में किसी संपत्ति को ले, प्राप्त करे, रखे या खर्च करे, किसी गांव, कस्बे या जिले के किसी धर्मनिरपेक्ष सामान्य उद्देश्य के लिए कोई सर्वेक्षण या मूल्यांकन करे या कोई दर या कर लगाए, या किसी गांव, कस्बे या जिले के लोगों के अधिकारों का पता लगाने के लिए कोई दस्तावेज बनाए, प्रमाणित करे या रखे;
(j) प्रत्येक व्यक्ति जो कोई ऐसा पद धारण करता है जिसके आधार पर उसे मतदाता सूची तैयार करने, प्रकाशित करने, बनाए रखने या संशोधित करने या चुनाव या चुनाव के किसी भाग का संचालन करने का अधिकार प्राप्त है;
(k) प्रत्येक व्यक्ति---
(i) सरकार की सेवा या वेतन में कार्यरत या सरकार द्वारा किसी सार्वजनिक कर्तव्य के निष्पादन के लिए शुल्क या कमीशन द्वारा पारिश्रमिक प्राप्त करने वाला;
(ii) सामान्य खंड अधिनियम, 1897 (10 ऑफ 1897) की धारा 3 के खंड (31) में परिभाषित स्थानीय प्राधिकरण, केंद्रीय या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित निगम या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 2 के खंड (45) में परिभाषित सरकारी कंपनी की सेवा या वेतन में।
स्पष्टीकरण। ---
(क) इस खंड में वर्णित किसी भी विवरण के अंतर्गत आने वाले व्यक्ति लोक सेवक हैं, चाहे वे सरकार द्वारा नियुक्त किए गए हों या नहीं;
(ख) प्रत्येक व्यक्ति जो लोक सेवक के पद पर वास्तविक रूप से आसीन है, चाहे उस पद को धारण करने के उसके अधिकार में कोई भी कानूनी खामी क्यों न हो, वह लोक सेवक है;
(ग) "चुनाव" से तात्पर्य किसी विधायी, नगरपालिका या अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण के सदस्यों के चयन के उद्देश्य से किए जाने वाले चुनाव से है, चाहे वह किसी भी प्रकार का हो, जिसके चयन की विधि किसी भी कानून द्वारा या उसके अधीन लागू हो।
चित्रण .
नगर आयुक्त एक लोक सेवक होता है;
(29) "विश्वास करने का कारण".---किसी व्यक्ति को किसी बात पर "विश्वास करने का कारण" तब कहा जाता है, जब उसके पास उस बात पर विश्वास करने का पर्याप्त कारण हो, अन्यथा नहीं;
(30) "विशेष कानून" से तात्पर्य किसी विशेष विषय पर लागू होने वाले कानून से है;
(31) "मूल्यवान प्रतिभूति" से तात्पर्य ऐसे दस्तावेज़ से है, या ऐसा दस्तावेज़ होने का दावा करता है, जिसके द्वारा कोई कानूनी अधिकार सृजित, विस्तारित, हस्तांतरित, प्रतिबंधित, समाप्त या मुक्त किया जाता है, या जिसके द्वारा कोई व्यक्ति स्वीकार करता है कि वह कानूनी दायित्व के अधीन है, या उसके पास कोई निश्चित कानूनी अधिकार नहीं है।
चित्रण।
A विनिमय बिल के पीछे अपना नाम लिखता है। इस पृष्ठांकन का प्रभाव बिल के अधिकार को किसी भी ऐसे व्यक्ति को हस्तांतरित करना है जो इसका वैध धारक बन सकता है, इसलिए पृष्ठांकन एक "मूल्यवान प्रतिभूति" है;
(32) "जहाज" से तात्पर्य किसी भी ऐसी वस्तु से है जो जल द्वारा मनुष्यों या संपत्ति के परिवहन के लिए बनाई गई हो;
(33) "स्वैच्छिक रूप से".---किसी व्यक्ति को "स्वैच्छिक रूप से" प्रभाव उत्पन्न करने वाला तब कहा जाता है जब वह उसे उन साधनों द्वारा उत्पन्न करता है जिनके द्वारा वह उसे उत्पन्न करना चाहता था, या उन साधनों द्वारा, जिनके बारे में उन साधनों का उपयोग करते समय वह जानता था या मानने का कारण था कि वे उसे उत्पन्न करने की संभावना रखते हैं।
चित्रण ।
एक व्यक्ति (A) रात में एक बड़े शहर में एक आबाद घर में आग लगा देता है, ताकि वह डकैती को अंजाम दे सके और इस प्रकार एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। यहाँ, हो सकता है कि A का इरादा मृत्यु का कारण बनने का न हो; और हो सकता है कि उसे अपने कृत्य से हुई मृत्यु पर खेद भी हो; फिर भी, यदि वह जानता था कि उसके कृत्य से मृत्यु होने की संभावना है, तो उसने स्वेच्छा से मृत्यु का कारण बनाया है।
(34) "वसीयत" से तात्पर्य किसी भी वसीयती दस्तावेज से है;
(35) "स्त्री" से तात्पर्य किसी भी आयु की स्त्री मानव प्राणी से है;
(36) "अवैध लाभ" का अर्थ है गैरकानूनी साधनों से ऐसी संपत्ति प्राप्त करना जिस पर लाभ प्राप्त करने वाला व्यक्ति कानूनी रूप से हकदार नहीं है;
(37) "अनुचित हानि" से तात्पर्य उस संपत्ति की गैरकानूनी साधनों द्वारा हुई हानि से है जिस पर हानि करने वाला व्यक्ति कानूनी रूप से हकदार है;
(38) "अन्यायपूर्ण लाभ" और "अन्यायपूर्ण हानि"।---किसी व्यक्ति को अन्यायपूर्ण लाभ तब कहा जाता है जब वह अन्यायपूर्ण तरीके से किसी संपत्ति को अपने पास रखता है, साथ ही जब वह अन्यायपूर्ण तरीके से उसे प्राप्त करता है। किसी व्यक्ति को अन्यायपूर्ण हानि तब कहा जाता है जब उसे अन्यायपूर्ण तरीके से किसी संपत्ति से वंचित रखा जाता है, साथ ही जब उसे अन्यायपूर्ण तरीके से संपत्ति से वंचित किया जाता है; और
(39) इस संहिता में प्रयुक्त शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ, जो परिभाषित नहीं हैं, परन्तु सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (21 ऑफ 2000) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो क्रमशः उस अधिनियम और संहिता में उन्हें दिया गया है।
पूरा पढ़ें: BNS §2(12)(1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है;
(2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है;
(3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है;
(4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी वस्तु को दूसरी वस्तु के समान बनाता है, उस समानता के माध्यम से धोखा देने के इरादे से, या यह जानते हुए कि इससे धोखा होने की संभावना है।
स्पष्टीकरण 1.---नकली वस्तु बनाने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि नकल हूबहू हो।
स्पष्टीकरण 2.---जब कोई व्यक्ति किसी एक वस्तु को दूसरी वस्तु के समान बनाता है, और समानता ऐसी होती है कि कोई व्यक्ति उससे धोखा खा सकता है, तो जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, यह माना जाएगा कि किसी वस्तु को दूसरी वस्तु के समान बनाने वाले व्यक्ति का इरादा उस समानता के माध्यम से धोखा देना था या उसे पता था कि इससे धोखा होने की संभावना है;
(5) "न्यायालय" से तात्पर्य ऐसे न्यायाधीश से है जिसे कानून द्वारा अकेले न्यायिक रूप से कार्य करने का अधिकार प्राप्त है, या न्यायाधीशों के ऐसे निकाय से है जिसे कानून द्वारा एक निकाय के रूप में न्यायिक रूप से कार्य करने का अधिकार प्राप्त है, जब ऐसा न्यायाधीश या न्यायाधीशों का निकाय न्यायिक रूप से कार्य कर रहा हो;
(6) "मृत्यु" से तात्पर्य किसी मनुष्य की मृत्यु से है, जब तक कि संदर्भ से इसके विपरीत स्पष्ट न हो;
(7) "बेईमानी से" का अर्थ है किसी व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुँचाने या किसी अन्य व्यक्ति को अनुचित हानि पहुँचाने के इरादे से कोई कार्य करना;
(8) "दस्तावेज़" से तात्पर्य किसी पदार्थ पर अक्षरों, अंकों या चिह्नों के माध्यम से या इनमें से एक से अधिक माध्यमों से व्यक्त या वर्णित किसी भी विषय वस्तु से है, और इसमें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं, जिनका उपयोग उस विषय वस्तु के साक्ष्य के रूप में किया जाना है, या किया जा सकता है।
स्पष्टीकरण 1.---यह अप्रासंगिक है कि अक्षर, अंक या चिह्न किस साधन से या किस पदार्थ पर बने हैं, या साक्ष्य न्यायालय के लिए अभिप्रेत है या न्यायालय में उपयोग किया जा सकता है या नहीं।
(क) अनुबंध की शर्तों को व्यक्त करने वाला कोई लिखित दस्तावेज, जिसका उपयोग अनुबंध के साक्ष्य के रूप में किया जा सकता है, एक दस्तावेज कहलाता है।
(ख) बैंकर पर दिया गया चेक एक दस्तावेज है।
(सी) पावर ऑफ अटॉर्नी एक दस्तावेज है।
(घ) ऐसा नक्शा या योजना जिसका उपयोग साक्ष्य के रूप में किया जाना है या जिसका उपयोग साक्ष्य के रूप में किया जा सकता है, एक दस्तावेज है।
(ई) निर्देश या हिदायतें युक्त कोई लेखन एक दस्तावेज है।
स्पष्टीकरण 2.---व्यापारिक या अन्य उपयोग के अनुसार अक्षरों, अंकों या चिह्नों के माध्यम से जो कुछ भी व्यक्त किया जाता है, उसे इस धारा के अर्थ के अंतर्गत ऐसे अक्षरों, अंकों या चिह्नों द्वारा व्यक्त किया गया माना जाएगा, भले ही वह वास्तव में व्यक्त न किया गया हो।
चित्रण .
A अपने नाम से एक विनिमय पत्र के पीछे अपना नाम लिखता है, जो उसके नाम पर देय है। व्यापारिक नियमों के अनुसार, इस पृष्ठांकन का अर्थ यह है कि पत्र धारक को भुगतान किया जाना है। पृष्ठांकन एक दस्तावेज़ है, और इसका अर्थ उसी प्रकार लगाया जाएगा जैसे कि हस्ताक्षर के ऊपर "धारक को भुगतान करें" या इसी तरह के शब्द लिखे गए हों।
(9) "धोखाधड़ी से" का अर्थ है धोखाधड़ी करने के इरादे से कुछ करना, अन्यथा नहीं;
(10) "लिंग".---सर्वनाम "वह" और इसके व्युत्पन्न किसी भी व्यक्ति के लिए प्रयोग किए जाते हैं, चाहे वह पुरुष हो, महिला हो या ट्रांसजेंडर हो।
स्पष्टीकरण .--- "ट्रांसजेंडर" का वही अर्थ होगा जो ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 (2019 का 40) की धारा 2 के खंड (k) में दिया गया है;
(11) "सद्भावना".---कोई भी कार्य या विश्वास "सद्भावना" से किया गया या माना गया नहीं कहा जाता है जो उचित सावधानी और ध्यान के बिना किया गया हो;
(12) "सरकार" से तात्पर्य केंद्र सरकार या राज्य सरकार से है;
(13) "आश्रय" में किसी व्यक्ति को आश्रय, भोजन, पेय, धन, कपड़े, हथियार, गोला-बारूद या परिवहन के साधन उपलब्ध कराना, या किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार से, चाहे वह इस खंड में सूचीबद्ध साधनों के समान हो या नहीं, गिरफ्तारी से बचने में सहायता करना शामिल है;
(14) "चोट" से तात्पर्य किसी व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, प्रतिष्ठा या संपत्ति में अवैध रूप से पहुँचाई गई किसी भी प्रकार की हानि से है;
(15) "अवैध" और "कानूनी रूप से करने के लिए बाध्य".--- "अवैध" शब्द हर उस चीज़ पर लागू होता है जो अपराध है या जो कानून द्वारा निषिद्ध है, या जो दीवानी कार्रवाई का आधार प्रदान करती है; और किसी व्यक्ति को "कानूनी रूप से करने के लिए बाध्य" कहा जाता है, वह कुछ भी जिसे न करना उसके लिए अवैध है;
(16) "न्यायाधीश" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसे आधिकारिक तौर पर न्यायाधीश के रूप में नामित किया गया है और इसमें वह व्यक्ति भी शामिल है, ---
(i) जो किसी भी कानूनी कार्यवाही, चाहे वह दीवानी हो या आपराधिक, में अंतिम निर्णय देने के लिए, या ऐसा निर्णय देने के लिए, जिसके विरुद्ध अपील न की जाए तो वह अंतिम होगा, या ऐसा निर्णय देने के लिए, जिसे किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा पुष्टि किए जाने पर वह अंतिम होगा, कानून द्वारा सशक्त है; या
(ii) जो किसी निकाय या व्यक्तियों में से एक है, और वह निकाय या व्यक्ति कानून द्वारा ऐसा निर्णय देने के लिए सशक्त है।
चित्रण .
किसी ऐसे आरोप के संबंध में अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने वाला मजिस्ट्रेट, जिसके संबंध में उसे अपील के साथ या बिना अपील के जुर्माना या कारावास की सजा देने का अधिकार है, न्यायाधीश कहलाता है;
(17) "जीवन" से तात्पर्य मनुष्य के जीवन से है, जब तक कि संदर्भ से इसके विपरीत स्पष्ट न हो;
(18) "स्थानीय कानून" से तात्पर्य भारत के किसी विशेष भाग पर ही लागू होने वाले कानून से है;
(19) "मनुष्य" से तात्पर्य किसी भी आयु के पुरुष मानव से है;
(20) "माह" और "वर्ष".---जहाँ कहीं भी "माह" या "वर्ष" शब्द का प्रयोग किया गया हो, यह समझा जाना चाहिए कि माह या वर्ष की गणना ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार की जाएगी;
(21) "चल संपत्ति" में हर प्रकार की संपत्ति शामिल है, सिवाय भूमि और पृथ्वी से जुड़ी वस्तुओं या पृथ्वी से स्थायी रूप से जुड़ी किसी वस्तु के;
(22) "संख्या".---जब तक संदर्भ से इसके विपरीत न प्रतीत हो, एकवचन संख्या को दर्शाने वाले शब्दों में बहुवचन संख्या भी शामिल होती है, और बहुवचन संख्या को दर्शाने वाले शब्दों में एकवचन संख्या भी शामिल होती है;
(23) "शपथ" में कानून द्वारा शपथ के स्थान पर प्रतिस्थापित की गई गंभीर प्रतिज्ञा और किसी लोक सेवक के समक्ष कानून द्वारा आवश्यक या अधिकृत कोई घोषणा या न्यायालय में हो या न हो, प्रमाण के उद्देश्य से उपयोग की जाने वाली कोई घोषणा शामिल है;
(24) "अपराध".---उपधारा (क) और (ख) में उल्लिखित अध्यायों एवं खंडों को छोड़कर, "अपराध" शब्द का अर्थ इस संहिता द्वारा दंडनीय बनाया गया कोई भी कार्य है, परन्तु---
(क) अध्याय तृतीय में और निम्नलिखित धाराओं में, अर्थात् धारा 8 की उपधारा (2), (3), (4) और (5), धारा 9, 49, 50, 52, 54, 55, 56, 57, 58, 59, 60, 61, 119, 120, 123, धारा 127, 222, 230, 231, 240, 248, 250, 251, 259, 260, 261, 262, 263 की उपधारा (7) और (8), धारा 308 की उपधारा (6) और (7) और धारा 330 की उपधारा (2) में, 'अपराध' शब्द का अर्थ इस संहिता के तहत या किसी विशेष कानून या स्थानीय कानून के तहत दंडनीय वस्तु है; और
(ख) धारा 189 की उपधारा (1), धारा 211, 212, 238, 239, 249, 253 और धारा 329 की उपधारा (1) में, "अपराध" शब्द का वही अर्थ होगा जब विशेष कानून या स्थानीय कानून के तहत दंडनीय कार्य ऐसे कानून के तहत छह महीने या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय हो, चाहे जुर्माना सहित हो या बिना जुर्माना के;
(25) "लोप" से एक ही लोप के साथ-साथ कई लोपों की श्रृंखला भी तात्पर्य है;
(26) "व्यक्ति" में कोई कंपनी या संघ या व्यक्तियों का समूह शामिल है, चाहे वह निगमित हो या नहीं;
(27) "सार्वजनिक" में जनता का कोई वर्ग या कोई समुदाय शामिल है;
(28) "लोक सेवक" से तात्पर्य निम्नलिखित विवरणों में से किसी एक के अंतर्गत आने वाले व्यक्ति से है, अर्थात्:---
(क) सेना, नौसेना या वायु सेना में प्रत्येक कमीशन प्राप्त अधिकारी;
(ख) प्रत्येक न्यायाधीश, जिसमें कोई भी व्यक्ति शामिल है जिसे कानून द्वारा किसी भी न्यायिक कार्य को स्वयं या किसी निकाय के सदस्य के रूप में करने का अधिकार दिया गया है;
(ग) न्यायालय का प्रत्येक अधिकारी, जिसमें परिसमापक, रिसीवर या आयुक्त शामिल हैं, जिसका कर्तव्य किसी विधि या तथ्य के मामले की जांच करना या उस पर रिपोर्ट देना, या किसी दस्तावेज को बनाना, प्रमाणित करना या रखना, या किसी संपत्ति का प्रभार लेना या उसका निपटान करना, या किसी न्यायिक प्रक्रिया को निष्पादित करना, या किसी शपथ को दिलाना, या व्याख्या करना, या न्यायालय में व्यवस्था बनाए रखना है, और न्यायालय द्वारा विशेष रूप से ऐसे किसी कर्तव्य को निभाने के लिए अधिकृत प्रत्येक व्यक्ति;
(घ) न्यायालय या लोक सेवक की सहायता करने वाला प्रत्येक निर्धारक या पंचायत सदस्य;
(ई) प्रत्येक मध्यस्थ या अन्य व्यक्ति जिसे किसी न्यायालय या किसी अन्य सक्षम सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा निर्णय या रिपोर्ट के लिए कोई मामला या विषय संदर्भित किया गया हो;
(f) प्रत्येक व्यक्ति जो किसी ऐसे पद का धारक है जिसके आधार पर उसे किसी व्यक्ति को कारावास में रखने या कैद करने का अधिकार प्राप्त है;
(जी) सरकार का प्रत्येक अधिकारी जिसका कर्तव्य, ऐसे अधिकारी के रूप में, अपराधों को रोकना, अपराधों की सूचना देना, अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाना, या सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा या सुविधा की रक्षा करना है;
(h) प्रत्येक अधिकारी जिसका कर्तव्य है कि वह अधिकारी के रूप में सरकार की ओर से किसी संपत्ति को ले, प्राप्त करे, रखे या खर्च करे, या सरकार की ओर से कोई सर्वेक्षण, मूल्यांकन या अनुबंध करे, या कोई राजस्व प्रक्रिया निष्पादित करे, या सरकार के वित्तीय हितों को प्रभावित करने वाले किसी मामले की जांच करे या उस पर रिपोर्ट दे, या सरकार के वित्तीय हितों से संबंधित कोई दस्तावेज बनाए, प्रमाणित करे या रखे, या सरकार के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए किसी कानून के उल्लंघन को रोके;
(i) प्रत्येक अधिकारी जिसका कर्तव्य है कि वह अधिकारी के रूप में किसी संपत्ति को ले, प्राप्त करे, रखे या खर्च करे, किसी गांव, कस्बे या जिले के किसी धर्मनिरपेक्ष सामान्य उद्देश्य के लिए कोई सर्वेक्षण या मूल्यांकन करे या कोई दर या कर लगाए, या किसी गांव, कस्बे या जिले के लोगों के अधिकारों का पता लगाने के लिए कोई दस्तावेज बनाए, प्रमाणित करे या रखे;
(j) प्रत्येक व्यक्ति जो कोई ऐसा पद धारण करता है जिसके आधार पर उसे मतदाता सूची तैयार करने, प्रकाशित करने, बनाए रखने या संशोधित करने या चुनाव या चुनाव के किसी भाग का संचालन करने का अधिकार प्राप्त है;
(k) प्रत्येक व्यक्ति---
(i) सरकार की सेवा या वेतन में कार्यरत या सरकार द्वारा किसी सार्वजनिक कर्तव्य के निष्पादन के लिए शुल्क या कमीशन द्वारा पारिश्रमिक प्राप्त करने वाला;
(ii) सामान्य खंड अधिनियम, 1897 (10 ऑफ 1897) की धारा 3 के खंड (31) में परिभाषित स्थानीय प्राधिकरण, केंद्रीय या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित निगम या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 2 के खंड (45) में परिभाषित सरकारी कंपनी की सेवा या वेतन में।
स्पष्टीकरण। ---
(क) इस खंड में वर्णित किसी भी विवरण के अंतर्गत आने वाले व्यक्ति लोक सेवक हैं, चाहे वे सरकार द्वारा नियुक्त किए गए हों या नहीं;
(ख) प्रत्येक व्यक्ति जो लोक सेवक के पद पर वास्तविक रूप से आसीन है, चाहे उस पद को धारण करने के उसके अधिकार में कोई भी कानूनी खामी क्यों न हो, वह लोक सेवक है;
(ग) "चुनाव" से तात्पर्य किसी विधायी, नगरपालिका या अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण के सदस्यों के चयन के उद्देश्य से किए जाने वाले चुनाव से है, चाहे वह किसी भी प्रकार का हो, जिसके चयन की विधि किसी भी कानून द्वारा या उसके अधीन लागू हो।
चित्रण .
नगर आयुक्त एक लोक सेवक होता है;
(29) "विश्वास करने का कारण".---किसी व्यक्ति को किसी बात पर "विश्वास करने का कारण" तब कहा जाता है, जब उसके पास उस बात पर विश्वास करने का पर्याप्त कारण हो, अन्यथा नहीं;
(30) "विशेष कानून" से तात्पर्य किसी विशेष विषय पर लागू होने वाले कानून से है;
(31) "मूल्यवान प्रतिभूति" से तात्पर्य ऐसे दस्तावेज़ से है, या ऐसा दस्तावेज़ होने का दावा करता है, जिसके द्वारा कोई कानूनी अधिकार सृजित, विस्तारित, हस्तांतरित, प्रतिबंधित, समाप्त या मुक्त किया जाता है, या जिसके द्वारा कोई व्यक्ति स्वीकार करता है कि वह कानूनी दायित्व के अधीन है, या उसके पास कोई निश्चित कानूनी अधिकार नहीं है।
चित्रण।
A विनिमय बिल के पीछे अपना नाम लिखता है। इस पृष्ठांकन का प्रभाव बिल के अधिकार को किसी भी ऐसे व्यक्ति को हस्तांतरित करना है जो इसका वैध धारक बन सकता है, इसलिए पृष्ठांकन एक "मूल्यवान प्रतिभूति" है;
(32) "जहाज" से तात्पर्य किसी भी ऐसी वस्तु से है जो जल द्वारा मनुष्यों या संपत्ति के परिवहन के लिए बनाई गई हो;
(33) "स्वैच्छिक रूप से".---किसी व्यक्ति को "स्वैच्छिक रूप से" प्रभाव उत्पन्न करने वाला तब कहा जाता है जब वह उसे उन साधनों द्वारा उत्पन्न करता है जिनके द्वारा वह उसे उत्पन्न करना चाहता था, या उन साधनों द्वारा, जिनके बारे में उन साधनों का उपयोग करते समय वह जानता था या मानने का कारण था कि वे उसे उत्पन्न करने की संभावना रखते हैं।
चित्रण ।
एक व्यक्ति (A) रात में एक बड़े शहर में एक आबाद घर में आग लगा देता है, ताकि वह डकैती को अंजाम दे सके और इस प्रकार एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। यहाँ, हो सकता है कि A का इरादा मृत्यु का कारण बनने का न हो; और हो सकता है कि उसे अपने कृत्य से हुई मृत्यु पर खेद भी हो; फिर भी, यदि वह जानता था कि उसके कृत्य से मृत्यु होने की संभावना है, तो उसने स्वेच्छा से मृत्यु का कारण बनाया है।
(34) "वसीयत" से तात्पर्य किसी भी वसीयती दस्तावेज से है;
(35) "स्त्री" से तात्पर्य किसी भी आयु की स्त्री मानव प्राणी से है;
(36) "अवैध लाभ" का अर्थ है गैरकानूनी साधनों से ऐसी संपत्ति प्राप्त करना जिस पर लाभ प्राप्त करने वाला व्यक्ति कानूनी रूप से हकदार नहीं है;
(37) "अनुचित हानि" से तात्पर्य उस संपत्ति की गैरकानूनी साधनों द्वारा हुई हानि से है जिस पर हानि करने वाला व्यक्ति कानूनी रूप से हकदार है;
(38) "अन्यायपूर्ण लाभ" और "अन्यायपूर्ण हानि"।---किसी व्यक्ति को अन्यायपूर्ण लाभ तब कहा जाता है जब वह अन्यायपूर्ण तरीके से किसी संपत्ति को अपने पास रखता है, साथ ही जब वह अन्यायपूर्ण तरीके से उसे प्राप्त करता है। किसी व्यक्ति को अन्यायपूर्ण हानि तब कहा जाता है जब उसे अन्यायपूर्ण तरीके से किसी संपत्ति से वंचित रखा जाता है, साथ ही जब उसे अन्यायपूर्ण तरीके से संपत्ति से वंचित किया जाता है; और
(39) इस संहिता में प्रयुक्त शब्द एवं अभिव्यक्तियाँ, जो परिभाषित नहीं हैं, परन्तु सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (21 ऑफ 2000) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो क्रमशः उस अधिनियम और संहिता में उन्हें दिया गया है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
