पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IPC धारा 136 अब BNS धारा 164 है
धारा 136 - अभित्याजक को संश्रय देना
पुराना कानून
IPC §136
धारा 136 - अभित्याजक को संश्रय देना
अभित्याजक को संश्रय देना
जो कोई, एतस्मिन्पश्चात् अपवादित दशा के सिवाय, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक ने अभित्यजन किया है, ऐसे आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को संश्रय देगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
अपवाद - यह उपबन्ध उस दशा तक विस्तारित नहीं होता, जिसमें संश्रय पत्नी द्वारा अपने पति को दिया जाता है ।
पूरा पढ़ें: IPC §136जो कोई, एतस्मिन्पश्चात् अपवादित दशा के सिवाय, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक ने अभित्यजन किया है, ऐसे आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को संश्रय देगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
अपवाद - यह उपबन्ध उस दशा तक विस्तारित नहीं होता, जिसमें संश्रय पत्नी द्वारा अपने पति को दिया जाता है ।
नया कानून
BNS §164
भगोड़े को शरण देना।
इसके बाद जिन मामलों में अपवाद नहीं दिए गए हैं, उन्हें छोड़कर, जो कोई भी यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना का कोई अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक भाग गया है, ऐसे अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को शरण देता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
अपवाद.—यह प्रावधान उस मामले पर लागू नहीं होता जिसमें भगोड़े के जीवनसाथी द्वारा शरण दी जाती है।
पूरा पढ़ें: BNS §164अपवाद.—यह प्रावधान उस मामले पर लागू नहीं होता जिसमें भगोड़े के जीवनसाथी द्वारा शरण दी जाती है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
