पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IEA धारा 66 अब BSA धारा 64 है
पेश करने की सूचना के बारे में नियम
पुराना कानून
IEA §66
पेश करने की सूचना के बारे में नियम
धारा ६५, खण्ड (क) में निर्दिष्ट दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु का द्वितीयक साक्ष्य तब तक न दिया जा सकेगा, जब तक ऐसे द्वितीयक साक्ष्य देने की प्रस्थापना करने वाले पक्षकार ने उस पक्षकार को जिसके कब्जे में या शक्त्यधीन वह दस्तावेज है या उसके अटर्नी या प्लीडर को उसे पेश करने के लिए सूचना, जैसी कि विधि द्वारा विहित है, और यदि विधि द्वारा कोई सूचना विहित नहीं हो तो ऐसी सूचना जैसी न्यायालय मामले की परिस्थितियों के अधीन युक्तियुक्त समझता है, न दे दी हो :
परन्तु ऐसी सूचना निम्नलिखित अवस्थाओं में से किसी में अथवा किसी भी अन्य अवस्था में, जिसमें न्यायालय उसके दिए जाने से अभिमुक्ति प्रदान कर दे, द्वितीयक साक्ष्य को ग्राह्य बनाने के लिए अपेक्षित नहीं कि जाएगी :-
१)जबकि साबित की जाने वाली दस्तावेज स्वयं एक सूचना है;
२)जबकि प्रतिपक्षी को मामले की प्रकृति से यह जानना ही होगा कि उसे पेश करने की उससे अपेक्षा की जाएगी;
३)जबकि यह प्रतीत होता है या साबित किया जाता है कि प्रतिपक्षी ने मूल पर कब्जा कपट या बल द्वारा अभिप्राप्त कर लिया है ;
४)जबकि मूल प्रतिपक्षी या उसके अभिकर्ता के पास न्यायालय में है;
५)जबकि प्रतिपक्षी या उसके अभिकर्ता ने उसका खो जाना स्वीकार कर लिया है;
६)जबकि दस्तावेज पर कब्जा रखने वाला व्यक्ति न्यायालय की आदेशिका की पहुँच के बाहर है या ऐसी आदेशिका के अध्यधीन नहीं है ।
पूरा पढ़ें: IEA §66परन्तु ऐसी सूचना निम्नलिखित अवस्थाओं में से किसी में अथवा किसी भी अन्य अवस्था में, जिसमें न्यायालय उसके दिए जाने से अभिमुक्ति प्रदान कर दे, द्वितीयक साक्ष्य को ग्राह्य बनाने के लिए अपेक्षित नहीं कि जाएगी :-
१)जबकि साबित की जाने वाली दस्तावेज स्वयं एक सूचना है;
२)जबकि प्रतिपक्षी को मामले की प्रकृति से यह जानना ही होगा कि उसे पेश करने की उससे अपेक्षा की जाएगी;
३)जबकि यह प्रतीत होता है या साबित किया जाता है कि प्रतिपक्षी ने मूल पर कब्जा कपट या बल द्वारा अभिप्राप्त कर लिया है ;
४)जबकि मूल प्रतिपक्षी या उसके अभिकर्ता के पास न्यायालय में है;
५)जबकि प्रतिपक्षी या उसके अभिकर्ता ने उसका खो जाना स्वीकार कर लिया है;
६)जबकि दस्तावेज पर कब्जा रखने वाला व्यक्ति न्यायालय की आदेशिका की पहुँच के बाहर है या ऐसी आदेशिका के अध्यधीन नहीं है ।
नया कानून
BSA §64
पेशी के लिए नोटिस संबंधी नियम।
धारा 60 के खंड (क) में निर्दिष्ट दस्तावेजों की विषयवस्तु के द्वितीयक साक्ष्य तब तक नहीं दिए जाएंगे जब तक कि द्वितीयक साक्ष्य देने का प्रस्ताव करने वाले पक्ष ने उस पक्ष को, जिसके कब्जे या अधिकार में दस्तावेज है, या उसके अधिवक्ता या प्रतिनिधि को, उसे प्रस्तुत करने के लिए कानून द्वारा निर्धारित सूचना न दे दी हो; और यदि कानून द्वारा कोई सूचना निर्धारित नहीं है, तो न्यायालय द्वारा मामले की परिस्थितियों के अनुसार उचित समझी जाने वाली सूचना दी जाएगी।
बशर्ते कि निम्नलिखित में से किसी भी मामले में, या किसी अन्य मामले में जिसमें न्यायालय इसे माफ करना उचित समझे, द्वितीयक साक्ष्य को स्वीकार्य बनाने के लिए ऐसी सूचना की आवश्यकता नहीं होगी:---
(क) जब सिद्ध किया जाने वाला दस्तावेज स्वयं एक सूचना हो;
(ख) जब मामले की प्रकृति से ही विरोधी पक्ष को यह ज्ञात हो कि उसे इसे प्रस्तुत करना होगा;
(ग) जब यह प्रतीत हो या सिद्ध हो जाए कि विरोधी पक्ष ने धोखाधड़ी या बलपूर्वक मूल प्रति पर कब्जा प्राप्त कर लिया है;
(घ) जब विरोधी पक्ष या उसका प्रतिनिधि न्यायालय में मूल प्रति प्रस्तुत करे;
(ई) जब विरोधी पक्ष या उसके प्रतिनिधि ने दस्तावेज़ के खो जाने की बात स्वीकार कर ली हो;
(f) जब दस्तावेज़ रखने वाला व्यक्ति न्यायालय की प्रक्रिया से बाहर हो या न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन न हो।
पूरा पढ़ें: BSA §64बशर्ते कि निम्नलिखित में से किसी भी मामले में, या किसी अन्य मामले में जिसमें न्यायालय इसे माफ करना उचित समझे, द्वितीयक साक्ष्य को स्वीकार्य बनाने के लिए ऐसी सूचना की आवश्यकता नहीं होगी:---
(क) जब सिद्ध किया जाने वाला दस्तावेज स्वयं एक सूचना हो;
(ख) जब मामले की प्रकृति से ही विरोधी पक्ष को यह ज्ञात हो कि उसे इसे प्रस्तुत करना होगा;
(ग) जब यह प्रतीत हो या सिद्ध हो जाए कि विरोधी पक्ष ने धोखाधड़ी या बलपूर्वक मूल प्रति पर कब्जा प्राप्त कर लिया है;
(घ) जब विरोधी पक्ष या उसका प्रतिनिधि न्यायालय में मूल प्रति प्रस्तुत करे;
(ई) जब विरोधी पक्ष या उसके प्रतिनिधि ने दस्तावेज़ के खो जाने की बात स्वीकार कर ली हो;
(f) जब दस्तावेज़ रखने वाला व्यक्ति न्यायालय की प्रक्रिया से बाहर हो या न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन न हो।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
