पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IEA धारा 43 अब BSA धारा 37 है
धाराओं ४० से ४२ में वर्णित से भिन्न निर्णय आदि कब सुसंगत है
पुराना कानून
IEA §43
धाराओं ४० से ४२ में वर्णित से भिन्न निर्णय आदि कब सुसंगत है
धाराएँ ४०, ४१ और ४२ में वर्णित भिन्न निर्णय, आदेश या डिक्रियाँ विसंगत है जब तक कि ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री का अस्तित्व विवाद्यक तथ्य न हो या वह इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अन्तर्गत सुसंगत न हो ।
दृष्टांत :
क)ऐ और बी किसी अपमान लेख के लिए जो उनमें से हर एक पर लांछन लगाता है, सी पर पृथक्-पृथक् वाद लाते है । हर एक मामले में सी कहता है कि वह बात, जिसका अपमान-लेखीय होना अभिकथित है, सत्य है और परिस्थितियाँ ऐसी है कि वह अधिसंभाव्यत: या तो हर एक मामलें में सत्य है या किसी में नहीं ।
सी के विरुद्ध ऐ इस आधार पर कि सी अपना न्यायोचित साबित करने में असफल रहा नुकसानी की डिक्री अभिप्राप्त करता है । यह तथ्य बी और सी के बीच विसंगत है ।
ख)ऐ अपनी पत्नी सी के साथ जारकर्म (किसी व्यक्ति का, दूसरे की पत्नी के साथ, बिना उस व्यक्ति की सहमति के संभोग करना ) करने के लिए बी का अभियोजन करता है ।
बी इस बात का प्रत्याख्यान (इन्कार / अस्वीकार) करता है कि सी ऐ की पत्नी है, किन्तु न्यायालय बी को जारकर्म के लिए दोषसिद्ध करता है ।
तत्पश्चात ऐ के जीवनकाल में बी के साथ विवाह करने पर द्वि-विवाह के लिए सी अभियोजित की जाती है । सी कहती है कि वह ऐ की पत्नी कभी नहीं थी ।
बी के विरुद्ध दिया गया निर्णय सी के विरुद्ध विसंगत है ।
ग)बी का अभियोजन ऐ इसलिए करता है कि उसने ऐ की गाय चुराई है । बी दोषसिद्ध किया जाता है ।
तत्पश्चात ऐ उस गाय के लिए जिसे बी ने दोषसिद्ध होने से पूर्व सी को बेच दिया था, सी पर वाद लाता है । बी के विरुद्ध वह निर्णय ऐ और सी के बीच विसंगत है ।
घ)ऐ ने बी के विरुद्ध भूमि के कब्जे की डिक्रि अभिप्राप्त की है । बी का पुत्र सी परिणामस्वरुप ऐ की हत्या करता है ।
उस निर्णय का अस्तित्व अपराध का हेतु दर्शित करने के नाते सुसंगत है ।
ङ)ऐ पर चोरी का और चोरी के लिए पूर्व दोषसिद्धि का आरोप है । पूर्व दोषसिद्धि विवाद्यक तथ्य होने के नाते सुसंगत है ।
च)बी की हत्या के लिए ऐ विचारीत किया जाता है । यह तथ्य कि बी ने ऐ पर अपमान लेख के लिए अभियोजन चलाया था और ऐ दोषसिद्ध और दण्डित किया गया था, धारा ८ के अधीन विवाद्यक तथ्य का हेतु दर्शित करने के नाते सुसंगत है ।
पूरा पढ़ें: IEA §43दृष्टांत :
क)ऐ और बी किसी अपमान लेख के लिए जो उनमें से हर एक पर लांछन लगाता है, सी पर पृथक्-पृथक् वाद लाते है । हर एक मामले में सी कहता है कि वह बात, जिसका अपमान-लेखीय होना अभिकथित है, सत्य है और परिस्थितियाँ ऐसी है कि वह अधिसंभाव्यत: या तो हर एक मामलें में सत्य है या किसी में नहीं ।
सी के विरुद्ध ऐ इस आधार पर कि सी अपना न्यायोचित साबित करने में असफल रहा नुकसानी की डिक्री अभिप्राप्त करता है । यह तथ्य बी और सी के बीच विसंगत है ।
ख)ऐ अपनी पत्नी सी के साथ जारकर्म (किसी व्यक्ति का, दूसरे की पत्नी के साथ, बिना उस व्यक्ति की सहमति के संभोग करना ) करने के लिए बी का अभियोजन करता है ।
बी इस बात का प्रत्याख्यान (इन्कार / अस्वीकार) करता है कि सी ऐ की पत्नी है, किन्तु न्यायालय बी को जारकर्म के लिए दोषसिद्ध करता है ।
तत्पश्चात ऐ के जीवनकाल में बी के साथ विवाह करने पर द्वि-विवाह के लिए सी अभियोजित की जाती है । सी कहती है कि वह ऐ की पत्नी कभी नहीं थी ।
बी के विरुद्ध दिया गया निर्णय सी के विरुद्ध विसंगत है ।
ग)बी का अभियोजन ऐ इसलिए करता है कि उसने ऐ की गाय चुराई है । बी दोषसिद्ध किया जाता है ।
तत्पश्चात ऐ उस गाय के लिए जिसे बी ने दोषसिद्ध होने से पूर्व सी को बेच दिया था, सी पर वाद लाता है । बी के विरुद्ध वह निर्णय ऐ और सी के बीच विसंगत है ।
घ)ऐ ने बी के विरुद्ध भूमि के कब्जे की डिक्रि अभिप्राप्त की है । बी का पुत्र सी परिणामस्वरुप ऐ की हत्या करता है ।
उस निर्णय का अस्तित्व अपराध का हेतु दर्शित करने के नाते सुसंगत है ।
ङ)ऐ पर चोरी का और चोरी के लिए पूर्व दोषसिद्धि का आरोप है । पूर्व दोषसिद्धि विवाद्यक तथ्य होने के नाते सुसंगत है ।
च)बी की हत्या के लिए ऐ विचारीत किया जाता है । यह तथ्य कि बी ने ऐ पर अपमान लेख के लिए अभियोजन चलाया था और ऐ दोषसिद्ध और दण्डित किया गया था, धारा ८ के अधीन विवाद्यक तथ्य का हेतु दर्शित करने के नाते सुसंगत है ।
नया कानून
BSA §37
धारा 34, 35 और 36 में उल्लिखित निर्णयों आदि के अलावा, जब वे प्रासंगिक हों।
धारा 34, 35 और 36 में उल्लिखित निर्णयों, आदेशों या डिक्री के अलावा अन्य निर्णय, आदेश या डिक्री अप्रासंगिक हैं, जब तक कि ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री का अस्तित्व विवाद का विषय न हो, या इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान के तहत प्रासंगिक न हो।
चित्र।
(a) A और B अलग-अलग C पर मानहानि का मुकदमा करते हैं, जो उन दोनों पर ही प्रतिकूल प्रभाव डालता है। C प्रत्येक मामले में कहता है कि कथित मानहानिकारक बात सत्य है, और परिस्थितियाँ ऐसी हैं कि यह संभवतः प्रत्येक मामले में सत्य है, या दोनों में से किसी में भी सत्य नहीं है। A, C के विरुद्ध क्षतिपूर्ति का आदेश इस आधार पर प्राप्त करता है कि C अपना बचाव सिद्ध करने में विफल रहा। यह तथ्य B और C के बीच अप्रासंगिक है।
(ख) ए, बी पर गाय चुराने का मुकदमा करता है। बी दोषी पाया जाता है। ए बाद में सी पर गाय के लिए मुकदमा करता है, जिसे बी ने दोषी ठहराए जाने से पहले उसे बेच दिया था। ए और सी के बीच, बी के विरुद्ध दिया गया निर्णय अप्रासंगिक है।
(ग) ए ने बी के विरुद्ध भूमि पर कब्जे का आदेश प्राप्त कर लिया है। इसके फलस्वरूप बी का पुत्र सी, ए की हत्या कर देता है। इस निर्णय का अस्तित्व अपराध के लिए प्रेरणा सिद्ध करने के रूप में प्रासंगिक है।
(घ) ए पर चोरी का आरोप है और उस पर पहले भी चोरी का दोष सिद्ध हो चुका है। पिछला दोष सिद्ध होना इस मामले में एक प्रासंगिक तथ्य है।
(ई) ए पर बी की हत्या का मुकदमा चलाया जाता है। यह तथ्य कि बी ने ए पर मानहानि का मुकदमा चलाया और ए को दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई, धारा 6 के तहत प्रासंगिक है क्योंकि यह विचाराधीन घटना के लिए मकसद को दर्शाता है।
पूरा पढ़ें: BSA §37चित्र।
(a) A और B अलग-अलग C पर मानहानि का मुकदमा करते हैं, जो उन दोनों पर ही प्रतिकूल प्रभाव डालता है। C प्रत्येक मामले में कहता है कि कथित मानहानिकारक बात सत्य है, और परिस्थितियाँ ऐसी हैं कि यह संभवतः प्रत्येक मामले में सत्य है, या दोनों में से किसी में भी सत्य नहीं है। A, C के विरुद्ध क्षतिपूर्ति का आदेश इस आधार पर प्राप्त करता है कि C अपना बचाव सिद्ध करने में विफल रहा। यह तथ्य B और C के बीच अप्रासंगिक है।
(ख) ए, बी पर गाय चुराने का मुकदमा करता है। बी दोषी पाया जाता है। ए बाद में सी पर गाय के लिए मुकदमा करता है, जिसे बी ने दोषी ठहराए जाने से पहले उसे बेच दिया था। ए और सी के बीच, बी के विरुद्ध दिया गया निर्णय अप्रासंगिक है।
(ग) ए ने बी के विरुद्ध भूमि पर कब्जे का आदेश प्राप्त कर लिया है। इसके फलस्वरूप बी का पुत्र सी, ए की हत्या कर देता है। इस निर्णय का अस्तित्व अपराध के लिए प्रेरणा सिद्ध करने के रूप में प्रासंगिक है।
(घ) ए पर चोरी का आरोप है और उस पर पहले भी चोरी का दोष सिद्ध हो चुका है। पिछला दोष सिद्ध होना इस मामले में एक प्रासंगिक तथ्य है।
(ई) ए पर बी की हत्या का मुकदमा चलाया जाता है। यह तथ्य कि बी ने ए पर मानहानि का मुकदमा चलाया और ए को दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई, धारा 6 के तहत प्रासंगिक है क्योंकि यह विचाराधीन घटना के लिए मकसद को दर्शाता है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
