पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IEA धारा 37 अब BSA धारा 31 है
किन्हीं अधिनियमों या अधिसूचनाओं में अंतर्विष्ट लोक प्रकृति के तथ्य के बारे में कथन की सुसंगति
पुराना कानून
IEA §37
किन्हीं अधिनियमों या अधिसूचनाओं में अंतर्विष्ट लोक प्रकृति के तथ्य के बारे में कथन की सुसंगति
जबकि न्यायालय को किसी लोक प्रकृति के तथ्य के अस्तित्व के बारे में राय बनानी है तब यूनाइटेड किंगडम की पार्लिया मेंट के ऐक्ट में या किसी केन्द्रीय अधिनियम, प्रांतीय अधिनियम या राज्य अधिनियम में या शासकिय राजपत्र में प्रकाशित किसी सरकारी अधिसूचना या क्राउन रिप्रेजेंटेटीव द्वारा की गई अधिसूचना में या लंदन गजट या हिज मजेस्टी के किसी डोमिनियन, उपनिवेश या कब्जाधीन क्षेत्र का सरकारी राजपत्र तात्पर्यित होने वाले किसी मुद्रित पत्र में अंतर्विष्ट परिवर्णन में किया गया उसका कोई कथन सुसंगत तथ्य है ।
पूरा पढ़ें: IEA §37नया कानून
BSA §31
कुछ अधिनियमों या अधिसूचनाओं में निहित सार्वजनिक प्रकृति के तथ्यों के संबंध में कथन की प्रासंगिकता।
जब न्यायालय को किसी सार्वजनिक प्रकृति के तथ्य के अस्तित्व के संबंध में राय बनानी हो, तो किसी केंद्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम में निहित किसी विवरण में या संबंधित आधिकारिक राजपत्र में या किसी मुद्रित कागज में या इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रूप में प्रकाशित किसी अधिसूचना में, जो ऐसे राजपत्र के रूप में प्रस्तुत की गई हो, उसका कोई भी कथन एक प्रासंगिक तथ्य है।
पूरा पढ़ें: BSA §311 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
