पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IEA धारा 18 अब BSA धारा 16 है
स्वीकृति - कार्यवाही के पक्षकार या उसके अभिकर्ता द्वारा
पुराना कानून
IEA §18
स्वीकृति - कार्यवाही के पक्षकार या उसके अभिकर्ता द्वारा
वे कथन स्वीकृतियाँ है, जिन्हें कार्यवाही के किसी पक्षकार ने किया हो, या ऐसे किसी पक्षकार के ऐसे किसी अभिकर्ता ने किया हो जिसे मामले की परिस्थितियों में न्यायालय उन कथनों को करने के लिए उस पक्षकार द्वारा अभिव्यक्त या विवक्षित रुप से प्राधिकृत किया हुआ मानता है ।
प्रतिनिधिक रुप से वादकर्ता द्वारा -
वाद से ऐसे पक्षकारों द्वारा, जो प्रतिनिधिक हैसियत में वाद ला रहे हो या जिन पर प्रतिनिधिक हैसियत में वाद लाया जा रहा हो, किए गए कथन, जब तक कि वे उस समय न किए गए हों, जब कि उनको करने वाला पक्षकार वैसी हैसियत धारण करता था, स्विकृतियां नहीं है ।
वे कथन स्वीकृतियां है , जो -
१)विषयवस्तु में हितबद्ध पक्षकार द्वारा :
ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए है, जिनका कार्यवाही की विषयवस्तु में कोई साम्पत्तिक या धन संबंधी हित है और जो इस प्रकार हितबद्ध व्यक्तियों की हैसियत में वह कथन करते है , अथवा
२)उस व्यक्ति द्वारा जिससे हित व्युत्पन्न (प्राप्त करना ) हुआ हो :
ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए है, जिनसे वाद के पक्षकारों का वाद की विषयवस्तु में अपना हित व्युत्पन्न (प्राप्त करना ) हुआ है,
यदि वे कथन उन्हें करने वाले व्यक्तियों के हित के चालू रहने के दौरान में किए गए है ।
पूरा पढ़ें: IEA §18प्रतिनिधिक रुप से वादकर्ता द्वारा -
वाद से ऐसे पक्षकारों द्वारा, जो प्रतिनिधिक हैसियत में वाद ला रहे हो या जिन पर प्रतिनिधिक हैसियत में वाद लाया जा रहा हो, किए गए कथन, जब तक कि वे उस समय न किए गए हों, जब कि उनको करने वाला पक्षकार वैसी हैसियत धारण करता था, स्विकृतियां नहीं है ।
वे कथन स्वीकृतियां है , जो -
१)विषयवस्तु में हितबद्ध पक्षकार द्वारा :
ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए है, जिनका कार्यवाही की विषयवस्तु में कोई साम्पत्तिक या धन संबंधी हित है और जो इस प्रकार हितबद्ध व्यक्तियों की हैसियत में वह कथन करते है , अथवा
२)उस व्यक्ति द्वारा जिससे हित व्युत्पन्न (प्राप्त करना ) हुआ हो :
ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए है, जिनसे वाद के पक्षकारों का वाद की विषयवस्तु में अपना हित व्युत्पन्न (प्राप्त करना ) हुआ है,
यदि वे कथन उन्हें करने वाले व्यक्तियों के हित के चालू रहने के दौरान में किए गए है ।
नया कानून
BSA §16
मुकदमे में शामिल पक्ष या उसके प्रतिनिधि द्वारा प्रवेश।
(1) कार्यवाही में किसी पक्ष द्वारा या ऐसे किसी पक्ष के किसी एजेंट द्वारा दिए गए बयान, जिन्हें न्यायालय मामले की परिस्थितियों के अनुसार, उनके द्वारा स्पष्ट रूप से या परोक्ष रूप से उन्हें देने के लिए अधिकृत मानता है, स्वीकारोक्ति हैं।
(2) द्वारा दिए गए कथन--
(i) मुकदमों में पक्षकार जो प्रतिनिधि के रूप में मुकदमा कर रहे हैं या जिन पर मुकदमा किया जा रहा है, उनके द्वारा की गई स्वीकारोक्ति तब तक स्वीकारोक्ति नहीं मानी जाएगी, जब तक कि स्वीकारोक्ति करने वाले पक्षकार ने वह स्वीकारोक्ति न की हो; या
(ii) (क) वे व्यक्ति जिनका कार्यवाही के विषय में कोई स्वामित्व या आर्थिक हित हो, और जो ऐसे हितधारक व्यक्तियों के रूप में बयान देते हों; या
(ख) वे व्यक्ति जिनसे मुकदमे के पक्षकारों ने मुकदमे की विषयवस्तु में अपना हित प्राप्त किया है।
यदि ये बयान देने वाले व्यक्तियों के हित में रहते हुए दिए जाते हैं, तो इन्हें स्वीकारोक्ति माना जाता है।
पूरा पढ़ें: BSA §16(2) द्वारा दिए गए कथन--
(i) मुकदमों में पक्षकार जो प्रतिनिधि के रूप में मुकदमा कर रहे हैं या जिन पर मुकदमा किया जा रहा है, उनके द्वारा की गई स्वीकारोक्ति तब तक स्वीकारोक्ति नहीं मानी जाएगी, जब तक कि स्वीकारोक्ति करने वाले पक्षकार ने वह स्वीकारोक्ति न की हो; या
(ii) (क) वे व्यक्ति जिनका कार्यवाही के विषय में कोई स्वामित्व या आर्थिक हित हो, और जो ऐसे हितधारक व्यक्तियों के रूप में बयान देते हों; या
(ख) वे व्यक्ति जिनसे मुकदमे के पक्षकारों ने मुकदमे की विषयवस्तु में अपना हित प्राप्त किया है।
यदि ये बयान देने वाले व्यक्तियों के हित में रहते हुए दिए जाते हैं, तो इन्हें स्वीकारोक्ति माना जाता है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
