पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IEA धारा 165 अब BSA धारा 168 है
प्रश्न करने या पेश करने का आदेश देने की न्यायाधीश की शक्ति
पुराना कानून
IEA §165
प्रश्न करने या पेश करने का आदेश देने की न्यायाधीश की शक्ति
न्यायाधीश सुसंगत तथ्यों का पता चलाने के लिए या उनका उचित सबूत अभिप्राप्त करने के लिए, किसी भी रुप में किसी भी समय किसी भी साक्षी या पक्षकारों से किसी भी सुसंगत या विसंगत तथ्य के बारे में कोई भी प्रश्न, जो वह चाहे, पूछ सकेगा, तथा किसी भी दस्तावेज या चीज को पेश करने का आदेश दे सकेगा; और न तो पक्षकार और न उनके अभिकर्ता हकदार होंगे कि वे किसी भी ऐसे प्रश्न या आदेश के प्रति कोई भी आक्षेप करें, न ऐसे किसी भी प्रश्न के प्रत्युत्तर में दिए गए किसी भी उत्तर पर किसी भी साक्षी की न्यायालय की इजाजत के बिना प्रतिपरीक्षा करने के हकदार होंगे :
परन्तु निर्णय को उन तथ्यों पर, जो इस अधिनियम द्वारा सुसंगत घोषित किए गए है और जो सम्यक् रुप से साबित किए गए हों, आधारित होना होगा :
परन्तु यह भी कि न तो यह धारा न्यायाधीश को किसी साक्षी को किसी ऐसे प्रश्न का उत्तर देने के लिए या किसी ऐसी दस्तावेज को पेश करने को विवश करने के लिए प्राधिकृत करेगी, जिसका उत्तर देने से या जिसे पेश करने से, यदि प्रतिपक्षी द्वारा वह प्रश्न पूछा गया होता या वह दस्तावेज मंगाई गई होती, तो ऐसा साक्षी दोनों धाराओं को सम्मिलित करते हुए धारा १२१ से धारा १३१ पर्यन्त धाराओं के अधीन इन्कार करने का हकदार होता, और न न्यायाधीश कोई ऐसा प्रश्न पूछेगा जिसका पूछना किसी अन्य व्यक्ति के लिए धारा १४८ या दारा १४९ के अधीन अनुचित होता; और न वह एतस्मिनपूर्व अपवादित दशाओं के सिवाय किसी भी दस्तावेज के प्राथमिक साक्ष्य का दिया जाना अभिमुक्त करेगा ।
पूरा पढ़ें: IEA §165परन्तु निर्णय को उन तथ्यों पर, जो इस अधिनियम द्वारा सुसंगत घोषित किए गए है और जो सम्यक् रुप से साबित किए गए हों, आधारित होना होगा :
परन्तु यह भी कि न तो यह धारा न्यायाधीश को किसी साक्षी को किसी ऐसे प्रश्न का उत्तर देने के लिए या किसी ऐसी दस्तावेज को पेश करने को विवश करने के लिए प्राधिकृत करेगी, जिसका उत्तर देने से या जिसे पेश करने से, यदि प्रतिपक्षी द्वारा वह प्रश्न पूछा गया होता या वह दस्तावेज मंगाई गई होती, तो ऐसा साक्षी दोनों धाराओं को सम्मिलित करते हुए धारा १२१ से धारा १३१ पर्यन्त धाराओं के अधीन इन्कार करने का हकदार होता, और न न्यायाधीश कोई ऐसा प्रश्न पूछेगा जिसका पूछना किसी अन्य व्यक्ति के लिए धारा १४८ या दारा १४९ के अधीन अनुचित होता; और न वह एतस्मिनपूर्व अपवादित दशाओं के सिवाय किसी भी दस्तावेज के प्राथमिक साक्ष्य का दिया जाना अभिमुक्त करेगा ।
नया कानून
BSA §168
धारा 168: न्यायाधीश की प्रश्न पूछने या पेशी का आदेश देने की शक्ति
168. न्यायाधीश, प्रासंगिक तथ्यों की खोज करने या उनका सबूत प्राप्त करने के लिए, किसी भी रूप में, किसी भी समय, किसी गवाह से, या किसी तथ्य के बारे में पार्टियों से कोई भी प्रश्न पूछ सकता है जिसे वह आवश्यक समझता है; और किसी दस्तावेज़ या चीज़ के उत्पादन का आदेश दे सकता है; और न तो पक्ष और न ही उनके प्रतिनिधि ऐसे किसी भी प्रश्न या आदेश पर कोई आपत्ति करने के हकदार होंगे, न ही, न्यायालय की अनुमति के बिना, ऐसे किसी भी प्रश्न के उत्तर में दिए गए किसी भी गवाह से जिरह करने के हकदार होंगे:
बशर्ते कि निर्णय इस अधिनियम द्वारा प्रासंगिक घोषित किए गए तथ्यों पर आधारित होना चाहिए, और विधिवत साबित होना चाहिए:
बशर्ते कि यह धारा किसी भी न्यायाधीश को किसी भी गवाह को किसी भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए मजबूर करने, या कोई दस्तावेज पेश करने के लिए अधिकृत नहीं करेगी, जिसे ऐसा गवाह धारा 127 से 136 के तहत जवाब देने या पेश करने से इनकार करने का हकदार होगा, दोनों शामिल हैं, यदि प्रश्न पूछा गया था या दस्तावेज़ प्रतिकूल पक्ष द्वारा मांगा गया था; न ही न्यायाधीश कोई ऐसा प्रश्न पूछेगा जिसे धारा 151 या 152 के तहत पूछना किसी अन्य व्यक्ति के लिए अनुचित होगा; न ही वह किसी भी दस्तावेज़ के प्राथमिक साक्ष्य से छूट देगा, सिवाय इसके कि इससे पहले छोड़े गए मामलों को छोड़कर।
पूरा पढ़ें: BSA §168बशर्ते कि निर्णय इस अधिनियम द्वारा प्रासंगिक घोषित किए गए तथ्यों पर आधारित होना चाहिए, और विधिवत साबित होना चाहिए:
बशर्ते कि यह धारा किसी भी न्यायाधीश को किसी भी गवाह को किसी भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए मजबूर करने, या कोई दस्तावेज पेश करने के लिए अधिकृत नहीं करेगी, जिसे ऐसा गवाह धारा 127 से 136 के तहत जवाब देने या पेश करने से इनकार करने का हकदार होगा, दोनों शामिल हैं, यदि प्रश्न पूछा गया था या दस्तावेज़ प्रतिकूल पक्ष द्वारा मांगा गया था; न ही न्यायाधीश कोई ऐसा प्रश्न पूछेगा जिसे धारा 151 या 152 के तहत पूछना किसी अन्य व्यक्ति के लिए अनुचित होगा; न ही वह किसी भी दस्तावेज़ के प्राथमिक साक्ष्य से छूट देगा, सिवाय इसके कि इससे पहले छोड़े गए मामलों को छोड़कर।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
