पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IEA धारा 162 अब BSA धारा 165 है
दस्तावेजों को पेश किया जाना
पुराना कानून
IEA §162
दस्तावेजों को पेश किया जाना
किसी दस्तावेज को पेश करने के लिए समनित साक्षी, यदि वह उसके कब्जे में और शक्यधीन हो, ऐसे किसी आक्षेप के होने पर भी, जो उसे पेश करने या उसकी ग्राह्यता के बारे में हो, उसे न्यायालय में लाएगा । ऐसे किसी आक्षेप की विधिमान्यता न्यायालय द्वारा विनिश्चित की जाएगी ।
न्यायालय, यदि वह ठीक समझे, उस दस्तावेज का, यदि वह राज्य की बातों से संबंधित न हो, निरीक्षण कर सकेगा, या अपने को उसकी ग्राह्यता अवधारित करने के योग्य बनाने के लिए अन्य साक्ष्य ले सकेगा ।
दस्तावेजों का अनुवाद -
यदि ऐसे प्रयोजन के लिए किसी दस्तावेज का अनुवाद कराना आवश्यक हो तो न्यायालय, यदि वह ठिक समझे, अनुवादक को निर्देश दे सकेगा कि वह उसकी अन्तर्वस्तु को गुप्त रखे, सिवाय जबकि दस्तावेज को साक्ष्य में दिया जाना हो, तथा यदि अनुवादक ऐसे निर्देश की अवज्ञा करे, तो यह धारित किया जाएगा कि उसने भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) की धारा १६६ के अधीन अपराध किया है ।
पूरा पढ़ें: IEA §162न्यायालय, यदि वह ठीक समझे, उस दस्तावेज का, यदि वह राज्य की बातों से संबंधित न हो, निरीक्षण कर सकेगा, या अपने को उसकी ग्राह्यता अवधारित करने के योग्य बनाने के लिए अन्य साक्ष्य ले सकेगा ।
दस्तावेजों का अनुवाद -
यदि ऐसे प्रयोजन के लिए किसी दस्तावेज का अनुवाद कराना आवश्यक हो तो न्यायालय, यदि वह ठिक समझे, अनुवादक को निर्देश दे सकेगा कि वह उसकी अन्तर्वस्तु को गुप्त रखे, सिवाय जबकि दस्तावेज को साक्ष्य में दिया जाना हो, तथा यदि अनुवादक ऐसे निर्देश की अवज्ञा करे, तो यह धारित किया जाएगा कि उसने भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) की धारा १६६ के अधीन अपराध किया है ।
नया कानून
BSA §165
धारा 165: दस्तावेजों का उत्पादन
165. (1) किसी दस्तावेज़ को पेश करने के लिए बुलाया गया गवाह, यदि वह उसके कब्जे या शक्ति में है, तो उसे अदालत में लाएगा, भले ही इसके उत्पादन या इसकी स्वीकार्यता पर कोई आपत्ति हो:
बशर्ते कि ऐसी किसी भी आपत्ति की वैधता का निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
(2) न्यायालय, यदि उचित समझे, दस्तावेज़ का निरीक्षण कर सकता है, जब तक कि यह राज्य के मामलों को संदर्भित न करे, या इसकी स्वीकार्यता निर्धारित करने में सक्षम बनाने के लिए अन्य साक्ष्य ले सकता है।
(3) यदि ऐसे उद्देश्य के लिए किसी दस्तावेज़ का अनुवाद करना आवश्यक है, तो न्यायालय, यदि वह उचित समझे, अनुवादक को सामग्री को गुप्त रखने का निर्देश दे सकता है, जब तक कि दस्तावेज़ को साक्ष्य के रूप में नहीं दिया जाना हो और यदि दुभाषिया ऐसे निर्देश की अवहेलना करता है, तो उसे भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 198 के तहत अपराध माना जाएगा:
बशर्ते कि किसी भी न्यायालय को मंत्रियों और भारत के राष्ट्रपति के बीच किसी भी संचार को उसके समक्ष प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी।
पूरा पढ़ें: BSA §165बशर्ते कि ऐसी किसी भी आपत्ति की वैधता का निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
(2) न्यायालय, यदि उचित समझे, दस्तावेज़ का निरीक्षण कर सकता है, जब तक कि यह राज्य के मामलों को संदर्भित न करे, या इसकी स्वीकार्यता निर्धारित करने में सक्षम बनाने के लिए अन्य साक्ष्य ले सकता है।
(3) यदि ऐसे उद्देश्य के लिए किसी दस्तावेज़ का अनुवाद करना आवश्यक है, तो न्यायालय, यदि वह उचित समझे, अनुवादक को सामग्री को गुप्त रखने का निर्देश दे सकता है, जब तक कि दस्तावेज़ को साक्ष्य के रूप में नहीं दिया जाना हो और यदि दुभाषिया ऐसे निर्देश की अवहेलना करता है, तो उसे भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 198 के तहत अपराध माना जाएगा:
बशर्ते कि किसी भी न्यायालय को मंत्रियों और भारत के राष्ट्रपति के बीच किसी भी संचार को उसके समक्ष प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
