पाठ लगभग अपरिवर्तित है
IEA धारा 146 अब BSA धारा 149 है
प्रतिपरीक्षा में विधिपूर्ण प्रश्न
पुराना कानून
IEA §146
प्रतिपरीक्षा में विधिपूर्ण प्रश्न
जबकि किसी साक्षी से प्रतिपरीक्षा की जाती है, तब उससे एतस्मिनपूर्व निर्दिष्ट प्रश्नों के अतिरिक्त ऐसे कोई भी प्रश्न पूछे जा सकेंगे, जिनकी प्रवृत्ति -
१)उसकी सत्यवादिता परखने की है,
२)यह पता चलाने की है वह कौन है और जीवन में उसकी स्थिति क्या है, अथवा
३)उसके शील को दोष लगाकर उसकी विश्वसनीयता को धक्का पहुंचाने की है, चाहे ऐसे प्रश्नों का उत्तर उसे प्रत्यक्षत: या परोक्षत: अपराध में फंसाने की प्रवृत्ति रखता हो, या उसे किसी शास्ति या समपहरण (खो देना ) के लिए उच्छन्न करता हो या प्रत्यक्षत: या परोक्षत: उच्छन्न (खुला छोडना) करने की प्रवृत्ति रखता हो :
परन्तु भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) की धारा ३७६,१.(३७६-क, ३७६ कख, ३७६-ख, ३७६-ग, ३७६-घ, ३७६ घक, ३७६ घख) या धारा ३७६-ङ के अधीन किसी अपराध के लिए या ऐसे किसी अपराध को करने के प्रयत्न के लिए किसी अभियोजन में, जहाँ सम्मति का प्रश्न विवाद्य है, वहाँ पीडिता की प्रतिपरीक्षा में उसके साधारण अनैतिक आचरण या किसी व्यक्ति के साथ पूर्व लैंगिक अनुभव के बारे में ऐसे सम्मति या सम्मति की प्रकृति के लिए साक्ष्य देना या प्रश्नों को पूछना अनुज्ञेय नहीं होगा ।
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१. दंड विधि (संशोधन) अधिनियम, २०१८ (क्र. २२ सन २०१८) की धारा ९ द्वारा प्रतिस्थापित.(भारत का राजपत्र, असाधारण, भाग-२, खंड १, दिनांक ११-८-२०१८) पर अंग्रेजी में प्रकाशित ।
पूरा पढ़ें: IEA §146१)उसकी सत्यवादिता परखने की है,
२)यह पता चलाने की है वह कौन है और जीवन में उसकी स्थिति क्या है, अथवा
३)उसके शील को दोष लगाकर उसकी विश्वसनीयता को धक्का पहुंचाने की है, चाहे ऐसे प्रश्नों का उत्तर उसे प्रत्यक्षत: या परोक्षत: अपराध में फंसाने की प्रवृत्ति रखता हो, या उसे किसी शास्ति या समपहरण (खो देना ) के लिए उच्छन्न करता हो या प्रत्यक्षत: या परोक्षत: उच्छन्न (खुला छोडना) करने की प्रवृत्ति रखता हो :
परन्तु भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) की धारा ३७६,१.(३७६-क, ३७६ कख, ३७६-ख, ३७६-ग, ३७६-घ, ३७६ घक, ३७६ घख) या धारा ३७६-ङ के अधीन किसी अपराध के लिए या ऐसे किसी अपराध को करने के प्रयत्न के लिए किसी अभियोजन में, जहाँ सम्मति का प्रश्न विवाद्य है, वहाँ पीडिता की प्रतिपरीक्षा में उसके साधारण अनैतिक आचरण या किसी व्यक्ति के साथ पूर्व लैंगिक अनुभव के बारे में ऐसे सम्मति या सम्मति की प्रकृति के लिए साक्ष्य देना या प्रश्नों को पूछना अनुज्ञेय नहीं होगा ।
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१. दंड विधि (संशोधन) अधिनियम, २०१८ (क्र. २२ सन २०१८) की धारा ९ द्वारा प्रतिस्थापित.(भारत का राजपत्र, असाधारण, भाग-२, खंड १, दिनांक ११-८-२०१८) पर अंग्रेजी में प्रकाशित ।
नया कानून
BSA §149
जिरह के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्न वैध होते हैं।
जब किसी गवाह से जिरह की जाती है, तो उससे ऊपर उल्लिखित प्रश्नों के अतिरिक्त, कोई भी ऐसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं जो—
(क) उसकी सत्यता की परीक्षा लेने के लिए; या
(ख) यह पता लगाना कि वह कौन है और जीवन में उसकी क्या स्थिति है; या
(ग) उसके चरित्र को नुकसान पहुंचाकर उसकी साख को धूमिल करना, भले ही ऐसे प्रश्नों के उत्तर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसे अपराधी ठहरा सकते हों, या उसे किसी दंड या ज़ब्ती के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर कर सकते हों या उजागर करने की प्रवृत्ति रखते हों:
बशर्ते कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 69, धारा 70 या धारा 71 के तहत किसी अपराध के अभियोग में या ऐसे किसी अपराध को करने के प्रयास के अभियोग में, जहां सहमति का प्रश्न मुद्दा हो, ऐसी सहमति या सहमति की गुणवत्ता को साबित करने के लिए पीड़ित के सामान्य अनैतिक चरित्र या किसी अन्य व्यक्ति के साथ उसके पूर्व यौन अनुभव के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत करना या पीड़ित से जिरह में प्रश्न पूछना अनुमेय नहीं होगा।
पूरा पढ़ें: BSA §149(क) उसकी सत्यता की परीक्षा लेने के लिए; या
(ख) यह पता लगाना कि वह कौन है और जीवन में उसकी क्या स्थिति है; या
(ग) उसके चरित्र को नुकसान पहुंचाकर उसकी साख को धूमिल करना, भले ही ऐसे प्रश्नों के उत्तर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसे अपराधी ठहरा सकते हों, या उसे किसी दंड या ज़ब्ती के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर कर सकते हों या उजागर करने की प्रवृत्ति रखते हों:
बशर्ते कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 69, धारा 70 या धारा 71 के तहत किसी अपराध के अभियोग में या ऐसे किसी अपराध को करने के प्रयास के अभियोग में, जहां सहमति का प्रश्न मुद्दा हो, ऐसी सहमति या सहमति की गुणवत्ता को साबित करने के लिए पीड़ित के सामान्य अनैतिक चरित्र या किसी अन्य व्यक्ति के साथ उसके पूर्व यौन अनुभव के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत करना या पीड़ित से जिरह में प्रश्न पूछना अनुमेय नहीं होगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
