पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 452 अब BNSS धारा 498 है
धारा 452. विचारण की समाप्ति पर संपत्ति के व्ययन के लिए आदेश
पुराना कानून
CrPC §452
धारा 452. विचारण की समाप्ति पर संपत्ति के व्ययन के लिए आदेश
452. विचारण की समाप्ति पर संपत्ति के व्ययन के लिए आदेश
(1) जब किसी दंड न्यायालय में कोई जांच या विचारण समाप्त हो जाता है, तब न्यायालय किसी ऐसी संपत्ति या दस्तावेज के, जो उसके समक्ष पेश की गई है या उसकी अभिरक्षा में है, अथवा जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है, अथवा जो किसी अपराध के किए जाने के लिए उपयोग में लाई गई है, विनाश, अधिहरण, या उसके कब्जे का हकदार होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति को परिदान द्वारा, या अन्यथा, व्ययन के लिए ऐसा आदेश कर सकेगा जैसा वह ठीक समझे।
(2) उपधारा (1) के अधीन आदेश किसी संपत्ति के, उसके कब्जे का हकदार होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति को परिदान के लिए, बिना किसी शर्त के, अथवा इस शर्त पर किया जा सकेगा कि वह न्यायालय के समाधानप्रद रूप में प्रतिभुओं सहित या उनके बिना यह वचनबंध करते हुए बंधपत्र निष्पादित करे कि यदि उपधारा (1) के अधीन किया गया आदेश अपील या पुनरीक्षण में उपांतरित या अपास्त कर दिया जाता है तो वह ऐसी संपत्ति न्यायालय को प्रत्यावर्तित कर देगा।
(3) सेशन न्यायालय, उपधारा (1) के अधीन स्वयं आदेश करने के बजाय, यह निदेश दे सकेगा कि संपत्ति मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को परिदत्त कर दी जाए, जो तब उससे धारा 457, धारा 458 और धारा 459 में उपबंधित रीति से कार्यवाही करेगा।
(4) जहां संपत्ति पशुधन है या शीघ्र और प्राकृतिक क्षय के अधीन है, अथवा जहां उपधारा (2) के अनुसरण में बंधपत्र निष्पादित किया गया है, उसके सिवाय, उपधारा (1) के अधीन किया गया आदेश दो मास तक, अथवा जब अपील पेश की जाती है तब ऐसी अपील का निपटारा हो जाने तक, कार्यान्वित नहीं किया जाएगा।
(5) इस धारा में, "संपत्ति" पद के अंतर्गत, ऐसी संपत्ति की दशा में जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है, न केवल वह संपत्ति है जो मूलतः किसी पक्षकार के कब्जे में या नियंत्रण में रही है, बल्कि कोई ऐसी संपत्ति भी है जिसमें या जिसके लिए वह संपरिवर्तित या विनिमयित की गई हो, तथा ऐसे संपरिवर्तन या विनिमय द्वारा अर्जित कोई वस्तु भी है, चाहे वह अव्यवहित रूप से अर्जित की गई हो या अन्यथा।
पूरा पढ़ें: CrPC §452(1) जब किसी दंड न्यायालय में कोई जांच या विचारण समाप्त हो जाता है, तब न्यायालय किसी ऐसी संपत्ति या दस्तावेज के, जो उसके समक्ष पेश की गई है या उसकी अभिरक्षा में है, अथवा जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है, अथवा जो किसी अपराध के किए जाने के लिए उपयोग में लाई गई है, विनाश, अधिहरण, या उसके कब्जे का हकदार होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति को परिदान द्वारा, या अन्यथा, व्ययन के लिए ऐसा आदेश कर सकेगा जैसा वह ठीक समझे।
(2) उपधारा (1) के अधीन आदेश किसी संपत्ति के, उसके कब्जे का हकदार होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति को परिदान के लिए, बिना किसी शर्त के, अथवा इस शर्त पर किया जा सकेगा कि वह न्यायालय के समाधानप्रद रूप में प्रतिभुओं सहित या उनके बिना यह वचनबंध करते हुए बंधपत्र निष्पादित करे कि यदि उपधारा (1) के अधीन किया गया आदेश अपील या पुनरीक्षण में उपांतरित या अपास्त कर दिया जाता है तो वह ऐसी संपत्ति न्यायालय को प्रत्यावर्तित कर देगा।
(3) सेशन न्यायालय, उपधारा (1) के अधीन स्वयं आदेश करने के बजाय, यह निदेश दे सकेगा कि संपत्ति मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को परिदत्त कर दी जाए, जो तब उससे धारा 457, धारा 458 और धारा 459 में उपबंधित रीति से कार्यवाही करेगा।
(4) जहां संपत्ति पशुधन है या शीघ्र और प्राकृतिक क्षय के अधीन है, अथवा जहां उपधारा (2) के अनुसरण में बंधपत्र निष्पादित किया गया है, उसके सिवाय, उपधारा (1) के अधीन किया गया आदेश दो मास तक, अथवा जब अपील पेश की जाती है तब ऐसी अपील का निपटारा हो जाने तक, कार्यान्वित नहीं किया जाएगा।
(5) इस धारा में, "संपत्ति" पद के अंतर्गत, ऐसी संपत्ति की दशा में जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है, न केवल वह संपत्ति है जो मूलतः किसी पक्षकार के कब्जे में या नियंत्रण में रही है, बल्कि कोई ऐसी संपत्ति भी है जिसमें या जिसके लिए वह संपरिवर्तित या विनिमयित की गई हो, तथा ऐसे संपरिवर्तन या विनिमय द्वारा अर्जित कोई वस्तु भी है, चाहे वह अव्यवहित रूप से अर्जित की गई हो या अन्यथा।
नया कानून
BNSS §498
मुकदमे की समाप्ति पर संपत्ति के निपटान का आदेश।
(1) जब किसी आपराधिक मामले में जांच, पूछताछ या मुकदमा समाप्त हो जाता है, तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट किसी ऐसी संपत्ति या दस्तावेज के निपटान के लिए, जिसे उसके समक्ष प्रस्तुत किया गया हो या उसकी हिरासत में हो, या जिसके संबंध में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता हो, या जिसका उपयोग किसी अपराध को करने के लिए किया गया हो, ऐसा आदेश दे सकता है जैसा वह उचित समझे, चाहे वह नष्ट करने, जब्त करने या किसी ऐसे व्यक्ति को सौंपने के द्वारा हो जो उस पर कब्जा रखने का हकदार होने का दावा करता हो या अन्यथा।
(2) उपधारा (1) के तहत किसी संपत्ति को किसी ऐसे व्यक्ति को सौंपने का आदेश दिया जा सकता है जो उस पर कब्ज़ा रखने का हकदार होने का दावा करता है, बिना किसी शर्त के या इस शर्त पर कि वह न्यायालय या मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के अनुसार, प्रतिभूतियों के साथ या बिना प्रतिभूतियों के, एक बांड निष्पादित करे, जिसमें वह यह वचन दे कि यदि उपधारा (1) के तहत दिया गया आदेश अपील या पुनरीक्षण पर संशोधित या निरस्त किया जाता है, तो वह ऐसी संपत्ति न्यायालय को लौटा देगा।
(3) सत्र न्यायालय, उपधारा (1) के तहत स्वयं आदेश देने के बजाय, संपत्ति को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंपने का निर्देश दे सकता है, जो इसके बाद धारा 503, 504 और 505 में दिए गए तरीके से उससे निपटेगा।
(4) सिवाय इसके कि संपत्ति पशुधन हो या शीघ्र और प्राकृतिक क्षय के अधीन हो, या जहां उप-धारा (2) के अनुसरण में बांड निष्पादित किया गया हो, उप-धारा (1) के तहत दिया गया आदेश दो महीने तक, या जब कोई अपील प्रस्तुत की जाती है, तब तक, जब तक ऐसी अपील का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक निष्पादित नहीं किया जाएगा।
(5) इस धारा में, "संपत्ति" शब्द में, उस संपत्ति के मामले में जिसके संबंध में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है, न केवल ऐसी संपत्ति शामिल है जो मूल रूप से किसी पक्ष के कब्जे में या नियंत्रण में रही हो, बल्कि ऐसी कोई संपत्ति भी शामिल है जिसमें या जिसके लिए इसे परिवर्तित या विनिमय किया गया हो, और ऐसी रूपांतरण या विनिमय द्वारा प्राप्त कोई भी वस्तु, चाहे तत्काल या अन्यथा।
पूरा पढ़ें: BNSS §498(2) उपधारा (1) के तहत किसी संपत्ति को किसी ऐसे व्यक्ति को सौंपने का आदेश दिया जा सकता है जो उस पर कब्ज़ा रखने का हकदार होने का दावा करता है, बिना किसी शर्त के या इस शर्त पर कि वह न्यायालय या मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के अनुसार, प्रतिभूतियों के साथ या बिना प्रतिभूतियों के, एक बांड निष्पादित करे, जिसमें वह यह वचन दे कि यदि उपधारा (1) के तहत दिया गया आदेश अपील या पुनरीक्षण पर संशोधित या निरस्त किया जाता है, तो वह ऐसी संपत्ति न्यायालय को लौटा देगा।
(3) सत्र न्यायालय, उपधारा (1) के तहत स्वयं आदेश देने के बजाय, संपत्ति को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंपने का निर्देश दे सकता है, जो इसके बाद धारा 503, 504 और 505 में दिए गए तरीके से उससे निपटेगा।
(4) सिवाय इसके कि संपत्ति पशुधन हो या शीघ्र और प्राकृतिक क्षय के अधीन हो, या जहां उप-धारा (2) के अनुसरण में बांड निष्पादित किया गया हो, उप-धारा (1) के तहत दिया गया आदेश दो महीने तक, या जब कोई अपील प्रस्तुत की जाती है, तब तक, जब तक ऐसी अपील का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक निष्पादित नहीं किया जाएगा।
(5) इस धारा में, "संपत्ति" शब्द में, उस संपत्ति के मामले में जिसके संबंध में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है, न केवल ऐसी संपत्ति शामिल है जो मूल रूप से किसी पक्ष के कब्जे में या नियंत्रण में रही हो, बल्कि ऐसी कोई संपत्ति भी शामिल है जिसमें या जिसके लिए इसे परिवर्तित या विनिमय किया गया हो, और ऐसी रूपांतरण या विनिमय द्वारा प्राप्त कोई भी वस्तु, चाहे तत्काल या अन्यथा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
