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CrPC धारा 439 अब BNSS धारा 483 है
धारा 439. जमानत के बारे में उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय की विशेष शक्तियां
पुराना कानून
CrPC §439
धारा 439. जमानत के बारे में उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय की विशेष शक्तियां
439. जमानत के बारे में उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय की विशेष शक्तियां
(1) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय यह निदेश दे सकेगा—
(क) कि किसी अपराध का अभियुक्त और अभिरक्षा में का कोई व्यक्ति जमानत पर छोड़ दिया जाए, और यदि अपराध धारा 437 की उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट प्रकृति का है, तो वह कोई ऐसी शर्त अधिरोपित कर सकेगा जो वह उस उपधारा में वर्णित प्रयोजनों के लिए आवश्यक समझे;
(ख) कि किसी व्यक्ति को जमानत पर छोड़ते समय मजिस्ट्रेट द्वारा अधिरोपित कोई शर्त अपास्त या उपांतरित कर दी जाए:
परन्तु उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय ऐसे व्यक्ति को, जो ऐसे अपराध का अभियुक्त है जो केवल सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है या जो, यद्यपि इस प्रकार विचारणीय नहीं है, फिर भी आजीवन कारावास से दंडनीय है, जमानत मंजूर करने से पूर्व जमानत के आवेदन की सूचना लोक अभियोजक को देगा, जब तक कि लिखित रूप में लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से उसकी यह राय न हो कि ऐसी सूचना देना साध्य नहीं है।
(2) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय यह निदेश दे सकेगा कि कोई ऐसा व्यक्ति, जो इस अध्याय के अधीन जमानत पर छोड़ा गया है, गिरफ्तार कर लिया जाए, और उसे अभिरक्षा में सुपुर्द कर सकेगा।
राज्य संशोधन
पंजाब और संघ राज्यक्षेत्र चंडीगढ़—
धारा 439 के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"439क. इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति—
(क) जो निम्नलिखित धाराओं में से किसी के अधीन, अर्थात् भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 120ख, 121, 121क, 122, 123, 124क, 153क, 302, 304, 307, 326, 333, 363, 364, 365, 367, 368, 392, 394, 395, 396, 399, 412, 431, 436, 449 और 450, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 3, 4, 5 और 6 तथा आयुध अधिनियम, 1959 की धारा 25, 26, 27, 28, 29, 30 और 31 के अधीन अपराध करने का अभियुक्त या संदिग्ध होते हुए गिरफ्तार किया जाता है या हाजिर होता है या किसी न्यायालय के समक्ष लाया जाता है; या
(ख) जिसे यह विश्वास करने का कोई कारण है कि वह खंड (क) में विनिर्दिष्ट कोई अपराध करने के अभियोग पर गिरफ्तार किया जा सकता है और जिसने अपनी गिरफ्तारी की दशा में जमानत पर छोड़े जाने के निदेश के लिए उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय को आवेदन किया है,
निम्नलिखित आधारों में से एक या अधिक के सिवाय, जमानत पर न छोड़ा जाएगा या, यथास्थिति, जमानत पर छोड़े जाने का निदेश न दिया जाएगा, अर्थात्:—
(i) यह कि उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय सहित न्यायालय का, लिखित रूप में लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, यह समाधान हो जाता है कि यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त आधार हैं कि ऐसा व्यक्ति खंड (क) में विनिर्दिष्ट किसी अपराध का दोषी नहीं है;
(ii) यह कि ऐसा व्यक्ति सोलह वर्ष से कम आयु का है या स्त्री है या रुग्ण या अशक्त व्यक्ति है;
(iii) यह कि उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय सहित न्यायालय का, लिखित रूप में लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, यह समाधान हो जाता है कि अभियुक्त को जमानत पर छोड़ने या छोड़े जाने का निदेश देने के लिए असाधारण और पर्याप्त आधार हैं।"
त्रिपुरा—
धारा 439 के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"439क. जमानत मंजूर करने की शक्ति—इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति—
(क) जो भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45) की धारा 120ख, 121, 121क, 122, 123, 124क, 153क, 302, 303, 304, 307, 326, 333, 364, 365, 366, 366क, 366ख, 367, 368, 376, 386, 387, 392, 394, 395, 396, 397, 399, 412, 436, 449 और 450 तथा आयुध अधिनियम, 1959 (1959 का 54) की धारा 25, 26, 27 और 28 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 (1908 का 6) की धारा 3, 4, 5 और 6 के अधीन अपराध करने का अभियुक्त या संदिग्ध होते हुए गिरफ्तार किया जाता है या हाजिर होता है या किसी न्यायालय के समक्ष लाया जाता है; या
(ख) जिसे यह विश्वास करने का कोई कारण है कि वह खंड (क) में विनिर्दिष्ट कोई अपराध करने के अभियोग पर गिरफ्तार किया जा सकता है और जिसने अपनी गिरफ्तारी की दशा में जमानत पर छोड़े जाने के निदेश के लिए उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय को आवेदन किया है,
निम्नलिखित आधारों में से एक या अधिक के सिवाय, जमानत पर न छोड़ा जाएगा या, यथास्थिति, जमानत पर छोड़े जाने का निदेश न दिया जाएगा, अर्थात्:—
(i) यह कि उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय सहित न्यायालय का, लिखित रूप में लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, यह समाधान हो जाता है कि यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त आधार हैं कि ऐसा व्यक्ति खंड (क) में विनिर्दिष्ट किसी अपराध का दोषी नहीं है;
(ii) यह कि ऐसा व्यक्ति सोलह वर्ष से कम आयु का है या स्त्री है या रुग्ण या अशक्त व्यक्ति है;
(iii) यह कि उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय सहित न्यायालय का, लिखित रूप में लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, यह समाधान हो जाता है कि अभियुक्त को जमानत पर छोड़ने या छोड़े जाने का निदेश देने के लिए असाधारण और पर्याप्त आधार हैं।"
पूरा पढ़ें: CrPC §439(1) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय यह निदेश दे सकेगा—
(क) कि किसी अपराध का अभियुक्त और अभिरक्षा में का कोई व्यक्ति जमानत पर छोड़ दिया जाए, और यदि अपराध धारा 437 की उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट प्रकृति का है, तो वह कोई ऐसी शर्त अधिरोपित कर सकेगा जो वह उस उपधारा में वर्णित प्रयोजनों के लिए आवश्यक समझे;
(ख) कि किसी व्यक्ति को जमानत पर छोड़ते समय मजिस्ट्रेट द्वारा अधिरोपित कोई शर्त अपास्त या उपांतरित कर दी जाए:
परन्तु उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय ऐसे व्यक्ति को, जो ऐसे अपराध का अभियुक्त है जो केवल सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है या जो, यद्यपि इस प्रकार विचारणीय नहीं है, फिर भी आजीवन कारावास से दंडनीय है, जमानत मंजूर करने से पूर्व जमानत के आवेदन की सूचना लोक अभियोजक को देगा, जब तक कि लिखित रूप में लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से उसकी यह राय न हो कि ऐसी सूचना देना साध्य नहीं है।
(2) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय यह निदेश दे सकेगा कि कोई ऐसा व्यक्ति, जो इस अध्याय के अधीन जमानत पर छोड़ा गया है, गिरफ्तार कर लिया जाए, और उसे अभिरक्षा में सुपुर्द कर सकेगा।
राज्य संशोधन
पंजाब और संघ राज्यक्षेत्र चंडीगढ़—
धारा 439 के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"439क. इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति—
(क) जो निम्नलिखित धाराओं में से किसी के अधीन, अर्थात् भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 120ख, 121, 121क, 122, 123, 124क, 153क, 302, 304, 307, 326, 333, 363, 364, 365, 367, 368, 392, 394, 395, 396, 399, 412, 431, 436, 449 और 450, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 3, 4, 5 और 6 तथा आयुध अधिनियम, 1959 की धारा 25, 26, 27, 28, 29, 30 और 31 के अधीन अपराध करने का अभियुक्त या संदिग्ध होते हुए गिरफ्तार किया जाता है या हाजिर होता है या किसी न्यायालय के समक्ष लाया जाता है; या
(ख) जिसे यह विश्वास करने का कोई कारण है कि वह खंड (क) में विनिर्दिष्ट कोई अपराध करने के अभियोग पर गिरफ्तार किया जा सकता है और जिसने अपनी गिरफ्तारी की दशा में जमानत पर छोड़े जाने के निदेश के लिए उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय को आवेदन किया है,
निम्नलिखित आधारों में से एक या अधिक के सिवाय, जमानत पर न छोड़ा जाएगा या, यथास्थिति, जमानत पर छोड़े जाने का निदेश न दिया जाएगा, अर्थात्:—
(i) यह कि उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय सहित न्यायालय का, लिखित रूप में लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, यह समाधान हो जाता है कि यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त आधार हैं कि ऐसा व्यक्ति खंड (क) में विनिर्दिष्ट किसी अपराध का दोषी नहीं है;
(ii) यह कि ऐसा व्यक्ति सोलह वर्ष से कम आयु का है या स्त्री है या रुग्ण या अशक्त व्यक्ति है;
(iii) यह कि उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय सहित न्यायालय का, लिखित रूप में लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, यह समाधान हो जाता है कि अभियुक्त को जमानत पर छोड़ने या छोड़े जाने का निदेश देने के लिए असाधारण और पर्याप्त आधार हैं।"
त्रिपुरा—
धारा 439 के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"439क. जमानत मंजूर करने की शक्ति—इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति—
(क) जो भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45) की धारा 120ख, 121, 121क, 122, 123, 124क, 153क, 302, 303, 304, 307, 326, 333, 364, 365, 366, 366क, 366ख, 367, 368, 376, 386, 387, 392, 394, 395, 396, 397, 399, 412, 436, 449 और 450 तथा आयुध अधिनियम, 1959 (1959 का 54) की धारा 25, 26, 27 और 28 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 (1908 का 6) की धारा 3, 4, 5 और 6 के अधीन अपराध करने का अभियुक्त या संदिग्ध होते हुए गिरफ्तार किया जाता है या हाजिर होता है या किसी न्यायालय के समक्ष लाया जाता है; या
(ख) जिसे यह विश्वास करने का कोई कारण है कि वह खंड (क) में विनिर्दिष्ट कोई अपराध करने के अभियोग पर गिरफ्तार किया जा सकता है और जिसने अपनी गिरफ्तारी की दशा में जमानत पर छोड़े जाने के निदेश के लिए उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय को आवेदन किया है,
निम्नलिखित आधारों में से एक या अधिक के सिवाय, जमानत पर न छोड़ा जाएगा या, यथास्थिति, जमानत पर छोड़े जाने का निदेश न दिया जाएगा, अर्थात्:—
(i) यह कि उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय सहित न्यायालय का, लिखित रूप में लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, यह समाधान हो जाता है कि यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त आधार हैं कि ऐसा व्यक्ति खंड (क) में विनिर्दिष्ट किसी अपराध का दोषी नहीं है;
(ii) यह कि ऐसा व्यक्ति सोलह वर्ष से कम आयु का है या स्त्री है या रुग्ण या अशक्त व्यक्ति है;
(iii) यह कि उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय सहित न्यायालय का, लिखित रूप में लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, यह समाधान हो जाता है कि अभियुक्त को जमानत पर छोड़ने या छोड़े जाने का निदेश देने के लिए असाधारण और पर्याप्त आधार हैं।"
नया कानून
BNSS §483
जमानत के संबंध में उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय की विशेष शक्तियां।
(1) उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय निर्देश दे सकता है,---
(क) किसी अपराध के आरोपी और हिरासत में लिए गए किसी व्यक्ति को जमानत पर रिहा किया जाए, और यदि अपराध धारा 480 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रकृति का है, तो वह ऐसी कोई शर्त लगा सकता है जिसे वह उस उपधारा में उल्लिखित उद्देश्यों के लिए आवश्यक समझता है;
(ख) किसी मजिस्ट्रेट द्वारा किसी व्यक्ति को जमानत पर रिहा करते समय लगाई गई कोई शर्त निरस्त या संशोधित की जाए:
बशर्ते कि उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय, किसी ऐसे व्यक्ति को जमानत देने से पहले, जिस पर ऐसे अपराध का आरोप है जो केवल सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है या जो सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय न होते हुए भी आजीवन कारावास से दंडनीय है, लोक अभियोजक को जमानत आवेदन की सूचना देगा, जब तक कि लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से यह राय न हो कि ऐसी सूचना देना व्यावहारिक नहीं है।
इसके अलावा, उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 65 या धारा 70 की उपधारा (2) के तहत विचारणीय अपराध के आरोपी व्यक्ति को जमानत देने से पहले, जमानत आवेदन की सूचना लोक अभियोजक को ऐसे आवेदन की सूचना प्राप्त होने की तिथि से पंद्रह दिनों की अवधि के भीतर देगा।
(2) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 65 या धारा 70 की उपधारा (2) के तहत किसी व्यक्ति को जमानत के लिए आवेदन की सुनवाई के समय मुखबिर या उसके द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
(3) उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय यह निर्देश दे सकता है कि इस अध्याय के अंतर्गत जमानत पर रिहा किए गए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाए और उसे हिरासत में भेज दिया जाए।
पूरा पढ़ें: BNSS §483(क) किसी अपराध के आरोपी और हिरासत में लिए गए किसी व्यक्ति को जमानत पर रिहा किया जाए, और यदि अपराध धारा 480 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रकृति का है, तो वह ऐसी कोई शर्त लगा सकता है जिसे वह उस उपधारा में उल्लिखित उद्देश्यों के लिए आवश्यक समझता है;
(ख) किसी मजिस्ट्रेट द्वारा किसी व्यक्ति को जमानत पर रिहा करते समय लगाई गई कोई शर्त निरस्त या संशोधित की जाए:
बशर्ते कि उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय, किसी ऐसे व्यक्ति को जमानत देने से पहले, जिस पर ऐसे अपराध का आरोप है जो केवल सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है या जो सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय न होते हुए भी आजीवन कारावास से दंडनीय है, लोक अभियोजक को जमानत आवेदन की सूचना देगा, जब तक कि लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से यह राय न हो कि ऐसी सूचना देना व्यावहारिक नहीं है।
इसके अलावा, उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 65 या धारा 70 की उपधारा (2) के तहत विचारणीय अपराध के आरोपी व्यक्ति को जमानत देने से पहले, जमानत आवेदन की सूचना लोक अभियोजक को ऐसे आवेदन की सूचना प्राप्त होने की तिथि से पंद्रह दिनों की अवधि के भीतर देगा।
(2) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 65 या धारा 70 की उपधारा (2) के तहत किसी व्यक्ति को जमानत के लिए आवेदन की सुनवाई के समय मुखबिर या उसके द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
(3) उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय यह निर्देश दे सकता है कि इस अध्याय के अंतर्गत जमानत पर रिहा किए गए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाए और उसे हिरासत में भेज दिया जाए।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
