पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 41(2) अब BNSS धारा 35(2) है
धारा 41. पुलिस वारंट के बिना कब गिरफ्तार कर सकेगी
पुराना कानून
CrPC §41(2)
धारा 41. पुलिस वारंट के बिना कब गिरफ्तार कर सकेगी
41. पुलिस वारंट के बिना कब गिरफ्तार कर सकेगी
(1) कोई पुलिस अधिकारी, मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना और वारंट के बिना, ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा—
(क) जो किसी पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में कोई संज्ञेय अपराध करता है;
(ख) जिसके विरुद्ध युक्तियुक्त परिवाद किया गया है, या विश्वसनीय इत्तिला मिली है, या युक्तियुक्त संदेह विद्यमान है कि उसने ऐसा संज्ञेय अपराध किया है, जो कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम हो सकती है या सात वर्ष तक की हो सकती है, चाहे वह जुर्माने सहित हो या रहित, दंडनीय है, यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं, अर्थात्:—
(i) पुलिस अधिकारी को ऐसे परिवाद, इत्तिला या संदेह के आधार पर यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसे व्यक्ति ने उक्त अपराध किया है;
(ii) पुलिस अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी गिरफ्तारी आवश्यक है— (क) ऐसे व्यक्ति को और कोई अपराध करने से निवारित करने के लिए; या (ख) अपराध के समुचित अन्वेषण के लिए; या (ग) ऐसे व्यक्ति को अपराध के साक्ष्य को लुप्त करने से या ऐसे साक्ष्य से किसी रीति से छेड़छाड़ करने से निवारित करने के लिए; या (घ) ऐसे व्यक्ति को मामले के तथ्यों से परिचित किसी व्यक्ति को कोई उत्प्रेरणा, धमकी या वचन देने से, जिससे कि वह ऐसे तथ्यों को न्यायालय के या पुलिस अधिकारी के समक्ष प्रकट करने से विरत हो, निवारित करने के लिए; या (ङ) इस कारण कि जब तक ऐसा व्यक्ति गिरफ्तार न किया जाए, जब कभी अपेक्षित हो, न्यायालय में उसकी उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की जा सकती,
और पुलिस अधिकारी ऐसी गिरफ्तारी करते समय अपने कारण लेखबद्ध करेगा।
परन्तु पुलिस अधिकारी उन सभी मामलों में, जहां इस उपधारा के उपबंधों के अधीन किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपेक्षित नहीं है, गिरफ्तारी न करने के कारण लेखबद्ध करेगा।
(खक) जिसके विरुद्ध यह विश्वसनीय इत्तिला मिली है कि उसने ऐसा संज्ञेय अपराध किया है, जो कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से अधिक हो सकती है, चाहे वह जुर्माने सहित हो या रहित, या मृत्यु के दंडादेश से दंडनीय है, और पुलिस अधिकारी को उस इत्तिला के आधार पर यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसे व्यक्ति ने उक्त अपराध किया है;
(2) धारा 42 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई ऐसा व्यक्ति, जो किसी असंज्ञेय अपराध से संबद्ध है, या जिसके विरुद्ध कोई परिवाद किया गया है, या विश्वसनीय इत्तिला मिली है, या युक्तियुक्त संदेह विद्यमान है कि वह इस प्रकार संबद्ध रहा है, मजिस्ट्रेट के वारंट या आदेश के अधीन ही गिरफ्तार किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
पूरा पढ़ें: CrPC §41(2)(1) कोई पुलिस अधिकारी, मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना और वारंट के बिना, ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा—
(क) जो किसी पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में कोई संज्ञेय अपराध करता है;
(ख) जिसके विरुद्ध युक्तियुक्त परिवाद किया गया है, या विश्वसनीय इत्तिला मिली है, या युक्तियुक्त संदेह विद्यमान है कि उसने ऐसा संज्ञेय अपराध किया है, जो कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम हो सकती है या सात वर्ष तक की हो सकती है, चाहे वह जुर्माने सहित हो या रहित, दंडनीय है, यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं, अर्थात्:—
(i) पुलिस अधिकारी को ऐसे परिवाद, इत्तिला या संदेह के आधार पर यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसे व्यक्ति ने उक्त अपराध किया है;
(ii) पुलिस अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी गिरफ्तारी आवश्यक है— (क) ऐसे व्यक्ति को और कोई अपराध करने से निवारित करने के लिए; या (ख) अपराध के समुचित अन्वेषण के लिए; या (ग) ऐसे व्यक्ति को अपराध के साक्ष्य को लुप्त करने से या ऐसे साक्ष्य से किसी रीति से छेड़छाड़ करने से निवारित करने के लिए; या (घ) ऐसे व्यक्ति को मामले के तथ्यों से परिचित किसी व्यक्ति को कोई उत्प्रेरणा, धमकी या वचन देने से, जिससे कि वह ऐसे तथ्यों को न्यायालय के या पुलिस अधिकारी के समक्ष प्रकट करने से विरत हो, निवारित करने के लिए; या (ङ) इस कारण कि जब तक ऐसा व्यक्ति गिरफ्तार न किया जाए, जब कभी अपेक्षित हो, न्यायालय में उसकी उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की जा सकती,
और पुलिस अधिकारी ऐसी गिरफ्तारी करते समय अपने कारण लेखबद्ध करेगा।
परन्तु पुलिस अधिकारी उन सभी मामलों में, जहां इस उपधारा के उपबंधों के अधीन किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपेक्षित नहीं है, गिरफ्तारी न करने के कारण लेखबद्ध करेगा।
(खक) जिसके विरुद्ध यह विश्वसनीय इत्तिला मिली है कि उसने ऐसा संज्ञेय अपराध किया है, जो कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से अधिक हो सकती है, चाहे वह जुर्माने सहित हो या रहित, या मृत्यु के दंडादेश से दंडनीय है, और पुलिस अधिकारी को उस इत्तिला के आधार पर यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसे व्यक्ति ने उक्त अपराध किया है;
(2) धारा 42 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई ऐसा व्यक्ति, जो किसी असंज्ञेय अपराध से संबद्ध है, या जिसके विरुद्ध कोई परिवाद किया गया है, या विश्वसनीय इत्तिला मिली है, या युक्तियुक्त संदेह विद्यमान है कि वह इस प्रकार संबद्ध रहा है, मजिस्ट्रेट के वारंट या आदेश के अधीन ही गिरफ्तार किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
नया कानून
BNSS §35(2)
पुलिस बिना वारंट के कब गिरफ्तार कर सकती है?
(1) कोई भी पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना और वारंट के बिना किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है—
(क) जो किसी पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में संज्ञेय अपराध करता है; या
(ख) जिसके विरुद्ध उचित शिकायत की गई हो, या विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई हो, या यह उचित संदेह हो कि उसने संज्ञेय अपराध किया है जिसके लिए सात वर्ष से कम या सात वर्ष तक कारावास की सजा हो सकती है, चाहे जुर्माना सहित हो या बिना जुर्माना के, यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं, अर्थात्:—
(i) पुलिस अधिकारी को ऐसी शिकायत, सूचना या संदेह के आधार पर यह विश्वास करने का कारण है कि उक्त व्यक्ति ने उक्त अपराध किया है;
(ii) पुलिस अधिकारी संतुष्ट है कि ऐसी गिरफ्तारी आवश्यक है—
(क) ऐसे व्यक्ति को आगे कोई अपराध करने से रोकने के लिए; या
(ख) अपराध की उचित जांच के लिए; या
(ग) ऐसे व्यक्ति को अपराध के साक्ष्य को लुप्त करने या किसी भी प्रकार से ऐसे साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ करने से रोकना; या
(घ) ऐसे व्यक्ति को मामले के तथ्यों से परिचित किसी व्यक्ति को प्रलोभन, धमकी या वादा करने से रोकना ताकि वह न्यायालय या पुलिस अधिकारी के समक्ष ऐसे तथ्यों का खुलासा करने से हतोत्साहित हो; या
(ई) चूंकि जब तक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक न्यायालय में उसकी उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की जा सकती, और पुलिस अधिकारी ऐसी गिरफ्तारी करते समय अपने कारणों को लिखित रूप में दर्ज करेगा।
बशर्ते कि पुलिस अधिकारी उन सभी मामलों में, जहां इस उपधारा के प्रावधानों के तहत किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है, गिरफ्तारी न करने के कारणों को लिखित रूप में दर्ज करेगा; या
(ग) जिसके विरुद्ध विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई हो कि उसने संज्ञेय अपराध किया है, जिसके लिए सात वर्ष से अधिक की कारावास की सजा हो सकती है, चाहे जुर्माने के साथ हो या बिना जुर्माने के, या मृत्युदंड हो, और पुलिस अधिकारी को उस सूचना के आधार पर यह विश्वास करने का कारण हो कि ऐसे व्यक्ति ने उक्त अपराध किया है; या
(घ) जिसे इस संहिता के तहत या राज्य सरकार के आदेश द्वारा अपराधी घोषित किया गया हो; या
(ई) जिसके कब्जे में कोई ऐसी वस्तु पाई जाती है जिस पर चोरी की संपत्ति होने का उचित संदेह हो और जिस पर ऐसी वस्तु के संबंध में अपराध करने का उचित संदेह हो; या
(f) जो किसी पुलिस अधिकारी को उसके कर्तव्य पालन में बाधा डालता है, या जो वैध हिरासत से भाग गया है, या भागने का प्रयास करता है; या
(जी) जिस पर संघ के सशस्त्र बलों में से किसी से भगोड़ा होने का उचित संदेह हो; या
(h) जो भारत के बाहर किसी स्थान पर किए गए किसी ऐसे कृत्य में संलिप्त रहा हो, या जिसके विरुद्ध कोई उचित शिकायत की गई हो, या विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई हो, या उसके संलिप्त होने का उचित संदेह मौजूद हो, जो यदि भारत में किया जाता तो अपराध के रूप में दंडनीय होता, और जिसके लिए वह प्रत्यर्पण संबंधी किसी कानून के तहत, या अन्यथा, भारत में गिरफ्तार या हिरासत में लिया जा सकता है; या
(i) जो रिहा किया गया दोषी होते हुए धारा 394 की उपधारा (5) के तहत बनाए गए किसी नियम का उल्लंघन करता है; या
(j) जिसकी गिरफ्तारी के लिए किसी अन्य पुलिस अधिकारी से लिखित या मौखिक रूप से कोई अनुरोध प्राप्त हुआ हो, बशर्ते कि अनुरोध में गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति और उस अपराध या अन्य कारण का उल्लेख हो जिसके लिए गिरफ्तारी की जानी है और उससे यह प्रतीत होता हो कि अनुरोध जारी करने वाले अधिकारी द्वारा उस व्यक्ति को बिना वारंट के कानूनी रूप से गिरफ्तार किया जा सकता है।
(2) धारा 39 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी गैर-संज्ञेय अपराध में शामिल व्यक्ति, या जिसके विरुद्ध शिकायत की गई हो, या जिसके विरुद्ध विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई हो, या जिसके इस प्रकार अपराध में शामिल होने का उचित संदेह हो, को मजिस्ट्रेट के वारंट या आदेश के बिना गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
(3) पुलिस अधिकारी उन सभी मामलों में, जहाँ उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है, उस व्यक्ति को नोटिस जारी करेगा जिसके विरुद्ध उचित शिकायत की गई हो, या विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई हो, या यह उचित संदेह हो कि उसने संज्ञेय अपराध किया है, कि वह उसके समक्ष या नोटिस में निर्दिष्ट किसी अन्य स्थान पर उपस्थित हो।
(4) जहाँ किसी व्यक्ति को ऐसा नोटिस जारी किया जाता है, तो उस व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह नोटिस की शर्तों का पालन करे।
(5) यदि ऐसा व्यक्ति नोटिस का पालन करता है और लगातार पालन करता रहता है, तो उसे नोटिस में उल्लिखित अपराध के संबंध में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक कि दर्ज किए जाने वाले कारणों से पुलिस अधिकारी की यह राय न हो कि उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
(6) यदि ऐसा व्यक्ति किसी भी समय नोटिस की शर्तों का पालन करने में विफल रहता है या अपनी पहचान बताने में अनिच्छुक है, तो पुलिस अधिकारी, इस संबंध में सक्षम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अधीन रहते हुए, उसे नोटिस में उल्लिखित अपराध के लिए गिरफ्तार कर सकता है।
(7) यदि कोई अपराध तीन वर्ष से कम कारावास की सजा के योग्य है और वह व्यक्ति दुर्बल है या साठ वर्ष से अधिक आयु का है, तो पुलिस उप अधीक्षक से कम रैंक के अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।
पूरा पढ़ें: BNSS §35(2)(क) जो किसी पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में संज्ञेय अपराध करता है; या
(ख) जिसके विरुद्ध उचित शिकायत की गई हो, या विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई हो, या यह उचित संदेह हो कि उसने संज्ञेय अपराध किया है जिसके लिए सात वर्ष से कम या सात वर्ष तक कारावास की सजा हो सकती है, चाहे जुर्माना सहित हो या बिना जुर्माना के, यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं, अर्थात्:—
(i) पुलिस अधिकारी को ऐसी शिकायत, सूचना या संदेह के आधार पर यह विश्वास करने का कारण है कि उक्त व्यक्ति ने उक्त अपराध किया है;
(ii) पुलिस अधिकारी संतुष्ट है कि ऐसी गिरफ्तारी आवश्यक है—
(क) ऐसे व्यक्ति को आगे कोई अपराध करने से रोकने के लिए; या
(ख) अपराध की उचित जांच के लिए; या
(ग) ऐसे व्यक्ति को अपराध के साक्ष्य को लुप्त करने या किसी भी प्रकार से ऐसे साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ करने से रोकना; या
(घ) ऐसे व्यक्ति को मामले के तथ्यों से परिचित किसी व्यक्ति को प्रलोभन, धमकी या वादा करने से रोकना ताकि वह न्यायालय या पुलिस अधिकारी के समक्ष ऐसे तथ्यों का खुलासा करने से हतोत्साहित हो; या
(ई) चूंकि जब तक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक न्यायालय में उसकी उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की जा सकती, और पुलिस अधिकारी ऐसी गिरफ्तारी करते समय अपने कारणों को लिखित रूप में दर्ज करेगा।
बशर्ते कि पुलिस अधिकारी उन सभी मामलों में, जहां इस उपधारा के प्रावधानों के तहत किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है, गिरफ्तारी न करने के कारणों को लिखित रूप में दर्ज करेगा; या
(ग) जिसके विरुद्ध विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई हो कि उसने संज्ञेय अपराध किया है, जिसके लिए सात वर्ष से अधिक की कारावास की सजा हो सकती है, चाहे जुर्माने के साथ हो या बिना जुर्माने के, या मृत्युदंड हो, और पुलिस अधिकारी को उस सूचना के आधार पर यह विश्वास करने का कारण हो कि ऐसे व्यक्ति ने उक्त अपराध किया है; या
(घ) जिसे इस संहिता के तहत या राज्य सरकार के आदेश द्वारा अपराधी घोषित किया गया हो; या
(ई) जिसके कब्जे में कोई ऐसी वस्तु पाई जाती है जिस पर चोरी की संपत्ति होने का उचित संदेह हो और जिस पर ऐसी वस्तु के संबंध में अपराध करने का उचित संदेह हो; या
(f) जो किसी पुलिस अधिकारी को उसके कर्तव्य पालन में बाधा डालता है, या जो वैध हिरासत से भाग गया है, या भागने का प्रयास करता है; या
(जी) जिस पर संघ के सशस्त्र बलों में से किसी से भगोड़ा होने का उचित संदेह हो; या
(h) जो भारत के बाहर किसी स्थान पर किए गए किसी ऐसे कृत्य में संलिप्त रहा हो, या जिसके विरुद्ध कोई उचित शिकायत की गई हो, या विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई हो, या उसके संलिप्त होने का उचित संदेह मौजूद हो, जो यदि भारत में किया जाता तो अपराध के रूप में दंडनीय होता, और जिसके लिए वह प्रत्यर्पण संबंधी किसी कानून के तहत, या अन्यथा, भारत में गिरफ्तार या हिरासत में लिया जा सकता है; या
(i) जो रिहा किया गया दोषी होते हुए धारा 394 की उपधारा (5) के तहत बनाए गए किसी नियम का उल्लंघन करता है; या
(j) जिसकी गिरफ्तारी के लिए किसी अन्य पुलिस अधिकारी से लिखित या मौखिक रूप से कोई अनुरोध प्राप्त हुआ हो, बशर्ते कि अनुरोध में गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति और उस अपराध या अन्य कारण का उल्लेख हो जिसके लिए गिरफ्तारी की जानी है और उससे यह प्रतीत होता हो कि अनुरोध जारी करने वाले अधिकारी द्वारा उस व्यक्ति को बिना वारंट के कानूनी रूप से गिरफ्तार किया जा सकता है।
(2) धारा 39 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी गैर-संज्ञेय अपराध में शामिल व्यक्ति, या जिसके विरुद्ध शिकायत की गई हो, या जिसके विरुद्ध विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई हो, या जिसके इस प्रकार अपराध में शामिल होने का उचित संदेह हो, को मजिस्ट्रेट के वारंट या आदेश के बिना गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
(3) पुलिस अधिकारी उन सभी मामलों में, जहाँ उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है, उस व्यक्ति को नोटिस जारी करेगा जिसके विरुद्ध उचित शिकायत की गई हो, या विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई हो, या यह उचित संदेह हो कि उसने संज्ञेय अपराध किया है, कि वह उसके समक्ष या नोटिस में निर्दिष्ट किसी अन्य स्थान पर उपस्थित हो।
(4) जहाँ किसी व्यक्ति को ऐसा नोटिस जारी किया जाता है, तो उस व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह नोटिस की शर्तों का पालन करे।
(5) यदि ऐसा व्यक्ति नोटिस का पालन करता है और लगातार पालन करता रहता है, तो उसे नोटिस में उल्लिखित अपराध के संबंध में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक कि दर्ज किए जाने वाले कारणों से पुलिस अधिकारी की यह राय न हो कि उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
(6) यदि ऐसा व्यक्ति किसी भी समय नोटिस की शर्तों का पालन करने में विफल रहता है या अपनी पहचान बताने में अनिच्छुक है, तो पुलिस अधिकारी, इस संबंध में सक्षम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अधीन रहते हुए, उसे नोटिस में उल्लिखित अपराध के लिए गिरफ्तार कर सकता है।
(7) यदि कोई अपराध तीन वर्ष से कम कारावास की सजा के योग्य है और वह व्यक्ति दुर्बल है या साठ वर्ष से अधिक आयु का है, तो पुलिस उप अधीक्षक से कम रैंक के अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।
CrPC धारा 41(2) इन धाराओं से भी मेल खाती है
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
