पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 40 अब BNSS धारा 34 है
धारा 40. ग्राम के मामलों के संबंध में नियोजित अधिकारियों का कतिपय रिपोर्ट करने का कर्तव्य
पुराना कानून
CrPC §40
धारा 40. ग्राम के मामलों के संबंध में नियोजित अधिकारियों का कतिपय रिपोर्ट करने का कर्तव्य
40. ग्राम के मामलों के संबंध में नियोजित अधिकारियों का कतिपय रिपोर्ट करने का कर्तव्य
(1) ग्राम के मामलों के संबंध में नियोजित हर अधिकारी और ग्राम में निवास करने वाला हर व्यक्ति, निम्नलिखित के बारे में अपनी जानकारी की कोई इत्तिला निकटतम मजिस्ट्रेट को या निकटतम पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को, इनमें से जो भी निकटतर हो, तुरंत संसूचित करेगा—
(क) ऐसे ग्राम में या उसके निकट चुराई हुई संपत्ति के किसी कुख्यात लेने वाले या विक्रेता का स्थायी या अस्थायी निवास;
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति का, जिसे वह ठग, लुटेरा, निकल भागा हुआ सिद्धदोष या उद्घोषित अपराधी जानता है या युक्तियुक्त रूप से ऐसा संदेह करता है, ऐसे ग्राम के भीतर किसी स्थान में आना या ऐसे ग्राम से होकर जाना;
(ग) ऐसे ग्राम में या उसके निकट किसी अजमानतीय अपराध का, या भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 143, धारा 144, धारा 145, धारा 147 या धारा 148 के अधीन दंडनीय किसी अपराध का, किया जाना या किए जाने का आशय;
(घ) ऐसे ग्राम में या उसके निकट किसी आकस्मिक या अस्वाभाविक मृत्यु का, या संदेहजनक परिस्थितियों में किसी मृत्यु का, होना, अथवा ऐसे ग्राम में या उसके निकट किसी शव या शव के भाग का ऐसी परिस्थितियों में मिलना, जिनसे यह युक्तियुक्त संदेह होता है कि ऐसी मृत्यु हुई है, अथवा ऐसे ग्राम से किसी व्यक्ति का ऐसी परिस्थितियों में लापता होना, जिनसे यह युक्तियुक्त संदेह होता है कि ऐसे व्यक्ति के संबंध में कोई अजमानतीय अपराध किया गया है;
(ङ) ऐसे ग्राम के निकट, भारत से बाहर किसी स्थान में, ऐसे किसी कार्य का किया जाना या किए जाने का आशय, जो यदि भारत में किया जाता, तो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की निम्नलिखित धाराओं में से किसी के अधीन दंडनीय अपराध होता, अर्थात् धारा 231 से धारा 238 तक (दोनों सहित), धारा 302, धारा 304, धारा 382, धारा 392 से धारा 399 तक (दोनों सहित), धारा 402, धारा 435, धारा 436, धारा 449, धारा 457 से धारा 460 तक (दोनों सहित), धारा 489A, धारा 489B, धारा 489C और धारा 489D;
(च) कोई ऐसा मामला, जिससे व्यवस्था बनाए रखने पर, या अपराध के निवारण पर, या व्यक्ति या संपत्ति की सुरक्षा पर प्रभाव पड़ना संभाव्य है, और जिसकी बाबत जिला मजिस्ट्रेट ने, राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से किए गए साधारण या विशेष आदेश द्वारा, उसे इत्तिला संसूचित करने का निदेश दिया है।
(2) इस धारा में,—
(i) "ग्राम" के अंतर्गत ग्राम-भूमि भी है;
(ii) "उद्घोषित अपराधी" पद के अंतर्गत ऐसा कोई व्यक्ति भी है, जो भारत के किसी ऐसे राज्यक्षेत्र में, जिस पर इस संहिता का विस्तार नहीं है, किसी न्यायालय या प्राधिकारी द्वारा किसी ऐसे कार्य की बाबत अपराधी उद्घोषित किया गया है, जो यदि उन राज्यक्षेत्रों में किया जाता, जिन पर इस संहिता का विस्तार है, तो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की निम्नलिखित धाराओं में से किसी के अधीन दंडनीय अपराध होता, अर्थात् धारा 302, धारा 304, धारा 382, धारा 392 से धारा 399 तक (दोनों सहित), धारा 402, धारा 435, धारा 436, धारा 449, धारा 450 और धारा 457 से धारा 460 तक (दोनों सहित);
(iii) "ग्राम के मामलों के संबंध में नियोजित अधिकारी" शब्दों से ग्राम की पंचायत का कोई सदस्य अभिप्रेत है, और इसके अंतर्गत मुखिया तथा ग्राम के प्रशासन से संबंधित कोई कृत्य करने के लिए नियुक्त हर अधिकारी या अन्य व्यक्ति भी है।
पूरा पढ़ें: CrPC §40(1) ग्राम के मामलों के संबंध में नियोजित हर अधिकारी और ग्राम में निवास करने वाला हर व्यक्ति, निम्नलिखित के बारे में अपनी जानकारी की कोई इत्तिला निकटतम मजिस्ट्रेट को या निकटतम पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को, इनमें से जो भी निकटतर हो, तुरंत संसूचित करेगा—
(क) ऐसे ग्राम में या उसके निकट चुराई हुई संपत्ति के किसी कुख्यात लेने वाले या विक्रेता का स्थायी या अस्थायी निवास;
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति का, जिसे वह ठग, लुटेरा, निकल भागा हुआ सिद्धदोष या उद्घोषित अपराधी जानता है या युक्तियुक्त रूप से ऐसा संदेह करता है, ऐसे ग्राम के भीतर किसी स्थान में आना या ऐसे ग्राम से होकर जाना;
(ग) ऐसे ग्राम में या उसके निकट किसी अजमानतीय अपराध का, या भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 143, धारा 144, धारा 145, धारा 147 या धारा 148 के अधीन दंडनीय किसी अपराध का, किया जाना या किए जाने का आशय;
(घ) ऐसे ग्राम में या उसके निकट किसी आकस्मिक या अस्वाभाविक मृत्यु का, या संदेहजनक परिस्थितियों में किसी मृत्यु का, होना, अथवा ऐसे ग्राम में या उसके निकट किसी शव या शव के भाग का ऐसी परिस्थितियों में मिलना, जिनसे यह युक्तियुक्त संदेह होता है कि ऐसी मृत्यु हुई है, अथवा ऐसे ग्राम से किसी व्यक्ति का ऐसी परिस्थितियों में लापता होना, जिनसे यह युक्तियुक्त संदेह होता है कि ऐसे व्यक्ति के संबंध में कोई अजमानतीय अपराध किया गया है;
(ङ) ऐसे ग्राम के निकट, भारत से बाहर किसी स्थान में, ऐसे किसी कार्य का किया जाना या किए जाने का आशय, जो यदि भारत में किया जाता, तो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की निम्नलिखित धाराओं में से किसी के अधीन दंडनीय अपराध होता, अर्थात् धारा 231 से धारा 238 तक (दोनों सहित), धारा 302, धारा 304, धारा 382, धारा 392 से धारा 399 तक (दोनों सहित), धारा 402, धारा 435, धारा 436, धारा 449, धारा 457 से धारा 460 तक (दोनों सहित), धारा 489A, धारा 489B, धारा 489C और धारा 489D;
(च) कोई ऐसा मामला, जिससे व्यवस्था बनाए रखने पर, या अपराध के निवारण पर, या व्यक्ति या संपत्ति की सुरक्षा पर प्रभाव पड़ना संभाव्य है, और जिसकी बाबत जिला मजिस्ट्रेट ने, राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से किए गए साधारण या विशेष आदेश द्वारा, उसे इत्तिला संसूचित करने का निदेश दिया है।
(2) इस धारा में,—
(i) "ग्राम" के अंतर्गत ग्राम-भूमि भी है;
(ii) "उद्घोषित अपराधी" पद के अंतर्गत ऐसा कोई व्यक्ति भी है, जो भारत के किसी ऐसे राज्यक्षेत्र में, जिस पर इस संहिता का विस्तार नहीं है, किसी न्यायालय या प्राधिकारी द्वारा किसी ऐसे कार्य की बाबत अपराधी उद्घोषित किया गया है, जो यदि उन राज्यक्षेत्रों में किया जाता, जिन पर इस संहिता का विस्तार है, तो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की निम्नलिखित धाराओं में से किसी के अधीन दंडनीय अपराध होता, अर्थात् धारा 302, धारा 304, धारा 382, धारा 392 से धारा 399 तक (दोनों सहित), धारा 402, धारा 435, धारा 436, धारा 449, धारा 450 और धारा 457 से धारा 460 तक (दोनों सहित);
(iii) "ग्राम के मामलों के संबंध में नियोजित अधिकारी" शब्दों से ग्राम की पंचायत का कोई सदस्य अभिप्रेत है, और इसके अंतर्गत मुखिया तथा ग्राम के प्रशासन से संबंधित कोई कृत्य करने के लिए नियुक्त हर अधिकारी या अन्य व्यक्ति भी है।
नया कानून
BNSS §34
गांव के मामलों से संबंधित कार्य में लगे अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे कुछ रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
(1) ग्राम के मामलों से संबंधित कार्य में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी और ग्राम में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति, अपने पास मौजूद किसी भी सूचना को तुरंत निकटतम मजिस्ट्रेट या निकटतम पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को, जो भी निकटतम हो, सूचित करेगा—
(क) ऐसे गाँव में या उसके आस-पास चोरी की संपत्ति के किसी कुख्यात प्राप्तकर्ता या विक्रेता का स्थायी या अस्थायी निवास;
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति का ऐसे गाँव के भीतर किसी स्थान पर आना-जाना या ऐसे गाँव से होकर गुजरना, जिसे वह जानता हो या जिसके बारे में उसे यथोचित संदेह हो कि वह लुटेरा, भागा हुआ अपराधी या घोषित अपराधी है;
(ग) ऐसे गाँव में या उसके आस-पास किसी गैर-जमानती अपराध या भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 189 और धारा 191 के तहत दंडनीय किसी अपराध को करना या करने का इरादा रखना;
(घ) ऐसे गाँव में या उसके आस-पास किसी अचानक या अप्राकृतिक मृत्यु का होना या संदिग्ध परिस्थितियों में किसी मृत्यु का होना या ऐसे गाँव में या उसके आस-पास किसी शव या शव के किसी भाग का मिलना, ऐसी परिस्थितियों में जिससे यह उचित संदेह हो कि ऐसी मृत्यु हुई है या ऐसे गाँव से किसी व्यक्ति का गायब हो जाना, ऐसी परिस्थितियों में जिससे यह उचित संदेह हो कि उस व्यक्ति के संबंध में कोई गैर-जमानती अपराध किया गया है;
(ई) भारत के बाहर किसी भी स्थान पर ऐसे गाँव के निकट कोई ऐसा कार्य करना या करने का इरादा रखना, जो यदि भारत में किया जाता, तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की निम्नलिखित धाराओं में से किसी के तहत दंडनीय अपराध होता, अर्थात् 103, 105, 111, 112, 113, 178 से 181 (दोनों सहित), 305, 307, 309 से 312 (दोनों सहित), धारा 326, 331 या 332 के खंड (एफ) और (जी);
(f) कोई भी ऐसा मामला जिससे व्यवस्था बनाए रखने, अपराध की रोकथाम करने या व्यक्ति या संपत्ति की सुरक्षा प्रभावित होने की संभावना हो, जिसके संबंध में जिला मजिस्ट्रेट ने राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से सामान्य या विशेष आदेश द्वारा उसे सूचना देने का निर्देश दिया हो।
(2) इस खंड में,—
(i) “गांव” में गांव की भूमि शामिल है;
(ii) “घोषित अपराधी” अभिव्यक्ति में भारत के किसी भी क्षेत्र में, जहाँ यह संहिता लागू नहीं होती, किसी न्यायालय या प्राधिकरण द्वारा किसी ऐसे कृत्य के लिए अपराधी घोषित किया गया कोई भी व्यक्ति शामिल है, जो यदि उन क्षेत्रों में किया जाता जहाँ यह संहिता लागू होती है, तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत दस वर्ष या उससे अधिक कारावास या आजीवन कारावास या मृत्युदंड से दंडनीय अपराध होता;
(iii) “ग्राम के मामलों के संबंध में नियुक्त अधिकारी” शब्द का अर्थ ग्राम पंचायत का सदस्य है और इसमें मुखिया और प्रत्येक अधिकारी या अन्य व्यक्ति शामिल है जिसे ग्राम प्रशासन से संबंधित कोई कार्य करने के लिए नियुक्त किया गया है।
पूरा पढ़ें: BNSS §34(क) ऐसे गाँव में या उसके आस-पास चोरी की संपत्ति के किसी कुख्यात प्राप्तकर्ता या विक्रेता का स्थायी या अस्थायी निवास;
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति का ऐसे गाँव के भीतर किसी स्थान पर आना-जाना या ऐसे गाँव से होकर गुजरना, जिसे वह जानता हो या जिसके बारे में उसे यथोचित संदेह हो कि वह लुटेरा, भागा हुआ अपराधी या घोषित अपराधी है;
(ग) ऐसे गाँव में या उसके आस-पास किसी गैर-जमानती अपराध या भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 189 और धारा 191 के तहत दंडनीय किसी अपराध को करना या करने का इरादा रखना;
(घ) ऐसे गाँव में या उसके आस-पास किसी अचानक या अप्राकृतिक मृत्यु का होना या संदिग्ध परिस्थितियों में किसी मृत्यु का होना या ऐसे गाँव में या उसके आस-पास किसी शव या शव के किसी भाग का मिलना, ऐसी परिस्थितियों में जिससे यह उचित संदेह हो कि ऐसी मृत्यु हुई है या ऐसे गाँव से किसी व्यक्ति का गायब हो जाना, ऐसी परिस्थितियों में जिससे यह उचित संदेह हो कि उस व्यक्ति के संबंध में कोई गैर-जमानती अपराध किया गया है;
(ई) भारत के बाहर किसी भी स्थान पर ऐसे गाँव के निकट कोई ऐसा कार्य करना या करने का इरादा रखना, जो यदि भारत में किया जाता, तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की निम्नलिखित धाराओं में से किसी के तहत दंडनीय अपराध होता, अर्थात् 103, 105, 111, 112, 113, 178 से 181 (दोनों सहित), 305, 307, 309 से 312 (दोनों सहित), धारा 326, 331 या 332 के खंड (एफ) और (जी);
(f) कोई भी ऐसा मामला जिससे व्यवस्था बनाए रखने, अपराध की रोकथाम करने या व्यक्ति या संपत्ति की सुरक्षा प्रभावित होने की संभावना हो, जिसके संबंध में जिला मजिस्ट्रेट ने राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से सामान्य या विशेष आदेश द्वारा उसे सूचना देने का निर्देश दिया हो।
(2) इस खंड में,—
(i) “गांव” में गांव की भूमि शामिल है;
(ii) “घोषित अपराधी” अभिव्यक्ति में भारत के किसी भी क्षेत्र में, जहाँ यह संहिता लागू नहीं होती, किसी न्यायालय या प्राधिकरण द्वारा किसी ऐसे कृत्य के लिए अपराधी घोषित किया गया कोई भी व्यक्ति शामिल है, जो यदि उन क्षेत्रों में किया जाता जहाँ यह संहिता लागू होती है, तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत दस वर्ष या उससे अधिक कारावास या आजीवन कारावास या मृत्युदंड से दंडनीय अपराध होता;
(iii) “ग्राम के मामलों के संबंध में नियुक्त अधिकारी” शब्द का अर्थ ग्राम पंचायत का सदस्य है और इसमें मुखिया और प्रत्येक अधिकारी या अन्य व्यक्ति शामिल है जिसे ग्राम प्रशासन से संबंधित कोई कार्य करने के लिए नियुक्त किया गया है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
