पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 357B अब BNSS धारा 396(7) है
धारा 357B. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326क या धारा 376कख या धारा 376घ या धारा 376घक या धारा 376घख के अधीन जुर्माने के अतिरिक्त प्रतिकर
पुराना कानून
CrPC §357B
धारा 357B. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326क या धारा 376कख या धारा 376घ या धारा 376घक या धारा 376घख के अधीन जुर्माने के अतिरिक्त प्रतिकर
357B. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326क या धारा 376कख या धारा 376घ या धारा 376घक या धारा 376घख के अधीन जुर्माने के अतिरिक्त प्रतिकर
राज्य सरकार द्वारा धारा 357क के अधीन संदेय प्रतिकर, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45) की धारा 326क, धारा 376कख, धारा 376घ, धारा 376घक और धारा 376घख के अधीन पीड़ित को जुर्माने के संदाय के अतिरिक्त होगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §357Bराज्य सरकार द्वारा धारा 357क के अधीन संदेय प्रतिकर, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45) की धारा 326क, धारा 376कख, धारा 376घ, धारा 376घक और धारा 376घख के अधीन पीड़ित को जुर्माने के संदाय के अतिरिक्त होगा।
नया कानून
BNSS §396(7)
पीड़ित मुआवजा योजना।
(1) प्रत्येक राज्य सरकार केंद्र सरकार के समन्वय से अपराध के परिणामस्वरूप हानि या चोट झेलने वाले पीड़ित या उसके आश्रितों को मुआवजा देने के उद्देश्य से निधि उपलब्ध कराने की योजना तैयार करेगी, जिन्हें पुनर्वास की आवश्यकता है।
(2) जब भी न्यायालय द्वारा मुआवजे के लिए सिफारिश की जाती है, तो जिला विधि सेवा प्राधिकरण या राज्य विधि सेवा प्राधिकरण, जैसा भी मामला हो, उपधारा (1) में निर्दिष्ट योजना के तहत दिए जाने वाले मुआवजे की मात्रा का निर्णय करेगा।
(3) यदि परीक्षण न्यायालय, परीक्षण के समापन पर, संतुष्ट हो कि धारा 395 के तहत दिया गया मुआवजा ऐसे पुनर्वास के लिए पर्याप्त नहीं है, या जहां मामले बरी होने या रिहा होने में समाप्त होते हैं और पीड़ित का पुनर्वास किया जाना है, तो वह मुआवजे के लिए सिफारिश कर सकता है।
(4) जहाँ अपराधी का पता नहीं लगाया जा सकता है या उसकी पहचान नहीं की जा सकती है, लेकिन पीड़ित की पहचान हो जाती है, और जहाँ कोई मुकदमा नहीं चलता है, तो पीड़ित या उसके आश्रित राज्य या जिला विधि सेवा प्राधिकरण को मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं।
(5) ऐसी अनुशंसाएँ प्राप्त होने पर या उपधारा (4) के अंतर्गत आवेदन प्राप्त होने पर, राज्य या जिला विधि सेवा प्राधिकरण उचित जाँच के बाद दो महीने के भीतर जाँच पूरी करके पर्याप्त मुआवज़ा प्रदान करेगा।
(6) पीड़ित की पीड़ा को कम करने के लिए, राज्य या जिला विधि सेवा प्राधिकरण, जैसा भी मामला हो, पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी या संबंधित क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के प्रमाण पत्र पर तत्काल प्राथमिक चिकित्सा सुविधा या चिकित्सा लाभ निशुल्क उपलब्ध कराने का आदेश दे सकता है, या कोई अन्य अंतरिम राहत जो उपयुक्त प्राधिकारी उचित समझे।
(7) इस धारा के अधीन राज्य सरकार द्वारा देय मुआवजा, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (45 ऑफ 2023) की धारा 65, धारा 70 और धारा 124 की उपधारा (1) के तहत पीड़ित को जुर्माने के भुगतान के अतिरिक्त होगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §396(7)(2) जब भी न्यायालय द्वारा मुआवजे के लिए सिफारिश की जाती है, तो जिला विधि सेवा प्राधिकरण या राज्य विधि सेवा प्राधिकरण, जैसा भी मामला हो, उपधारा (1) में निर्दिष्ट योजना के तहत दिए जाने वाले मुआवजे की मात्रा का निर्णय करेगा।
(3) यदि परीक्षण न्यायालय, परीक्षण के समापन पर, संतुष्ट हो कि धारा 395 के तहत दिया गया मुआवजा ऐसे पुनर्वास के लिए पर्याप्त नहीं है, या जहां मामले बरी होने या रिहा होने में समाप्त होते हैं और पीड़ित का पुनर्वास किया जाना है, तो वह मुआवजे के लिए सिफारिश कर सकता है।
(4) जहाँ अपराधी का पता नहीं लगाया जा सकता है या उसकी पहचान नहीं की जा सकती है, लेकिन पीड़ित की पहचान हो जाती है, और जहाँ कोई मुकदमा नहीं चलता है, तो पीड़ित या उसके आश्रित राज्य या जिला विधि सेवा प्राधिकरण को मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं।
(5) ऐसी अनुशंसाएँ प्राप्त होने पर या उपधारा (4) के अंतर्गत आवेदन प्राप्त होने पर, राज्य या जिला विधि सेवा प्राधिकरण उचित जाँच के बाद दो महीने के भीतर जाँच पूरी करके पर्याप्त मुआवज़ा प्रदान करेगा।
(6) पीड़ित की पीड़ा को कम करने के लिए, राज्य या जिला विधि सेवा प्राधिकरण, जैसा भी मामला हो, पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी या संबंधित क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के प्रमाण पत्र पर तत्काल प्राथमिक चिकित्सा सुविधा या चिकित्सा लाभ निशुल्क उपलब्ध कराने का आदेश दे सकता है, या कोई अन्य अंतरिम राहत जो उपयुक्त प्राधिकारी उचित समझे।
(7) इस धारा के अधीन राज्य सरकार द्वारा देय मुआवजा, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (45 ऑफ 2023) की धारा 65, धारा 70 और धारा 124 की उपधारा (1) के तहत पीड़ित को जुर्माने के भुगतान के अतिरिक्त होगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
