पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 352 अब BNSS धारा 391 है
धारा 352. कतिपय न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों का अपने समक्ष किए गए कतिपय अपराधों का विचारण न करना
पुराना कानून
CrPC §352
धारा 352. कतिपय न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों का अपने समक्ष किए गए कतिपय अपराधों का विचारण न करना
352. कतिपय न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों का अपने समक्ष किए गए कतिपय अपराधों का विचारण न करना
धारा 344, 345, 349 और 350 में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, किसी दंड न्यायालय का कोई न्यायाधीश (उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से भिन्न) या कोई मजिस्ट्रेट धारा 195 में निर्दिष्ट किसी अपराध के लिए किसी व्यक्ति का विचारण नहीं करेगा, जब ऐसा अपराध उसके स्वयं के समक्ष या उसके प्राधिकार के अवमान में किया गया है, या किसी न्यायिक कार्यवाही के अनुक्रम में ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के रूप में उसकी जानकारी में लाया गया है।
पूरा पढ़ें: CrPC §352धारा 344, 345, 349 और 350 में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, किसी दंड न्यायालय का कोई न्यायाधीश (उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से भिन्न) या कोई मजिस्ट्रेट धारा 195 में निर्दिष्ट किसी अपराध के लिए किसी व्यक्ति का विचारण नहीं करेगा, जब ऐसा अपराध उसके स्वयं के समक्ष या उसके प्राधिकार के अवमान में किया गया है, या किसी न्यायिक कार्यवाही के अनुक्रम में ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के रूप में उसकी जानकारी में लाया गया है।
नया कानून
BNSS §391
कुछ न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों को अपने समक्ष घटित होने वाले कुछ अपराधों की सुनवाई न करने का अधिकार है।
धारा 383, 384, 388 और 389 में दिए गए प्रावधानों के अलावा, किसी आपराधिक न्यायालय का न्यायाधीश (उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के अलावा) या मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति पर धारा 215 में निर्दिष्ट किसी अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाएगा, जब ऐसा अपराध उसके समक्ष या उसके अधिकार की अवमानना में किया गया हो, या न्यायिक कार्यवाही के दौरान ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के रूप में उसके संज्ञान में लाया गया हो।
पूरा पढ़ें: BNSS §3911 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
