पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 349 अब BNSS धारा 388 है
धारा 349. उत्तर देने या दस्तावेज पेश करने से इन्कार करने वाले व्यक्ति का कारावास या सुपुर्दगी
पुराना कानून
CrPC §349
धारा 349. उत्तर देने या दस्तावेज पेश करने से इन्कार करने वाले व्यक्ति का कारावास या सुपुर्दगी
349. उत्तर देने या दस्तावेज पेश करने से इन्कार करने वाले व्यक्ति का कारावास या सुपुर्दगी
यदि कोई साक्षी, या कोई व्यक्ति जो किसी दंड न्यायालय के समक्ष कोई दस्तावेज या चीज पेश करने के लिए बुलाया गया है, उससे पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने से, या अपने कब्जे या शक्ति में की किसी ऐसी दस्तावेज या चीज को पेश करने से, जिसे पेश करने की अपेक्षा न्यायालय उससे करता है, इन्कार करता है, और ऐसा करने के लिए उसे युक्तियुक्त अवसर दिए जाने के पश्चात् भी ऐसे इन्कार के लिए कोई युक्तियुक्त प्रतिहेतु नहीं देता है, तो ऐसा न्यायालय, अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से, उसे सादा कारावास का दंडादेश दे सकेगा, या पीठासीन मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश के हस्ताक्षर से वारंट द्वारा उसे सात दिन से अनधिक की किसी अवधि के लिए न्यायालय के किसी अधिकारी की अभिरक्षा में सुपुर्द कर सकेगा, जब तक कि इस बीच ऐसा व्यक्ति परीक्षित होने और उत्तर देने के लिए, या दस्तावेज या चीज पेश करने के लिए, सहमत न हो जाए; और यदि वह अपने इन्कार पर बना रहता है, तो उसके साथ धारा 345 या धारा 346 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही की जा सकेगी।
पूरा पढ़ें: CrPC §349यदि कोई साक्षी, या कोई व्यक्ति जो किसी दंड न्यायालय के समक्ष कोई दस्तावेज या चीज पेश करने के लिए बुलाया गया है, उससे पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने से, या अपने कब्जे या शक्ति में की किसी ऐसी दस्तावेज या चीज को पेश करने से, जिसे पेश करने की अपेक्षा न्यायालय उससे करता है, इन्कार करता है, और ऐसा करने के लिए उसे युक्तियुक्त अवसर दिए जाने के पश्चात् भी ऐसे इन्कार के लिए कोई युक्तियुक्त प्रतिहेतु नहीं देता है, तो ऐसा न्यायालय, अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से, उसे सादा कारावास का दंडादेश दे सकेगा, या पीठासीन मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश के हस्ताक्षर से वारंट द्वारा उसे सात दिन से अनधिक की किसी अवधि के लिए न्यायालय के किसी अधिकारी की अभिरक्षा में सुपुर्द कर सकेगा, जब तक कि इस बीच ऐसा व्यक्ति परीक्षित होने और उत्तर देने के लिए, या दस्तावेज या चीज पेश करने के लिए, सहमत न हो जाए; और यदि वह अपने इन्कार पर बना रहता है, तो उसके साथ धारा 345 या धारा 346 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही की जा सकेगी।
नया कानून
BNSS §388
जवाब देने या दस्तावेज पेश करने से इनकार करने वाले व्यक्ति को कारावास या हिरासत में लेना।
यदि किसी आपराधिक न्यायालय के समक्ष कोई गवाह या दस्तावेज या वस्तु प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया कोई व्यक्ति, पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने से या अपने कब्जे या अधिकार में मौजूद किसी दस्तावेज या वस्तु को प्रस्तुत करने से इनकार करता है, जिसे न्यायालय प्रस्तुत करने के लिए कहता है, और उसे ऐसा करने का उचित अवसर दिए जाने के बाद भी, ऐसे इनकार का कोई उचित कारण नहीं बताता है, तो न्यायालय लिखित रूप में कारण दर्ज करते हुए, उसे साधारण कारावास की सजा दे सकता है, या पीठासीन मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश के हस्ताक्षर से वारंट जारी करके उसे सात दिनों से अधिक की अवधि के लिए न्यायालय के किसी अधिकारी की हिरासत में भेज सकता है, जब तक कि इस बीच वह व्यक्ति जांच के लिए सहमत न हो जाए और उत्तर देने या दस्तावेज या वस्तु प्रस्तुत करने के लिए सहमत न हो जाए, और यदि वह अपने इनकार पर अड़ा रहता है, तो उसके साथ धारा 384 या धारा 385 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
पूरा पढ़ें: BNSS §3881 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
