पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 332 अब BNSS धारा 371 है
धारा 332. मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष अभियुक्त के हाजिर होने पर प्रक्रिया
पुराना कानून
CrPC §332
धारा 332. मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष अभियुक्त के हाजिर होने पर प्रक्रिया
332. मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष अभियुक्त के हाजिर होने पर प्रक्रिया
(1) यदि, जब अभियुक्त मजिस्ट्रेट या न्यायालय के, जैसी भी स्थिति हो, समक्ष हाजिर होता है या फिर लाया जाता है, तब मजिस्ट्रेट या न्यायालय उसे अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ समझता है, तो जांच या विचारण चलेगा।
(2) यदि मजिस्ट्रेट या न्यायालय अभियुक्त को अपनी प्रतिरक्षा करने में अब भी असमर्थ समझता है, तो मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 328 या धारा 329 के, जैसी भी स्थिति हो, उपबंधों के अनुसार कार्य करेगा, और यदि अभियुक्त विकृतचित्त और परिणामस्वरूप अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ पाया जाता है तो वह ऐसे अभियुक्त के बारे में धारा 330 के उपबंधों के अनुसार कार्रवाई करेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §332(1) यदि, जब अभियुक्त मजिस्ट्रेट या न्यायालय के, जैसी भी स्थिति हो, समक्ष हाजिर होता है या फिर लाया जाता है, तब मजिस्ट्रेट या न्यायालय उसे अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ समझता है, तो जांच या विचारण चलेगा।
(2) यदि मजिस्ट्रेट या न्यायालय अभियुक्त को अपनी प्रतिरक्षा करने में अब भी असमर्थ समझता है, तो मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 328 या धारा 329 के, जैसी भी स्थिति हो, उपबंधों के अनुसार कार्य करेगा, और यदि अभियुक्त विकृतचित्त और परिणामस्वरूप अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ पाया जाता है तो वह ऐसे अभियुक्त के बारे में धारा 330 के उपबंधों के अनुसार कार्रवाई करेगा।
नया कानून
BNSS §371
अभियुक्त के मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश होने की प्रक्रिया।
(1) यदि जब अभियुक्त मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष उपस्थित होता है या उसे पुनः लाया जाता है, जैसा भी मामला हो, मजिस्ट्रेट या न्यायालय उसे अपना बचाव करने में सक्षम समझता है, तो जांच या मुकदमा आगे बढ़ेगा।
(2) यदि मजिस्ट्रेट या न्यायालय अभियुक्त को अपना बचाव करने में असमर्थ समझता है, तो मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 367 या धारा 368 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करेगा, जैसा भी मामला हो, और यदि अभियुक्त मानसिक रूप से अस्वस्थ पाया जाता है और फलस्वरूप अपना बचाव करने में असमर्थ है, तो ऐसे अभियुक्त के साथ धारा 369 के प्रावधानों के अनुसार व्यवहार करेगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §371(2) यदि मजिस्ट्रेट या न्यायालय अभियुक्त को अपना बचाव करने में असमर्थ समझता है, तो मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 367 या धारा 368 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करेगा, जैसा भी मामला हो, और यदि अभियुक्त मानसिक रूप से अस्वस्थ पाया जाता है और फलस्वरूप अपना बचाव करने में असमर्थ है, तो ऐसे अभियुक्त के साथ धारा 369 के प्रावधानों के अनुसार व्यवहार करेगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
