पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 325 अब BNSS धारा 364 है
धारा 325. जब मजिस्ट्रेट पर्याप्त कठोर दंडादेश नहीं दे सकता तब प्रक्रिया
पुराना कानून
CrPC §325
धारा 325. जब मजिस्ट्रेट पर्याप्त कठोर दंडादेश नहीं दे सकता तब प्रक्रिया
325. जब मजिस्ट्रेट पर्याप्त कठोर दंडादेश नहीं दे सकता तब प्रक्रिया
(1) जब कभी किसी मजिस्ट्रेट की, अभियोजन का और अभियुक्त का साक्ष्य सुनने के पश्चात्, यह राय है कि अभियुक्त दोषी है और यह कि उसे ऐसा दंड मिलना चाहिए जो प्रकार में भिन्न है, या उससे अधिक कठोर है, जो ऐसा मजिस्ट्रेट अधिरोपित करने के लिए सशक्त है, या द्वितीय वर्ग का मजिस्ट्रेट होते हुए उसकी यह राय है कि अभियुक्त से धारा 106 के अधीन बंधपत्र निष्पादित करने की अपेक्षा की जानी चाहिए, तो वह अपनी राय अभिलिखित कर सकेगा और अपनी कार्यवाहियां उस मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को, जिसके वह अधीनस्थ है, भेज सकेगा तथा अभियुक्त को उसके पास भेज सकेगा।
(2) जब एक से अधिक अभियुक्तों का एक साथ विचारण किया जा रहा है और मजिस्ट्रेट ऐसे अभियुक्तों में से किसी के संबंध में उपधारा (1) के अधीन कार्यवाही करना आवश्यक समझता है, तब वह उन सब अभियुक्तों को, जो उसकी राय में दोषी हैं, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा।
(3) वह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिसे कार्यवाहियां भेजी गई हैं, यदि वह ठीक समझे तो, पक्षकारों की परीक्षा कर सकेगा और ऐसे किसी साक्षी को, जो मामले में पहले ही साक्ष्य दे चुका है, पुनः बुला सकेगा और उसकी परीक्षा कर सकेगा तथा कोई और साक्ष्य मंगा सकेगा और ले सकेगा, और मामले में ऐसा निर्णय, दंडादेश या आदेश पारित करेगा जैसा वह ठीक समझे और जो विधि के अनुसार हो।
पूरा पढ़ें: CrPC §325(1) जब कभी किसी मजिस्ट्रेट की, अभियोजन का और अभियुक्त का साक्ष्य सुनने के पश्चात्, यह राय है कि अभियुक्त दोषी है और यह कि उसे ऐसा दंड मिलना चाहिए जो प्रकार में भिन्न है, या उससे अधिक कठोर है, जो ऐसा मजिस्ट्रेट अधिरोपित करने के लिए सशक्त है, या द्वितीय वर्ग का मजिस्ट्रेट होते हुए उसकी यह राय है कि अभियुक्त से धारा 106 के अधीन बंधपत्र निष्पादित करने की अपेक्षा की जानी चाहिए, तो वह अपनी राय अभिलिखित कर सकेगा और अपनी कार्यवाहियां उस मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को, जिसके वह अधीनस्थ है, भेज सकेगा तथा अभियुक्त को उसके पास भेज सकेगा।
(2) जब एक से अधिक अभियुक्तों का एक साथ विचारण किया जा रहा है और मजिस्ट्रेट ऐसे अभियुक्तों में से किसी के संबंध में उपधारा (1) के अधीन कार्यवाही करना आवश्यक समझता है, तब वह उन सब अभियुक्तों को, जो उसकी राय में दोषी हैं, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा।
(3) वह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिसे कार्यवाहियां भेजी गई हैं, यदि वह ठीक समझे तो, पक्षकारों की परीक्षा कर सकेगा और ऐसे किसी साक्षी को, जो मामले में पहले ही साक्ष्य दे चुका है, पुनः बुला सकेगा और उसकी परीक्षा कर सकेगा तथा कोई और साक्ष्य मंगा सकेगा और ले सकेगा, और मामले में ऐसा निर्णय, दंडादेश या आदेश पारित करेगा जैसा वह ठीक समझे और जो विधि के अनुसार हो।
नया कानून
BNSS §364
धारा 364: प्रक्रिया जब मजिस्ट्रेट पर्याप्त रूप से गंभीर सजा नहीं दे सकता
364. (1) जब भी कोई मजिस्ट्रेट, अभियोजन पक्ष और अभियुक्त के साक्ष्य सुनने के बाद, यह राय रखता है कि अभियुक्त दोषी है, और उसे उससे भिन्न प्रकार की या उससे भी अधिक गंभीर सज़ा मिलनी चाहिए। मजिस्ट्रेट को दंड देने का अधिकार है, या, द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट होने के नाते, उसकी राय है कि अभियुक्त को धारा 125 के तहत एक बांड या जमानत बांड निष्पादित करने की आवश्यकता होनी चाहिए, वह राय दर्ज कर सकता है और अपनी कार्यवाही प्रस्तुत कर सकता है, और अग्रेषित कर सकता है अभियुक्त, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास, जिसके वह अधीनस्थ है।
(2) जब एक से अधिक अभियुक्तों पर एक साथ मुकदमा चलाया जा रहा हो, और मजिस्ट्रेट ऐसे किसी भी अभियुक्त के संबंध में उपधारा (1) के तहत कार्यवाही करना आवश्यक समझता है, तो वह उन सभी अभियुक्तों को आगे कर देगा, जो उसकी राय में हैं दोषी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को।
(3) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिसके पास कार्यवाही प्रस्तुत की गई है, यदि वह उचित समझे, तो पक्षों की जांच कर सकता है और किसी भी गवाह को वापस बुला सकता है और उसकी जांच कर सकता है, जिसने मामले में पहले ही साक्ष्य दे दिया है और कोई और साक्ष्य मांग सकता है और ले सकता है और ऐसे गवाह को पारित कर सकता है। मामले में निर्णय, सजा या आदेश जैसा वह उचित समझे, और कानून के अनुसार हो।
पूरा पढ़ें: BNSS §364(2) जब एक से अधिक अभियुक्तों पर एक साथ मुकदमा चलाया जा रहा हो, और मजिस्ट्रेट ऐसे किसी भी अभियुक्त के संबंध में उपधारा (1) के तहत कार्यवाही करना आवश्यक समझता है, तो वह उन सभी अभियुक्तों को आगे कर देगा, जो उसकी राय में हैं दोषी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को।
(3) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिसके पास कार्यवाही प्रस्तुत की गई है, यदि वह उचित समझे, तो पक्षों की जांच कर सकता है और किसी भी गवाह को वापस बुला सकता है और उसकी जांच कर सकता है, जिसने मामले में पहले ही साक्ष्य दे दिया है और कोई और साक्ष्य मांग सकता है और ले सकता है और ऐसे गवाह को पारित कर सकता है। मामले में निर्णय, सजा या आदेश जैसा वह उचित समझे, और कानून के अनुसार हो।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
