पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 314 अब BNSS धारा 352 है
धारा 314. मौखिक तर्क और तर्कों का ज्ञापन
पुराना कानून
CrPC §314
धारा 314. मौखिक तर्क और तर्कों का ज्ञापन
314. मौखिक तर्क और तर्कों का ज्ञापन
(1) किसी कार्यवाही का कोई पक्षकार अपना साक्ष्य समाप्त हो जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संक्षिप्त मौखिक तर्क कर सकेगा और मौखिक तर्क, यदि कोई हों, समाप्त करने के पहले, वह न्यायालय के समक्ष ऐसा ज्ञापन प्रस्तुत कर सकेगा जिसमें उसके मामले के समर्थन में तर्क संक्षेप में और अलग-अलग शीर्षों के अधीन दिए गए हों, और हर ऐसा ज्ञापन अभिलेख का भाग होगा।
(2) हर ऐसे ज्ञापन की एक प्रति साथ ही साथ विरोधी पक्षकार को दी जाएगी।
(3) लिखित तर्क फाइल करने के प्रयोजन के लिए कार्यवाहियों का कोई स्थगन तब तक मंजूर नहीं किया जाएगा जब तक न्यायालय, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, ऐसा स्थगन मंजूर करना आवश्यक न समझे।
(4) यदि न्यायालय की यह राय है कि मौखिक तर्क संक्षिप्त या सुसंगत नहीं हैं तो वह ऐसे तर्कों का विनियमन कर सकेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §314(1) किसी कार्यवाही का कोई पक्षकार अपना साक्ष्य समाप्त हो जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संक्षिप्त मौखिक तर्क कर सकेगा और मौखिक तर्क, यदि कोई हों, समाप्त करने के पहले, वह न्यायालय के समक्ष ऐसा ज्ञापन प्रस्तुत कर सकेगा जिसमें उसके मामले के समर्थन में तर्क संक्षेप में और अलग-अलग शीर्षों के अधीन दिए गए हों, और हर ऐसा ज्ञापन अभिलेख का भाग होगा।
(2) हर ऐसे ज्ञापन की एक प्रति साथ ही साथ विरोधी पक्षकार को दी जाएगी।
(3) लिखित तर्क फाइल करने के प्रयोजन के लिए कार्यवाहियों का कोई स्थगन तब तक मंजूर नहीं किया जाएगा जब तक न्यायालय, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, ऐसा स्थगन मंजूर करना आवश्यक न समझे।
(4) यदि न्यायालय की यह राय है कि मौखिक तर्क संक्षिप्त या सुसंगत नहीं हैं तो वह ऐसे तर्कों का विनियमन कर सकेगा।
नया कानून
BNSS §352
मौखिक बहस और बहस का ज्ञापन।
(1) किसी कार्यवाही में कोई पक्षकार अपने साक्ष्य की समाप्ति के बाद यथाशीघ्र संक्षिप्त मौखिक तर्क प्रस्तुत कर सकता है, और मौखिक तर्कों को समाप्त करने से पहले, यदि कोई हो, तो न्यायालय को एक ज्ञापन प्रस्तुत कर सकता है जिसमें उसके मामले के समर्थन में तर्कों को संक्षेप में और अलग-अलग शीर्षकों के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया हो, और ऐसा प्रत्येक ज्ञापन अभिलेख का भाग होगा।
(2) ऐसे प्रत्येक ज्ञापन की एक प्रति विपक्षी पक्ष को समवर्ती रूप से उपलब्ध कराई जाएगी।
(3) लिखित तर्क दाखिल करने के उद्देश्य से कार्यवाही का कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा, जब तक कि न्यायालय, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, ऐसा स्थगन देना आवश्यक न समझे।
(4) यदि न्यायालय की राय हो कि मौखिक तर्क संक्षिप्त या प्रासंगिक नहीं हैं, तो वह ऐसे तर्कों को विनियमित कर सकता है।
पूरा पढ़ें: BNSS §352(2) ऐसे प्रत्येक ज्ञापन की एक प्रति विपक्षी पक्ष को समवर्ती रूप से उपलब्ध कराई जाएगी।
(3) लिखित तर्क दाखिल करने के उद्देश्य से कार्यवाही का कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा, जब तक कि न्यायालय, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, ऐसा स्थगन देना आवश्यक न समझे।
(4) यदि न्यायालय की राय हो कि मौखिक तर्क संक्षिप्त या प्रासंगिक नहीं हैं, तो वह ऐसे तर्कों को विनियमित कर सकता है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
