पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 255 अब BNSS धारा 278 है
धारा 255. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
पुराना कानून
CrPC §255
धारा 255. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
255. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
(1) यदि मजिस्ट्रेट, धारा 254 में निर्दिष्ट साक्ष्य तथा ऐसा अतिरिक्त साक्ष्य, यदि कोई हो, जो वह स्वप्रेरणा से पेश कराए, लेने पर अभियुक्त को दोषी नहीं पाता है, तो वह दोषमुक्ति का आदेश अभिलिखित करेगा।
(2) जहां मजिस्ट्रेट धारा 325 या धारा 360 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता है, वहां वह, यदि वह अभियुक्त को दोषी पाता है, उसे विधि के अनुसार दंडादेश देगा।
(3) मजिस्ट्रेट, धारा 252 या धारा 255 के अधीन, अभियुक्त को ऐसे किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध कर सकेगा, जो इस अध्याय के अधीन विचारणीय है और जिसे स्वीकृत या साबित तथ्यों से उसने किया हुआ प्रतीत होता है, चाहे परिवाद या समन की प्रकृति कुछ भी हो, यदि मजिस्ट्रेट का यह समाधान हो जाता है कि इससे अभियुक्त पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §255(1) यदि मजिस्ट्रेट, धारा 254 में निर्दिष्ट साक्ष्य तथा ऐसा अतिरिक्त साक्ष्य, यदि कोई हो, जो वह स्वप्रेरणा से पेश कराए, लेने पर अभियुक्त को दोषी नहीं पाता है, तो वह दोषमुक्ति का आदेश अभिलिखित करेगा।
(2) जहां मजिस्ट्रेट धारा 325 या धारा 360 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता है, वहां वह, यदि वह अभियुक्त को दोषी पाता है, उसे विधि के अनुसार दंडादेश देगा।
(3) मजिस्ट्रेट, धारा 252 या धारा 255 के अधीन, अभियुक्त को ऐसे किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध कर सकेगा, जो इस अध्याय के अधीन विचारणीय है और जिसे स्वीकृत या साबित तथ्यों से उसने किया हुआ प्रतीत होता है, चाहे परिवाद या समन की प्रकृति कुछ भी हो, यदि मजिस्ट्रेट का यह समाधान हो जाता है कि इससे अभियुक्त पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
नया कानून
BNSS §278
दोषमुक्ति या दोषसिद्धि।
(1) यदि मजिस्ट्रेट धारा 277 में निर्दिष्ट साक्ष्य और ऐसे अतिरिक्त साक्ष्य, यदि कोई हो, जो वह स्वयं प्रस्तुत करवाए, पर विचार करने के बाद अभियुक्त को निर्दोष पाता है, तो वह बरी करने का आदेश दर्ज करेगा।
(2) जहाँ मजिस्ट्रेट धारा 364 या धारा 401 के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता है, तो यदि वह अभियुक्त को दोषी पाता है, तो वह उसे कानून के अनुसार सजा सुनाएगा।
(3) मजिस्ट्रेट धारा 275 या धारा 278 के तहत किसी भी अपराध के लिए आरोपी को दोषी ठहरा सकता है, जो कि इस अध्याय के तहत विचारणीय है, और जो कि स्वीकार किए गए या सिद्ध तथ्यों से प्रतीत होता है कि उसने किया है, चाहे शिकायत या समन की प्रकृति कुछ भी हो, यदि मजिस्ट्रेट संतुष्ट है कि इससे आरोपी को कोई नुकसान नहीं होगा।
पूरा पढ़ें: BNSS §278(2) जहाँ मजिस्ट्रेट धारा 364 या धारा 401 के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता है, तो यदि वह अभियुक्त को दोषी पाता है, तो वह उसे कानून के अनुसार सजा सुनाएगा।
(3) मजिस्ट्रेट धारा 275 या धारा 278 के तहत किसी भी अपराध के लिए आरोपी को दोषी ठहरा सकता है, जो कि इस अध्याय के तहत विचारणीय है, और जो कि स्वीकार किए गए या सिद्ध तथ्यों से प्रतीत होता है कि उसने किया है, चाहे शिकायत या समन की प्रकृति कुछ भी हो, यदि मजिस्ट्रेट संतुष्ट है कि इससे आरोपी को कोई नुकसान नहीं होगा।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
