पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 248 अब BNSS धारा 271 है
धारा 248. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
पुराना कानून
CrPC §248
धारा 248. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
248. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
(1) यदि इस अध्याय के अधीन किसी ऐसे मामले में, जिसमें आरोप विरचित किया गया है, मजिस्ट्रेट अभियुक्त को दोषी नहीं पाता, तो वह दोषमुक्ति का आदेश अभिलिखित करेगा।
(2) जहां इस अध्याय के अधीन किसी मामले में मजिस्ट्रेट अभियुक्त को दोषी पाता है, किंतु धारा 325 या धारा 360 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता, वहां वह दंडादेश के प्रश्न पर अभियुक्त को सुनने के पश्चात् विधि के अनुसार उस पर दंडादेश पारित करेगा।
(3) जहां इस अध्याय के अधीन किसी मामले में धारा 211 की उपधारा (7) के उपबंधों के अधीन पूर्व दोषसिद्धि का आरोप लगाया जाता है और अभियुक्त यह स्वीकार नहीं करता कि वह आरोप में अभिकथित रूप से पूर्व में दोषसिद्ध किया जा चुका है, वहां मजिस्ट्रेट, उक्त अभियुक्त को दोषसिद्ध कर देने के पश्चात्, अभिकथित पूर्व दोषसिद्धि के संबंध में साक्ष्य ले सकेगा और उस पर निष्कर्ष अभिलिखित करेगा:
परन्तु जब तक अभियुक्त उपधारा (2) के अधीन दोषसिद्ध नहीं कर दिया जाता, तब तक न तो ऐसा आरोप मजिस्ट्रेट द्वारा पढ़कर सुनाया जाएगा, न अभियुक्त से उस पर अभिवाक् करने के लिए कहा जाएगा और न ही अभियोजन द्वारा या उसके द्वारा पेश किए गए किसी साक्ष्य में पूर्व दोषसिद्धि का निर्देश किया जाएगा।
पूरा पढ़ें: CrPC §248(1) यदि इस अध्याय के अधीन किसी ऐसे मामले में, जिसमें आरोप विरचित किया गया है, मजिस्ट्रेट अभियुक्त को दोषी नहीं पाता, तो वह दोषमुक्ति का आदेश अभिलिखित करेगा।
(2) जहां इस अध्याय के अधीन किसी मामले में मजिस्ट्रेट अभियुक्त को दोषी पाता है, किंतु धारा 325 या धारा 360 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता, वहां वह दंडादेश के प्रश्न पर अभियुक्त को सुनने के पश्चात् विधि के अनुसार उस पर दंडादेश पारित करेगा।
(3) जहां इस अध्याय के अधीन किसी मामले में धारा 211 की उपधारा (7) के उपबंधों के अधीन पूर्व दोषसिद्धि का आरोप लगाया जाता है और अभियुक्त यह स्वीकार नहीं करता कि वह आरोप में अभिकथित रूप से पूर्व में दोषसिद्ध किया जा चुका है, वहां मजिस्ट्रेट, उक्त अभियुक्त को दोषसिद्ध कर देने के पश्चात्, अभिकथित पूर्व दोषसिद्धि के संबंध में साक्ष्य ले सकेगा और उस पर निष्कर्ष अभिलिखित करेगा:
परन्तु जब तक अभियुक्त उपधारा (2) के अधीन दोषसिद्ध नहीं कर दिया जाता, तब तक न तो ऐसा आरोप मजिस्ट्रेट द्वारा पढ़कर सुनाया जाएगा, न अभियुक्त से उस पर अभिवाक् करने के लिए कहा जाएगा और न ही अभियोजन द्वारा या उसके द्वारा पेश किए गए किसी साक्ष्य में पूर्व दोषसिद्धि का निर्देश किया जाएगा।
नया कानून
BNSS §271
दोषमुक्ति या दोषसिद्धि।
(1) यदि इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में, जिसमें आरोप तय किया गया हो, मजिस्ट्रेट अभियुक्त को निर्दोष पाता है, तो वह बरी करने का आदेश दर्ज करेगा।
(2) जहाँ इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में मजिस्ट्रेट अभियुक्त को दोषी पाता है, परन्तु धारा 364 या धारा 401 के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता, तो वह सजा के प्रश्न पर अभियुक्त को सुनने के बाद विधि के अनुसार उसे सजा सुनाएगा।
(3) जहां इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में धारा 234 की उपधारा (7) के प्रावधानों के तहत पूर्व दोषसिद्धि का आरोप लगाया जाता है और अभियुक्त यह स्वीकार नहीं करता कि उसे आरोप में बताए अनुसार पहले दोषी ठहराया गया है, तो मजिस्ट्रेट उक्त अभियुक्त को दोषी ठहराने के बाद कथित पूर्व दोषसिद्धि के संबंध में साक्ष्य ले सकता है और उस पर निष्कर्ष दर्ज करेगा:
बशर्ते कि मजिस्ट्रेट द्वारा ऐसा कोई आरोप नहीं पढ़ा जाएगा, न ही आरोपी से उसका जवाब देने के लिए कहा जाएगा, न ही अभियोजन पक्ष द्वारा या उसके द्वारा प्रस्तुत किसी भी साक्ष्य में पिछली सजा का उल्लेख किया जाएगा, जब तक कि आरोपी को उपधारा (2) के तहत दोषी नहीं ठहराया जाता है।
पूरा पढ़ें: BNSS §271(2) जहाँ इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में मजिस्ट्रेट अभियुक्त को दोषी पाता है, परन्तु धारा 364 या धारा 401 के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता, तो वह सजा के प्रश्न पर अभियुक्त को सुनने के बाद विधि के अनुसार उसे सजा सुनाएगा।
(3) जहां इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में धारा 234 की उपधारा (7) के प्रावधानों के तहत पूर्व दोषसिद्धि का आरोप लगाया जाता है और अभियुक्त यह स्वीकार नहीं करता कि उसे आरोप में बताए अनुसार पहले दोषी ठहराया गया है, तो मजिस्ट्रेट उक्त अभियुक्त को दोषी ठहराने के बाद कथित पूर्व दोषसिद्धि के संबंध में साक्ष्य ले सकता है और उस पर निष्कर्ष दर्ज करेगा:
बशर्ते कि मजिस्ट्रेट द्वारा ऐसा कोई आरोप नहीं पढ़ा जाएगा, न ही आरोपी से उसका जवाब देने के लिए कहा जाएगा, न ही अभियोजन पक्ष द्वारा या उसके द्वारा प्रस्तुत किसी भी साक्ष्य में पिछली सजा का उल्लेख किया जाएगा, जब तक कि आरोपी को उपधारा (2) के तहत दोषी नहीं ठहराया जाता है।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
