पाठ लगभग अपरिवर्तित है
CrPC धारा 213 अब BNSS धारा 236 है
धारा 213. अपराध किए जाने की रीति कब कथित की जानी चाहिए
पुराना कानून
CrPC §213
धारा 213. अपराध किए जाने की रीति कब कथित की जानी चाहिए
213. अपराध किए जाने की रीति कब कथित की जानी चाहिए
जब मामले की प्रकृति ऐसी है कि धारा 211 और धारा 212 में वर्णित विशिष्टियां अभियुक्त को उस बात की पर्याप्त सूचना नहीं देतीं जिसका उस पर आरोप है, तब आरोप में उस रीति की, जिससे अभिकथित अपराध किया गया था, ऐसी विशिष्टियां भी अंतर्विष्ट होंगी जो उस प्रयोजन के लिए पर्याप्त होंगी।
दृष्टांत
(क) क पर किसी निश्चित समय और स्थान पर किसी वस्तु की चोरी का अभियोग है। आरोप में उस रीति का उपवर्णन आवश्यक नहीं है जिससे चोरी की गई थी।
(ख) क पर किसी दिए हुए समय और स्थान पर ख के साथ छल करने का अभियोग है। आरोप में उस रीति का उपवर्णन होना चाहिए जिससे क ने ख के साथ छल किया।
(ग) क पर किसी दिए हुए समय और स्थान पर मिथ्या साक्ष्य देने का अभियोग है। आरोप में क द्वारा दिए गए साक्ष्य का वह अंश उपवर्णित होना चाहिए जो मिथ्या होना अभिकथित है।
(घ) क पर किसी दिए हुए समय और स्थान पर लोक सेवक ख को उसके लोक कृत्यों के निर्वहन में बाधा डालने का अभियोग है। आरोप में उस रीति का उपवर्णन होना चाहिए जिससे क ने ख को उसके कृत्यों के निर्वहन में बाधा डाली।
(ङ) क पर किसी दिए हुए समय और स्थान पर ख की हत्या का अभियोग है। आरोप में उस रीति का कथन आवश्यक नहीं है जिससे क ने ख की हत्या की।
(च) क पर ख को दंड से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा करने का अभियोग है। आरोप में वह अवज्ञा, जिसका आरोप है, और वह विधि, जिसका उल्लंघन किया गया, उपवर्णित होनी चाहिए।
पूरा पढ़ें: CrPC §213जब मामले की प्रकृति ऐसी है कि धारा 211 और धारा 212 में वर्णित विशिष्टियां अभियुक्त को उस बात की पर्याप्त सूचना नहीं देतीं जिसका उस पर आरोप है, तब आरोप में उस रीति की, जिससे अभिकथित अपराध किया गया था, ऐसी विशिष्टियां भी अंतर्विष्ट होंगी जो उस प्रयोजन के लिए पर्याप्त होंगी।
दृष्टांत
(क) क पर किसी निश्चित समय और स्थान पर किसी वस्तु की चोरी का अभियोग है। आरोप में उस रीति का उपवर्णन आवश्यक नहीं है जिससे चोरी की गई थी।
(ख) क पर किसी दिए हुए समय और स्थान पर ख के साथ छल करने का अभियोग है। आरोप में उस रीति का उपवर्णन होना चाहिए जिससे क ने ख के साथ छल किया।
(ग) क पर किसी दिए हुए समय और स्थान पर मिथ्या साक्ष्य देने का अभियोग है। आरोप में क द्वारा दिए गए साक्ष्य का वह अंश उपवर्णित होना चाहिए जो मिथ्या होना अभिकथित है।
(घ) क पर किसी दिए हुए समय और स्थान पर लोक सेवक ख को उसके लोक कृत्यों के निर्वहन में बाधा डालने का अभियोग है। आरोप में उस रीति का उपवर्णन होना चाहिए जिससे क ने ख को उसके कृत्यों के निर्वहन में बाधा डाली।
(ङ) क पर किसी दिए हुए समय और स्थान पर ख की हत्या का अभियोग है। आरोप में उस रीति का कथन आवश्यक नहीं है जिससे क ने ख की हत्या की।
(च) क पर ख को दंड से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा करने का अभियोग है। आरोप में वह अवज्ञा, जिसका आरोप है, और वह विधि, जिसका उल्लंघन किया गया, उपवर्णित होनी चाहिए।
नया कानून
BNSS §236
अपराध करने का तरीका कब बताना आवश्यक है?
जब मामले की प्रकृति ऐसी हो कि धारा 234 और 235 में उल्लिखित विवरण अभियुक्त को उस मामले की पर्याप्त सूचना न दें जिसके लिए उस पर आरोप लगाया गया है, तो आरोप पत्र में कथित अपराध को अंजाम देने के तरीके के ऐसे विवरण भी शामिल होंगे जो उस उद्देश्य के लिए पर्याप्त होंगे।
चित्र।
(क) ए पर किसी निश्चित समय और स्थान पर किसी निश्चित वस्तु की चोरी का आरोप है। आरोप में चोरी करने के तरीके का उल्लेख करना आवश्यक नहीं है।
(ख) ए पर किसी निश्चित समय और स्थान पर बी को धोखा देने का आरोप है। आरोप में यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि ए ने बी को किस प्रकार धोखा दिया।
(ग) ए पर किसी दिए गए समय और स्थान पर झूठी गवाही देने का आरोप है। आरोप में ए द्वारा दी गई गवाही के उस हिस्से का उल्लेख होना चाहिए जिसे झूठा माना जाता है।
(घ) ए पर किसी निश्चित समय और स्थान पर लोक सेवक बी को उसके लोक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालने का आरोप है। आरोप में यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि ए ने बी को उसके कार्यों के निर्वहन में किस प्रकार बाधा डाली।
(ई) ए पर किसी दिए गए समय और स्थान पर बी की हत्या का आरोप है। आरोप में यह बताना आवश्यक नहीं है कि ए ने बी की हत्या किस प्रकार की।
(f) A पर B को दंड से बचाने के इरादे से कानून के निर्देश का उल्लंघन करने का आरोप है। आरोप में कथित उल्लंघन और उल्लंघन किए गए कानून का उल्लेख होना चाहिए।
पूरा पढ़ें: BNSS §236चित्र।
(क) ए पर किसी निश्चित समय और स्थान पर किसी निश्चित वस्तु की चोरी का आरोप है। आरोप में चोरी करने के तरीके का उल्लेख करना आवश्यक नहीं है।
(ख) ए पर किसी निश्चित समय और स्थान पर बी को धोखा देने का आरोप है। आरोप में यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि ए ने बी को किस प्रकार धोखा दिया।
(ग) ए पर किसी दिए गए समय और स्थान पर झूठी गवाही देने का आरोप है। आरोप में ए द्वारा दी गई गवाही के उस हिस्से का उल्लेख होना चाहिए जिसे झूठा माना जाता है।
(घ) ए पर किसी निश्चित समय और स्थान पर लोक सेवक बी को उसके लोक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालने का आरोप है। आरोप में यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि ए ने बी को उसके कार्यों के निर्वहन में किस प्रकार बाधा डाली।
(ई) ए पर किसी दिए गए समय और स्थान पर बी की हत्या का आरोप है। आरोप में यह बताना आवश्यक नहीं है कि ए ने बी की हत्या किस प्रकार की।
(f) A पर B को दंड से बचाने के इरादे से कानून के निर्देश का उल्लंघन करने का आरोप है। आरोप में कथित उल्लंघन और उल्लंघन किए गए कानून का उल्लेख होना चाहिए।
1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज मामलों पर पुराना कानून लागू रहता है। यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं।
